Thursday,28 October 2021   11:19 pm
Quad summit: PM मोदी अमेरिका रवाना, जानें क्या है समिट, क्यों है ये हमारे लिए अहम

Quad summit: PM मोदी अमेरिका रवाना, जानें क्या है समिट, क्यों है ये हमारे लिए अहम

22-Sep-2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार को अमेरिका दौरे के लिए रवाना (PM Narendra Modi US Visit) हो गए।  तीन दिन के इस कार्यक्रम में पीएम मोदी कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।  इसमें जो बाइडेन संग द्विपक्षीय बातचीत, क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेना और UNGA में उनका संबोधन शामिल है।

यहां 24 सितंबर को क्वाड समिट (Quad Summit ) है, जहां क्वाड देशों के नेता यानी पीएम मोदी, ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मोरिसन, जापानी पीएम योशिहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पहली बार आमने-सामने होंगे।  इससे पहले क्वाड समिट वर्चुअली ही जाती रही है।  आइए जानते हैं क्वाड क्या है? ये क्या काम करता है और हिंद-प्रशांत महासागर के परिपेक्ष्य में इसकी जरूरत क्यों अहम हैं? इसके अलावा इसे चीन की बढ़ती ताकत के मुकाबले में नया विकल्प क्यों देखा जा रहा है?

प्रधानमंत्री उसी दिन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापानी समकक्ष योशीहिदे सुगा से भी मुलाकात करेंगे।  इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी एक खुले, मुक्त, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि भारत विभिन्न पहलों के माध्यम से अपनी भागीदारी बढ़ा रहा है।  विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री 24 सितंबर को वॉशिंगटन में क्वाड समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।  इस मुलाकात के बाद ही व्हाइट हाउस में QUAD नेताओं की बैठक होगी, जिसमें अफगानिस्तान, इंडो-पैसिफिक, कोविड -19 महामारी और जलवाायु संकट जैसे संवेदनशील मामलों पर बात की जाएगी।  प्रधानमंत्री 24 सितंबर की शाम वाशिंगटन से न्यूयॉर्क जाएंगे जहां 25 सितंबर को वह UN महासभा को संबोधित करेंगे।

– क्वाड आधिकारिक तौर पर क्वाड्रिलेटरल सिक्युरिटी डायलॉग्स (QSD) है।  भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इसके मेंबर हैं।  इसका मकसद इन देशों के समुद्री सीमाओं के हितों का ध्यान रखना, जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी से लड़ना है।  दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती ताकत से मुकाबला करना भी इसका अहम उद्देश्य है।

– क्वाड की शुरुआत 2004 में हिंद महासागर में आई सूनामी से मानी जा सकती है।  तब भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने मिलकर राहत और बचाव कार्य किए थे और रीजन में बड़े पैमाने पर राहत-सामग्री भेजी थीं।  लेकिन इस ऑपरेशन के बाद ये ग्रुप खत्म कर दिया गया।  लेकिन 2006 में तत्कालीन जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इस ग्रुप को दोबारा से शुरू करने का प्रस्ताव रखा।  उन्होंने कहा कि इस ग्रुप में समान सोच वाले देश जुड़ें और हिंद-प्रशांत महासागर की सुरक्षा में सहयोग दें।

– 2007 में शिंजो आबे ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया।  वहीं, ऑस्ट्रेलिया में केविड रड पीएम बन गए, जो क्वाड के आलोचक माने जाते थे।  उन्होंने चीन के दबाव में क्वाड से अपने हाथ पीछे खींच लिए।  2008 तक ग्रुप खत्म हो गया।

– 2017 में जापान ने फिर से क्वाड के शुरू करने का प्रस्ताव रखा।  मनीला में पहली वर्किंग लेवल मीटिंग रखी गई।  2020 में भारत-यूएस-जापान मालाबार नेवल एक्सरसाइज में ऑस्ट्रेलिया भी जुड़ गया।

– 24 सितंबर को पहली क्वाड नेता आमने-सामने होंगे।

– क्वाड एक औपचारिक गठबंधन के बजाय सॉफ्ट ग्रुप है।  इसके पास फैसला लेने का अधिकार नहीं है।  जैसे फैसले नाटो देश या यूएन में लिए जाते हैं।  ये ग्रुप समिट, मीटिंग, जानकारी साझा करने और सैन्य अभ्यास के जरिए काम करता है।  इस गठबंधन का कोई जटिल ढांचा नहीं है।  कोई भी देश इस ग्रुप को कभी भी छोड़ सकता है।


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