Monday,05 December 2022   05:19 pm

New Traffic Rule: आपका भी चालान कट सकता है, वाहन चलाने से पहले हो जाएं सावधान

24-Jan-2022

नई दिल्ली (इंडिया)। वाहन चलाने वाले सावधान हो जाएं, आपका भी चालान कट सकता है। ट्रैफिक नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। अगर आप ऐसा नही करते तो आप अपने साथ अपने साथ दूसरों का भी नुकसान कर सकते है।

नए मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार चार साल से ज्यादा उम्र का बच्चा तीसरी सवारी के तोर पर गिना जाएगा। ऐसे में अगर आप अपने टू-व्हीलर पर सवार होकर अपने बच्चे और पत्नी को बैठाकर कही जा रहे है और बच्चे की उम्र चार साल से अधिक है तो आपका चालान कट सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194A के अनुसार आपका इस नियम का उल्लंघन करने पर 1000 रुपए का चालान कट सकता है।

मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत हेलमेट नहीं पहनने वाल दोपहिया वाहन चालकों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-194सी के तहत तीन महीने के लिए सस्पेंड हो सकता है।

वाहन चलाते समय रास्ते में हमेशा एम्बुलेंस के सायरस की आवाज पर ध्यान दें और आपतकालीन वाहन को रास्ता दें। उसे पहले आगे निकलने दें। आपका ऐसा ना करना ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना है। इसके लिए आपका ट्रैफिक चालान कट सकता है।

चेकिंग के दौरान अब अगर आपके पास एम परिवहन एप अथवा डिजीलॉकर में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के पंजीकरण व बीमा के दस्तावेज हैं तो पुलिस या परिवहन विभाग मोटर वाहन अधिनियम की धारा-180 के अंतर्गत चालान नहीं कर सकेंगे।

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (MoRTH Nitin Gadkari) ने बताया कि ट्रैफिक नियमों के मुताबिक, कार चलाते वक्त अगर कोई ड्राइवर हैंड्स-फ्री कम्युनिकेशन फीचर (Hands Free Calls) का इस्तेमाल कर अपने मोबाइल फोन पर बात करता है तो यह दंडनीय अपराध (Punishable Offence) नहीं है। इसके लिए ड्राइवर को किसी भी प्रकार का जुर्माना नहीं भरना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने बताया कि अगर कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी आपका चालान काट देता है तो आप उसे कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, मौजूदा ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) के मुताबिक इसकी कुछ शर्तें भी हैं।

बड़ी खबर! मुख्यमंत्री भुपेशबघेल ने की घोषणा, धान खरीदी तारीख अब 07 फरवरी तक

22-Jan-2022

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश के बाद धान खरीदी प्रभावित होने से बढ़ी किसानों की चिंता कुछ हद तक कम हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी को एक सप्ताह तक बढ़ाये जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य के किसानों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में निर्णय लेती रहेगी। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 31 जनवरी तक धान खरीदी होनी थी , हाल ही में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में हुई बेमौसम बारिश के बाद कई जिलों में करीब एक सप्ताह तक धान खरीदी रुकी हुई थी। विपक्ष और किसान संगठन सरकर से लगातार धान खरीदी बढ़ाने की मांग कर रहे थे।

बेमौसम बारिश से खरीदी प्रभावित
राज्य में एक दिसंबर से धान खरीदी शुरू कर दिया गया था. पहले महीने किसानों ने जमकर उत्साह दिखाया और एक महीने के भीतर 53 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हुई. लेकिन जनवरी महीने में लगातार बेमौसम बारिश से धान खरीदी प्रभावित हुई है. इसके चलते किसान अपना धान नहीं बेच सके और इसी कारण से धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाई गई है. ताकि सभी किसानों की धान खरीदी किया जा सके.

धान की खरीदी
गौरतलब है की छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के चालू सीजन में राज्य के 2,484 धान उपार्जन केन्द्रों में 18 जनवरी तक 17 लाख 59 हजार 182 किसानों से 71 लाख 36 हजार 355 मीटरिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है. अब तक राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी के अनुमानित लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत धान की खरीदी हो चुकी है. लेकिन अब भी सरकार लक्ष्य से काफी दूर है. 

क्या बच्चों को वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत होगी? WHO की चीफ साइंटिस्ट ने दिया जवाब

20-Jan-2022

नई दिल्ली (इंडिया)। भारत में कोरोना महामारी की तीसरी लहर का कहर जारी है। हाल ही में 15-18 आयुवर्ग के लिए भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत सरकार ने शुरू किया था। साथ ही 60 साल से ज्यादा उम्र (गंभीर बीमारी) वाले लोगों को प्रीकॉशन डोज दी जा रही। इसके बाद से सवाल उठ रहे थे कि क्या पूरी तरह से स्वस्थ बच्चों और किशोरों को भी बूस्टर डोज की जरूरत है। इस पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन का जवाब सामने आया है।

बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ सौम्या विश्वनाथन ने कहा कि, फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्वस्थ बच्चों और किशोरों को कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत होगी। दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन की शीर्ष डॉक्टर का यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका, जर्मनी और इजरायल जैसे देशों ने बच्चों को बूस्टर डोज देने की शुरुआत कर दी है। वहां के शीर्ष नियामक एफडीए ने इसी महीने की शुरुआत में फाइजर और बायोएनटेक की तीसरी डोज को मंजूरी दी थी। वहीं इजरायल भी 12 साल के ऊपर के बच्चों को बूस्टर डोज देने का प्लान बना रहा है। इसी तरह के हालात जर्मनी में भी हैं, वहां हाल ही में एक कंपनी ने 12-17 आयुवर्ग के लिए बूस्टर शॉट की सिफारिश की है।

डॉ सौम्या विश्वनाथन ने कहा कि बूस्टर डोज का मुख्य उद्देश्य उस कमजोर वर्ग के लोगों को कोविड-19 से सुरक्षा प्रदान करने की है। जिनमें गंभीर बीमारियों और मौत से जुड़ा खतरा ज्यादा है। बुजुर्ग आबादी के साथ-साथ हेल्थ वर्कर भी इसमें शामिल हैं।

कोरोना का असर, छत्तीसगढ़ के सभी कॉलेजों में ऑनलाइन या ब्लेन्डेड मोड में आयोजित होंगी परीक्षाएं

14-Jan-2022

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सभी यूनिवर्सिटी में होने वाली पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं अब ऑनलाइन और ब्लैंडेड मोड में आयोजित की जाएगी.

बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह से उच्च शिक्षा विभाग ने ये फैसला लिया है. साथ ही स्टूडेंट्स की फिज़िकल अटेंडेंस पर तुरंत बैन लगा दिया गया है. 
कॉलेजों में सभी पाठ्यक्रमों के पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जायेंगी. 
साथ ही यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक और अशैक्षणिक अमला एक तिहाई-रोस्टर का पालन करते हुए कॉलेज,यूनिवर्सिटी या अन्य संस्था जाएंगे.
राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2021-22 के सेमेस्टर पद्धति वाले सभी पाठ्यक्रमों के पहले और तीसरे तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑनलाईन, ब्लैन्डेड मोड में आयोजित करने के निर्देश जारी किये गये हैं. 
साथ ही विश्वविद्यालयों द्वारा इस संबंध में उनकी कार्य परिषद के अनुमोदन से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने को भी निर्देशित किया गया है.
अधिकारियों ने बताया कि दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि महाविद्यालय के गैर-शैक्षणिक कार्य रोस्टर ड्यूटी के अनुसार उपस्थित कर्मचारियों द्वारा महाविद्यालय में उपस्थित होकर किया जाएगा तथा अन्य कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम पद्धति से कार्यों में सहयोग करेंगे.
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कॉलेज के गैर-शैक्षणिक कार्य रोस्टर ड्यूटी अनुसार उपस्थित कर्मचारियों द्वारा महाविद्यालय में उपस्थित होकर किया जायेगा किन्तु बाकी समस्त कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम पद्धति से फोन और ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत कार्यों में सहयोग करेंगे. इसके अलावा किसी भी स्थिति में अधिकारी-कर्मचारी द्वारा अवकाश स्वीकृति कराये बिना तथा सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय का त्याग नहीं किया जायेगा.

 

कलेक्टर की नई गाइडलाइन, रायपुर में बैंक, कम्पनियों जैसे कार्यालयों के संचालन के लिए जारी हुए नए दिशानिर्देश

13-Jan-2022

 
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रात 9 से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगाया हुआ है। दरअसल छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते कई जिलों में नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। इसी कड़ी में अब  कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए रायपुर कलेक्टर की ओर से केंन्द्र सरकार के अधिनस्थ कार्यालयों के संचालन हेतु नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। अब जिले के डाकघर, बैंक, बीमा कार्यालय, आयकर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के कार्यालय आदि का संचालन इन्हीं नियमों के तहत रहकर किया जाएगा। 

देखिए आदेश :-

छत्‍तीसगढ़ राज्य वीरता पुरस्कार : अमन और शौर्य का हुआ चयन, 26 जनवरी को राज्यपाल करेंगी सम्मानित

13-Jan-2022

Chhattisgarh Rajya Veerta Puraskar :छत्तीसगढ़ में प्रति वर्ष 26 जनवरी को राज्य वीरता पुरस्कार बहादुर बच्चों को दिया जाता है। राज्य वीरता पुरस्कार चयन के लिए अधिकृत नोडल एजेंसी छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद ने इस वर्ष के वीरता पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।

इन पुरस्कारों के लिए छत्तीसगढ़ शासन की मंत्री अनिला भेडिय़ा की अध्यक्षता में ज्यूरी समिति की बैठक हुई। जिसमे ज्यूरी समिति की अनुशंसा पर प्रदेश के 2 बहादुर बच्चों, जिनमें धमतरी से शौर्य प्रताप चंद्राकर और कोरबा से अमन ज्योति जाहिरे का चयन किया गया है। जिन्हें राजधानी रायपुर में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राज्यपाल अनुसुईया उईके सम्मानित करेंगी।

