Friday,28 January 2022   12:02 pm
Supreme Court : इलाज के दौरान कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का जीवन बचाने का आश्वासन नहीं दे सकता

Supreme Court : इलाज के दौरान कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का जीवन बचाने का आश्वासन नहीं दे सकता

01-Dec-2021

नई दिल्ली (इंडिया)। कभी भी अगर किसी मरीज की मौत हो जाए तो उसका इल्जाम मरीज का इलाज कर रहे है डॉक्टर पर लगा दिया जाता था। डॉक्टर्स बेवजह लापरवाही के केस पिसते रहते थे। लेकिन अब ऐसा नही है। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम् फैसला लिया है।

हालिया सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, 'कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का जीवन बचाने का आश्वासन नहीं दे सकता। डॉक्टर केवल अपनी सर्वोत्तम क्षमता से इलाज कर सकता है। अगर किसी कारणवश मरीज जीवित नहीं बचता तो डॉक्टरों पर चिकित्सकीय लापरवाही का दोष नहीं लगाया जा सकता।' कोर्ट ने कहा, 'अस्पताल में रहने के दौरान डॉक्टर से मरीज के बिस्तर के किनारे पर रहने की उम्मीद करना ठीक नहीं।'

क्या है मामला

22 अप्रैल 1998 को अस्पताल में भर्ती मरीज दिनेश जायसवाल ने 12 जून 1998 को अंतिम सांस ली थी। अस्पताल ने इलाज के लिए उससे 4.08 लाख रुपये लिए थे। परिवार के सदस्यों का आरोप था कि गैंगरीन के ऑपरेशन के बाद लापरवाही की गई, डॉक्टर विदेश दौरे पर था और आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर उपलब्ध नहीं था। 

बता दें एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मरीज की मौत का जिम्मेदार नही बताया है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी राम सुब्रमण्यम की पीठ ने बॉम्बे अस्पताल एवं चिकित्सा अनुसंधान केंद्र की याचिका को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें चिकित्सा लापरवाही के कारण मरीज दिनेश जायसवाल की मौत के लिए आशा जायसवाल और अन्य को 14.18 लाख रुपये का भुगतान देने का आदेश दिया गया है।

पीठ ने कहा, सुपर-स्पेशलाइजेशन के वर्तमान युग में एक डॉक्टर एक मरीज की सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। प्रत्येक समस्या को संबंधित क्षेत्र में विशेषज्ञ द्वारा निपटाया जाता है। अस्पताल और डॉक्टर को चिकित्सकीय लापरवाही के लिए दोषी ठहराने वाले आयोग के निष्कर्ष कानून के हिसाब से टिकाऊ नहीं हैं। अंतरिम आदेश के तहत शिकायतकर्ता को दिए गए पांच लाख रुपए की राशि को अनुग्रह भुगतान के रूप में माना जाएगा।


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