Wednesday,29 September 2021   04:15 am
केरल बनेगा कोरोना की तीसरी लहर का केंद्र, 50% मामले अकेले केरल से, केंद्र भेजेगा टीम

केरल बनेगा कोरोना की तीसरी लहर का केंद्र, 50% मामले अकेले केरल से, केंद्र भेजेगा टीम

30-Jul-2021

केरल।   केरल में बकरीद के दौरान सरकार की ओर से दी गई छूटों का खामियाजा अब आम जनता को उठाना पड़ रहा है। यहां कोरोना के केस अब दोगुनी तेजी से बढ़ रहे हैं। आलम यह है कि पिछले दो दिनों में राज्य मेें कोरोना के 22 हजार से ज्यादा केस दर्ज किए जा रहे हैं। यानी पूरे देश में आ रहे 43 हजार केसों में आधे केरल से ही हैं। इतना ही नहीं देश में मौजूदा समय में 4 लाख एक्टिव केस हैं, जिनमें 1।5 लाख सक्रिय मामले केरल से ही हैं। इस स्थिति को देखते हुए केरल की लेफ्ट सरकार ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान किया है। केंद्र सरकार ने भी एक छह सदस्यीय टीम केरल की मदद के लिए भेजी है। बीते 50 दिनों में देश के किसी भी राज्य में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना के नए मामले दर्ज नहीं किए गए हैं। केरल में कोरोना के ये आंकड़े तीसरी लहर के यहीं से शुरू होने का अंदेशा दे रहे हैं।

859 लोग प्रति वर्ग किमी के साथ राज्य का जनसंख्या घनत्व ज्यादा है। साथ ही बुजुर्ग आबादी की संख्या भी ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि कम से कम 15 प्रतिशत जनसंख्या 60 साल से ज्यादा उम्र की है। इसके अलावा डायबिटीज जैसी बीमारियों के ज्यादा मामलों के चलते राज्य की कोरोना के खिलाफ जंग मुश्किल बनी हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया गया कि धीमी जांच दर, रैपिड एंटीजन टेस्ट से खास लगाव और नौकरशाही पर निर्भरता जैसे कई कारण भी केरल की कोविड लड़ाई को धीमा कर रहे हैं।

राज्य में ऑक्सीजन वाले बिस्तरों की कमी नहीं है, लेकिन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था फिर भी दबाव में है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बीते हफ्ते से तुलना की जाए, तो बिस्तरों की मांग 14 फीसदी बढ़ी है और इस हफ्ते 80 प्रतिशत कोविड बिस्तरों पर मरीजों का इलाज जारी था। देश के 30 सबसे प्रभावित जिलों में से 10 केरल के हैं। कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) रोकने के लिए केरल की रणनीतियों की काफी तारीफ हुई थी, लेकिन लगातार बढ़ रहे संक्रमण के मामले अब बिगड़ते हालात की गवाही दे रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की तरफ से किए गए सीरोसर्वे में भी पता चला है कि केरल में सबसे कम 44।4 फीसदी एंटीबॉडीज हैं।


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