अमन ज्योति जाहिरे

घटना दिनांक एक अगस्त 2021- कोरबा के कुछ छात्र दोपहर लगभग दो बजे अपने एक मित्र साहिल पैगवार का जन्मदिन मनाने के लिए 20 किलोमीटर दूर पिकनिक स्पाट परसाखेला बांध के झरना के पास पिकनिक मनाने गए। इनमें से कक्षा 12वीं में अध्ययनरत छात्र आशीष ठाकुर, जलप्रपात के पहले, किनारे में अपना हाथ-पैर धोने के लिए गया। वहां चट्टान में पैर फिसल कर गिरने के कारण वह पानी के तेज धार में बहने लगा। आगे गहरी खाई होने के कारण उसमें गिरने का खतरा था। फिसलन चट्टान और पानी की तेज धार में आशीष को बहते देख सभी मित्र घबरा गए क्योंकि उन्हें तैरना नहीं आता था और वे बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे। तभी 15 वर्षीय छात्र अमन ज्योति अपने मित्र आशीष की जान बचाने पानी के तेज बहाव में कूद गया।

शौर्य प्रताप चंद्राकर

घटना दिनांक 13 जून 2021- सुबह लगभग 11 ग्राम सेनचुवा, पोस्ट- छाती, जिला- धमतरी निवासी भूषण चंद्राकर, महेंद्र तारक, परसराम साहू, योगेश्वर साहू, डोमन पटेल, विजय सभी लोग खेत में साफ-सफाई व आवश्यक कार्य कर रहे थे। इसी समय खेत में से गुजरने वाली बिजली की तार खेत में स्थित बबूल के वृक्ष से टकराया और आग लग गई, जिससे वृक्ष की डाली जलने लगी।

वहीं बालक शौर्य प्रताप चंद्राकर अपने पिताजी भूषण चंद्राकर के साथ खेत देखने गया था। शौर्य ने आग जलते देखकर सभी को खेत से निकलने के लिए जोर-जोर से चिल्लाया और शीघ्र ही लाइन मेन सुरेंद्र ध्रुव को बिजली आफिस छाती में फोन पर विद्युत पावर को बंद करने की सूचना दी। विद्युत पावर के बंद होने से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।

 

राज्य वीरता पुरस्कार  ज्यूरी समिति इस प्रकार है –

  • महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अनिला भेडिय़ा (अध्यक्ष)
  • छ.ग. राज्य बाल कल्याण परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल (उपाध्यक्ष)
  • सचिव गृहविभाग
  • पुलिस महानिदेशक (इन्टलीजेन्स) (सदस्य)
  • संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग (सदस्य)
  • ब्रिगेडियर, एन.सी.सी., स्टेट सेल रायपुर (सदस्य)
  • कलेक्टर, जिला रायपुर (सदस्य)
  • चन्द्रेश शाह, उपाध्यक्ष छ.ग.राज्य बाल कल्याण परिषद (सदस्य)
  • डॉ. अशोक त्रिपाठी, महासचिव, छ.ग.राज्य बाल कल्याण परिषद (सदस्य सचिव)
  • इंदिरा जैन, संयुक्त सचिव, छ.ग.राज्य बाल कल्याण परिषद एवं संयोजक राज्य वीरता पुरस्कार (सदस्य)
  • राजेन्द्र निगम, कार्यकारिणी सदस्य, छ.ग.राज्य बाल कल्याण परिषद एवं सहसंयोजक राज्य वीरता पुरस्कार (सदस्य)

स्वामी विवेकानंद सरोवर (बूढ़ा तालाब, रायपुर ) : विवेकानन्द के किशोर काल का यह साक्षीस्थल

13-Jan-2022

रायपुर। स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं. यही कारण है उनके जन्मदिन को युवा दिवस के रूप मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था. 

कल  स्वामी विवेकानंद की जयंती है। उल्लेखनीय है स्वामी विवेकानंद के किशोर काल का दो महत्वपूर्ण वर्ष रायपुर में व्यतीत हुए। वे 1877 से 1879 तक रायपुर के बूढा तालाब स्थित डे भवन में रहे। आज बूढा तालाब स्वामी विवेकानन्द सरोवर के नाम से जाना जाता है।
रायपुर स्थित उस भवन पर जा कर उन स्मृतियों को कैमरे में क्लिक किया जहां नरेंद्र रहते थे। यही नरेंद्र आगे चल कर स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।
यह भी उल्लेखनीय है कि 3 वर्षों के गहन शोध के पश्चात पत्रकार वसन्त वीर ने पुस्तक 'पत्रकार,पत्रकारिता व स्वामी विवेकानंद" को पूर्ण किया है। यह पुस्तक वसन्त पंचमी को विमोचित होगी। उनके इस कार्य के लिए fesn न्यूज़  की ओर से उन्हें बधाई।
अंग्रेज़ के शासन काल में यह बूढ़ा तालाब अंग्रेजो के आराम करने का एक सुंदर जगह हुआ करता था।  बचपन में स्वामी विवेकानंद दो वर्ष के लिए इस रायपुर शहर में आए थे। इस बूढ़ा तालाब में स्वामी विवेकानंद तालाब के किनारे ध्यान किया करते थे।
 सुंदर प्रतिमा – यह बूढ़ा तालाब के बीचों बीच ध्यान मुद्रा में विराजमान स्वामी विवेकानंद की सुंदर प्रतिमा है।
 
बूढ़ा तालाब का निर्माण – 600 वर्ष पहले कल्चुरी वंश के राजा रायसेन के द्वारा इस तालाब का निर्माण करवाया गया था ।इस तालाब का नाम अपने ईष्ट देव बूढ़ा देव के नाम पर रखा गया था ।  इस तालाब को बूढ़ा तालाब के नाम से जाना जाता था लेकिन अब यह तालाब को स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से जाना जाता है। 
 
प्रतिमा का अनावरण – श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के करकमलों द्वारा इस प्रतिमा का अनावरण हुआ था। तालाब के बीच में स्वामी  विवेकानंद जी की ये प्रतिमा, लिम्काबुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
 
पर्यटन स्थल  – यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है जो सैलानियों को यह प्रतिमा अपनी ओर आने के लिए आकर्षित करती हैं। बूढ़ा तालाब के किनारे सुंदर हरे भरे पेड़ लगाएं गए हैं।उद्यान में ही बूढ़ा देव को भी स्थापित किया गया है।इस तालाब के आस पास अनेक मंदिर बने हुए हैं लेकिन जिसमे बूढ़ा देव का मंदिर प्रमुख है।
 
रात को यह उद्यान और भी लाईटिंग और डेकोरेशन से यह स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा और भी चमक उठती हैं। बूढ़ा तालाब में  दूर दूर से आने वाले पर्यटक यहां बोटिंग सुविधा का आनंद भी लेते हैं। 

महाराजा राजा विजय भूषण सिंह की जयंती | Birth anniversary of Maharaja Raja Vijay Bhushan Singh

11-Jan-2022

राजा विजय भूषण सिंह देव का जन्म 11 जनवरी 1926 को हुआ था। 5 वर्ष की अल्प आयु में ही वे जशपुर रियासत के राजा बने। उनकी शिक्षा रायपुर के राजकुमार कॉलेज एवं अजमेर के मेयो कॉलेज में हुई। 1947 तक उन्होंने जशपुर स्टेट के अंतिम शासक के रूप में राज किया। जनसेवा के लिए राजनीति का मार्ग अपनाकर उन्होंने मध्यप्रदेश की प्रथम विधान सभा चुनाव में जशपुर विधायक के रूप में 1952 से 1957 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1957 से 1962 तक बगीचा विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। रायगढ़ लोक सभा क्षेत्र के सांसद के रूप में 1967 तक आम जनता की आवाज संसद में पहुंचाया। 1970 से 1976 तक वे राज्यसभा सदस्य रहे। 

राजा विजय भूषण सिंह देव परोपकार जनहित के कार्यों में समर्पित रहे। उनकी आध्यात्मिक सोच एवं धार्मिक आस्था के के फलस्वरूप क्षेत्र को स्वामी करपात्री जी महाराज, अघोरेश्वर बाबा भगवान राम, बद्रीपीठ द्वारिका पीठाधीश्वर 1008 जगत गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज, औघड़ बाबा रामलोचन राम जैसे महान संतों एवं वनयोगी स्व. बाला साहेब देशपांडे मेरूभाऊ केतकर गुरु जैसे समाज सेवियों का सानिध्य मिला।
जशपुर में में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम जैसे समाज सेवी संस्थाओं की स्थापना में भी राजा साहब का योगदान रहा है। उनका निधन जशपुर में 17 अगस्त 1982 को हुआ।

छत्तीसगढ़ में सहायक आरक्षक अब जल्द ही बनेंगे आरक्षक, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दिए ये निर्देश

10-Jan-2022

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल यानि 09 जनवरी को एक अहम ऐलान किया है, प्रदेश में पदस्थ सहायक आरक्षक (Assistant constable) बहुत जल्द आरक्षक(Constable) बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने पुलिस मुख्यालय से इस संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। 

भूपेश बघेल ने अधिकारिक ट्वीटर हैंडल पर उक्ताशय की जानकारी दी है। 

मुख्यमंत्री की इस घोषणा से सहायक आरक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी होगी और वे अन्य भत्तों एवं  सुविधाओं के भी पात्र होंगे।

 

ख्यमंत्री बघेल ने लिखा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत सहायक आरक्षकों की आरक्षक के समकक्ष पद पर पदोन्नति एवं वेतन भत्ते प्रदाय किये जाने के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भिजवाने हेतु पुलिस मुख्यालय को निर्देशित किया है। 

इस घोषणा से सहायक आरक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी होगी और वे अन्य भत्तों एवं सुविधाओं के भी पात्र होंगे।

T20 International New Rule: आईसीसी ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशंस में किए 2 अहम बदलाव

07-Jan-2022

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशंस में दो अहम बदलाव किए हैं। आईसीसी क्रिकेट कमेटी के सुझावों के आधार पर टी-20 क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशंस में बदलाव किया गया है। टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट (पुरुष और महिला दोनों) में दो अहम बदलाव स्लो ओवर रेट और ड्रिंक्स ब्रेक को लेकर हुए हैं।

आईसीसी ने टी-20 क्रिकेट में भी धीमी ओवर गति पर जुर्माना लगाने का नियम ला दिया है। अब टी-20 में भी जो टीम निर्धारित समय पर 20 ओवर पूरे नहीं कर पाएगी, उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। आईसीसी का यह नया नियम सबीना पार्क में वेस्टइंडीज और आयरलैंड के बीच होने वाले मैच से लागू होगा।

इसके साथ ही आईसीसी ने टी-20 सीरीज में हर पारी के बीच में ड्रिंक्स ब्रेक का भी प्रावधान रखा है। महिला और पुरुष दोनों के लिए यह नियम लाया गया है। अब दो देशों के बीच टी-20 सीरीज के दौरान हर पारी के बीच में पानी और बाकी डिंक्स के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा।

बता दें कि, जनवरी 2022 से टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट की नई प्लेइंग कंडीशंस लागू होंगी। नए नियमों को तहत पुरुष क्रिकेट का पहला मैच वेस्टइंडीज और आयरलैंड के बीच सबीना पार्क के मैदान में 16 जनवरी को खेला जाएगा। वहीं दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला तीसरा टी-20 मैच महिलाओं का पहला मैच होगा, जिसमें नए नियम लागू किए जाएंगे। यह मैच 18 जनवरी को खेला जाएगा।

SECR की 8 ट्रेनें 7 से 11 जनवरी तक रद्द, सफर पर निकलने से पहले देख लें सूची, यहां चेक करें लिस्ट

06-Jan-2022

छत्तीसगढ़। SECR की 8 ट्रेनें 6 से 11 जनवरी तक रद्द रहेंगी। विद्युतीकरण और नॉन इंटरलॉकिंग के चलते ट्रेनों को रद्द किया गया है। बता दें कि  राजनांदगांव और कलमना के बीच तीसरी लाइन में काम होगा। इसके चलते इस रूट की ट्रेनों को रद्द किया गया है। ट्रेन रद्द होने से इस रूट में सफर करने वाले रेल यात्रियों को असुविधा होगी। 

 दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर रेल मंडल के राजनांदगांव एवं कलमना के बीच तीसरी रेल लाइन में विधुतीकरण का कार्य एवं भंडारा रोड स्टेशन से जोड़ने के काम के लिए नॉन इंटरलोकिंग का कार्य होना है. ये काम 06 से 12 जनवरी 2022 तक किया जाएगा. इसी के चलते कुछ गाड़ियो का टाइम टेबल प्रभावित रहेगा एवं इस खण्ड में चलने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द भी किया गया है. 

रद्द होने वाली गाडियां-

01- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक दुर्ग से चलने वाली 08741 दुर्ग-गोंदिया मेमू स्पेशल ट्रेन रद्द रहेगी ।
02- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक गोंदिया से चलने वाली 08743 गोंदिया-ईतवारी मेमू स्पेशल ट्रेन रद्द रहेगी ।
03- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक ईतवारी से चलने वाली 08744 ईतवारी-गोंदिया मेमू स्पेशल ट्रेन रद्द रहेगी ।
04- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक गोंदिया से चलने वाली 08742 गोंदिया-दुर्ग मेमू स्पेशल ट्रेन रद्द रहेगी ।
05- दिनांक 06 से 10 जनवरी, 2022 को गेवरा रोड से चलने वाली 18239 गेवरा रोड–इतवारी एक्सप्रेस रद्द रहेगी ।
06- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक इतवारी से चलने वाली 12856 इतवारी-बिलासपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी ।
07- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक बिलासपुर से चलने वाली 12855 बिलासपुर-इतवारी इंटरसिटी एक्सप्रेस रद्द रहेगी ।
08- दिनांक 07 से 11 जनवरी, 2022 तक इतवारी से चलने वाली 18240 इतवारी-गेवरा रोड एक्सप्रेस रद्द रहेगी ।

बीच में नियत्रित होने वाली गाड़ी-

01 - दिनांक 08 जनवरी, 2022 को 12808 निज़ामुद्दीन-विशाखापटनम समता एक्सप्रेस को नागपुर एवं भंडारा रोड रेलवे स्टेशनों के बीच 35 मिनट नियत्रित की जाएगी

अपनी पसंदीदा अलग-अलग भाषा में भी इस्तेमाल कर सकते हैं WhatsApp, जानें क्या है आसान तरीका

05-Jan-2022

व्हाट्सएप की भाषा को बदलना बेहद आसान है, इसके लिए बस आपको ये आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे। इसकी भाषा को बदलने के लिए आपके पास दो तरीके होते हैं। पहले तरीके के तहत यूजर्स को स्मार्टफोन की भाषा को बदलना होगा। क्योंकि वॉट्सऐप आपके फोन की डिफॉल्ट भाषा के अनुसार ही कंवर्ट हो जाता है। इसलिए आप अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर लैंग्वेज को अपनी पसंदीदा भाषा में बदल सकते हैं। जिससे आपका व्हाट्सएप भी उसी भाषा में बदल जाएगा।

वहीं दूसरे तरीके की बात करें तो इसके लिए आपको वॉट्सऐप के अंदर मौजूद सेटिंग्स में जाना होगा। इसके बाद ड्रॉपआउट मेन्यू में चैट्स पर टैप करके  ऐप लैंग्वेज पर सेलेक्ट करें। अब आप अपने अनुसार को किसी भी लैंग्वेज को चुक सकते हैं।

Android  का तरीका

  1. अपने एंड्राइड स्मार्टफोन के सेटिंग्स में जाएं
  2. सर्च बार में इनपुट एंड लैंग्वेज सर्च करें
  3. लैंग्वेज एंड इनपुट को सेलेक्ट करें
  4. फिर आपको लैंग्वेज को सेलेक्ट करें, आपको यहां कई क्षेत्रीय भाषा जैसे पंजाबी, बंगाली, मराठी आदि कई लैंग्वेज का ऑप्शन मिलेगा.

iOS

आईओएस यूज़र्स के लिए यहां थोड़ा निराशा हाथ लग सकती है, क्योंकि आईओएस अभी केवल हिंदी को ही सपोर्ट करता है. अभी भी आईओएस यूज़र्स को अपने रीजनल लैंग्वेज का ऑप्शन मिलना बाकी है.

 

Forbes 2021: अमेरिका में सबसे अमीर सेल्फ मेड महिलाओं में पांच भारतीय शामिल

03-Jan-2022

अमेरिका की प्रसिद्ध पत्रिका फोर्ब्स 2021 ने अमरीका की सबसे अमीर 100 सेल्फ-मेड महिलाओं की सूची जारी की है। इस लिस्ट में पांच भारतीय मूल की महिलाओं को जगह दी है। फोर्ब्स 2021 की इस सूची में पेप्सीको की पूर्व चेयरमैन इंदिरा नुई, सिंटेल की को-फाउंडर नीरजा सेठी, कॉन्फ्लूएंट की को-फाउंडर नेहा नरखड़े, एरिस्टा नेटवर्क्स की सीइओ जयश्री उल्लाल और गिंगको बायोवर्क्स की को-फाउंडर रेशमा शेट्टी के नाम शामिल हैं।

जयश्री उल्लाल, सीइओ, एरिस्टा नेटवर्क्स

जयश्री उल्लाल क्लाउड नेटवर्किंग फर्म एरिस्टा नेटवर्क्स की अध्यक्ष और सीईओ हैं। जयश्री उल्लाल सभी भारतीय अमेरिकी कारोबारी महिलाओं में सबसे अमीर हैं। उनकी कुल संपत्ति 2020 में 1.3 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2021 में 1.7 बिलियन डॉलर हो गई है। फोर्ब्स की 2021 की अमेरिका की सबसे अमीर सेल्फ मेड महिलाओं की सूची में पांच भारतीय मूल की महिलाओं में से एक जयश्री उल्लाल ने अरिस्टा नेटवर्क्स का राजस्व 2016 में 1.1 बिलियन डॉलर से 2.2 डॉलर कर दिया। वे वर्ष 2008 से ही कंपनी की सीइओ हैं। जयश्री उल्लाल ने सेंटा क्लेरा यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग मेनेजमेंट की पढ़ाई की है।

 

नीरजा सेठी, को-फाउंडर, सिंटेल

नीरजा सेठी एक बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ, फ्लोरिडा में स्थित दूसरी सबसे अमीर भारतीय अमेरिकी व्यवसायी महिला हैं। इन्होंने एक प्रतिष्ठित आईटी कंसल्टिंग और आउटसोर्सिंग कंपनी सिंटेल इंक की स्थापना की थी साथ ही इसकी निदेशक भी रह चुकी है।

 

नेहा नरखड़े, को-फाउंडर, कॉन्फ्लूएंट

क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनी कॉन्फ्लूएंट की को-फाउंडर नेहा नरखड़े ने लिंक्डइन के डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। इनकी कुल संपत्ति 925 मिलियन डॉलर है। पुणे यूनिवर्सिटा से इंजीनियरिंग करने वाली नेहा ने लिंक्डइन के डेटा को संभालने के लिए ओपन-सोर्स मैसेजिंग सिस्टम अपाचे काफका को डिजाइन किया था।

 

रेशमा शेट्टी, को-फाउंडर, गिंगको बायोवर्क्स

रेशमा शेट्टी ग्रेटर बोस्टन क्षेत्र में स्थित एक सिंथेटिक बायोटेक्नोलॉजी कंपनी गिंग्को बायोवर्क्स की सह-संस्थापक हैं। इनकी कुल आय 750 मिलियन डॉलर है। उन्होंने अपने पति बैरी कैंटन के साथ इस कंपनी की शुरुआत की थी। उन्होंने एमआईटी से स्नातक शोध सहायक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और एमआईटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के एक पूर्व वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक टॉम नाइट की देखरेख में एमआईटी के वैज्ञानिकों के साथ गिंग्को बायोवर्क्स को कोफाउंड किया और इसको इस मुकाम तक पहुंचाया। 

 

इंदिरा नुई, पूर्व सीइओ, पेप्सीको

इंद्रा नुई को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। इंदिरा नुई 12 वर्ष से अधिक समय तक पेप्सीको की चेयरपर्सन रहीं हैं।  येल यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाली नुई वर्ष 2019 में अमेजन के बोर्ड में शामिल हुईं। इनकी कुल संपत्ति 290 मिलियन डॉलर है।वह 2018 में पेप्सिको के सीईओ के रूप में सेवानिवृत्त हुईं, फिर भी वह एक शक्तिशाली प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्होंने टाइम मैगजीन और फोर्ब्स की दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में कई बार अपना नाम शामिल किया। भारत की मूल निवासी, वह उन दिनों से एक कड़ी मेहनत करने वाली पेशेवर रही है, जब उसने जीवनयापन करने के लिए एक छात्रावास के रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम किया था।

LIC IPO: रिलायंस और टीसीएस से कम होगी एलआईसी की वैल्यू! जानिए क्यों

03-Jan-2022

एलआईसी जल्द ही अपने आईपीओ को लाने जा रहा है। ऐसे में इसको लेकर निवेशक काफी उत्साहित हैं। वे पिछले लंबे समय से इस आईपीओ का इंतेजार कर रहे हैं। एलआईसी के पॉलिसी होल्डर्स को इस आईपीओ में निवेश करने पर कई विशेष फायदे मिलने वाले हैं, उन्हें इसमें इन्वेस्ट करने पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। हालांकि इस आईपीओ में निवेश करने के लिए एक जरूरी शर्त को पूरा करना होगा। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो शायद आपको एलआईसी के आईपीओ में बिडिंग करते समय दिक्कतें आ सकती हैं।

कैसे सफल होगा आईपीओ

एलआईसी का एयूएम एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से करीब 15 गुना अधिक है। यही वजह है कि इसकी वैल्यू 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाई जा रही थी। इससे पहले जब भी सरकार ने सरकारी कंपनियों के आईपीओ के लिए महत्वाकांक्षी प्राइसिंग तय की तो एलआईसी ने उसे उबारा था। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और न्यू इंडिया एश्योरेंस इसके उदाहरण हैं। लेकिन इस बार एलआईसी के आईपीओ की सफलता पूरी तरह मार्केट डिमांड पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पॉलिसीधारकों को आईपीओ में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एलआईसी ग्राहकों को डिस्काउंट पर शेयर जारी करेगा । कॉरपोरेशन भविष्य में पॉलिसीधारक की भागीदारी के लिए उत्सुक है, सरप्लस के डिस्ट्रीब्यूशन में बदलाव होगा । इस समय, एलआईसी अपने सरप्लस का केवल 5 फीसदी शेयरधारकों को वितरित करता है, जबकि 10 फीसदी की अनुमति है । बाकी राशि पॉलिसीधारकों को वितरित की जा रही है. कंजर्वेटिव कीमत तय होने से खुदरा निवेशकों को आसानी होगी ।

इसके अलावा एलआईसी के आईपीओ में निवेश करने के लिए डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट का होना अनिवार्य है। बिना इनके आप इस आईपीओ में निवेश नहीं कर पाएंगे। अगर आप इसमें निवेश करने के इच्छुक हैं, तो इसके लिए आपको एक डीमैट अकाउंट ओपन करवाना होगा।

इसके अलावा आपको अपनी पैन रिकॉर्ड की KYC जरूर करवा लेनी चाहिए। ऐसा करने पर आईपीओ में बिडिंग करते समय आसानी होगी। अगर आपके पैन में किसी भी प्रकार की दिक्कत है, तो उसमें जल्द से जल्द सुधार करवा लें। इसके बाद ही आप इस आईपीओ में निवेश कर पाएंगे। 

 

वैक्सीनेशन: 15-18 आयुवर्ग के लिए कोविन प्लेटफॉर्म पर शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन

01-Jan-2022

बच्चो के लिए COVID-19 वैक्सीनेशन के रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 1 जनवरी 2022 यानी आज से हो चुकी है।CoWIN प्लेटफॉर्म के प्रमुख डॉ. आरएस शर्मा के मुताबिक, 15-18 वर्ष की आयु के बच्चे आज (1 जनवरी) से CoWIN ऐप पर पंजीकरण कर सकेंगे। इसके लिए CoWIN ऐप पर जरूरी बदलाव किए गए हैं। यहां 10वां आईडी कार्ड जोड़ा गया है। इसे स्टूडेंट आईडी कार्ड नाम दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि हो सकता है कि कुछ बच्चों के पास आधार कार्ड या कोई दूसरा पहचान पत्र न हो।

देश में 3 जनवरी से 15-18 आयुवर्ग का वैक्सीनेशन शुरू होने जा रहा है। इसके लिए आज से कोविन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। सरकार ने कहा कि किशोरों के लिए वॉक-इन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, दोनों सुविधाएं मौजूद रहेंगी। वॉक-इन रजिस्ट्रेशन वैक्सीनेशन के दिन यानी 3 जनवरी से शुरू होगा। सरकार की तरफ से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, 15 से 18 साल के किशोर अपने पहचान पत्रों की मदद से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने किया था वैक्सीनेशन का ऐलान

बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किशोरों का वैक्सीनेशन शुरू होने का ऐलान किया था।

देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को कोरोना वायरस वैक्सीन लगाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस कदम से स्कूल-कॉलेज जा रहे बच्चों और उनके माता-पिता की चिंता दूर होगी।

देश में ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ये फैसला लिया गया था।

New Year 2022: 1 जनवरी को नएक जनवरी को ही क्यों होता है नया साल , साल में 365 दिन ही क्यों होते हैं? जानें इसका पूरा इतिहास

23-Dec-2021

नये साल की शुरुआत पूरी दुनिया में पारंपरिक ग्रिगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar) के अनुसार मानी जाती है। 1 जनवरी को नये साल के रूप में मनाने की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 में हुई थी। जनवरी के पहले महीने से नए साल की शुरुआत होती है। हालांकि सदियों पहले नया साल 1 जनवरी को नहीं होता था। अलग अलग देशों में अलग अलग दिन पर नया साल मनाया जाता था। कभी 25 मार्च को नया साल का जश्न मनाते थे तो कभी 25 दिसंबर को नया साल होता था। लेकिन बाद में बदलाव हुआ और एक जनवरी को नया साल मनाया जाने लगा। इसकी शुरुआत रोम से हुई, जहां राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किया। इस कैलेंडर के आने के बाद से जनवरी के पहले दिन नया साल मनाया जाने लगा।

भारत में नया साल कब होता है

वैसे तो दुनिया भर में 31 दिसंबर की आधी रात के बाद से कैलेंडर बदल जाता है और जनवरी से नया साल लग जाता है लेकिन भारत में लोग अपने रीति रिवाजों के मुताबिक अलग अलग दिन पर नया साल मनाते हैं। पंजाब में बैसाखी के तौर पर नए साल की शुरुआत होती है, जो 13 अप्रैल को है। वहीं सिख अनुयायी नानकशाही के कैलेंडर के मुताबिक मार्च में होली के दूसरे दिन से नया साल मनाते हैं। जैन धर्म के अनुयायी दिवाली के अगले दिन नया साल मनाते हैं। 

साल में 365 दिन ही क्यों होते हैं?

जब साल में 10 महीने हुआ करते थे, तो पूरे साल में 310 दिन ही होते थे। उन दिनों एक सप्ताह में 8 दिन मनाए जाते थे। हालांकि रोम के शासक जूलियस सीजर ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किए, जिसके बाद 12 महीनों का साल हुआ, जिसमें 365 दिन निर्धारित किए गए। सीजर ने खगोलविदों से जाना कि पृथ्वी 365 दिन और छह घंटे में सूर्य की परिक्रमा करती है। इसलिए सीजर ने साल के दिनों को बढ़ा दिया। वहीं साल की शुरुआत 1 जनवरी से की।

लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़कर 21 वर्ष होगी, ये फैसला अच्छा या बुरा?

20-Dec-2021

नई दिल्ली (इंडिया)। भारत देश की बेटियों की शादी की न्यूनतम उम्र तीन साल और बढ़ाकर 18 से 21 की जाने वाली है।  सरकार मौजूदा कानून में संशोधन कर महिलाओं की शादी की उम्र को बढ़ाने जा रही है। कैबिनेट ने बुधवार को लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले से भारत में महिला और पुरुषों की शादी की उम्र एक समान हो जाएगी।  इसके लिए सरकार ने जून 2020 में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया था जिसमें नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल भी शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टास्क फोर्स ने पिछले महीने ही प्रधानमंत्री कार्यालय और महिला व बाल विकास मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी बाल-विवाह जैसी रूढ़ीवादी परंपराओं को निभाया जा रहा है। अगर आप अपनी गांव की जड़ों से जुड़े हुए हैं तो यकीनन बीते सालों में आपने इस तरह के कुछ मामले तो जरूर देखे होंगे। बीते दिनों तमिलनाडु से एक खबर आई जिसमें बाल विवाह कराने के जुर्म में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह एक मामला था जो पुलिस और प्रशासन की नजर में पड़ा और इस पर ऐक्शन लिया गया, लेकिन न जानें ऐसी कितनी ही मासूम जिंदगियां हैं जिन्हें न तो पुलिस की मदद मिलती है और न किसी संस्था की। अब भारत सरकार ने लड़कियोंं के लिए शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का फैसला किया है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और अगले हफ्ते इससे जुड़े विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा।

इस पर पूरे देश में संग्राम छिड़ गया है। कोई इसे सही कदम बता रहा है तो कोई गलत। आज हम इसे विज्ञान के नजरिए से समझने की कोशिश करेंगे कि आपके घर से जब आपकी बेटी या बहन की डोली उठती है, जब वो एक नए जीवन में प्रवेश करती है, जब वो ससुराल की दहलीज लांघती है, उस वक्त देश की बेटियों की न्यूनतम उम्र क्या होनी चाहिए।

हमने इसे समझने के लिए टास्क फोर्स की वो रिपोर्ट भी निकाली है, जिसके आधार पर ये फैसला लिया गया है। हमने डॉक्टरों से भी बात की है कि देश को ये कानून बनाना चाहिए या नहीं। अब आपसे एक सवाल है। हमारे देश में जैसे ही लड़की की उम्र 18 साल होती है तो आमतौर पर सबसे पहले माता-पिता और परिवारवालों के मन में क्या ख्याल आता है, शायद इसका जवाब देने के लिए आपको सोचने की भी जरूरत ना पड़े। हमारे देश में जैसे ही लड़कियों की उम्र 18 साल होती है, परिवारवाले सोचते हैं कि जल्द से जल्द लड़की की शादी कर जिम्मेदारी से मुक्त हो जाया जाए।

बिल को लाने का मकसद:-

शादी की कानूनन उम्र निर्धारित करने के पीछे का मुख्य कारण है, देश में हो रहे बाल विवाह को रोकना। हालांकि, इस बार शादी की उम्र को 3 साल बढ़ाने के पीछे सरकार ने कई अन्य कारण दिए हैं।

इस बिल को लाने का मकसद महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है, महिलाओं को कुपोषण से बचाना है, क्योंकि कम उम्र में शादी की वजह से महिलाओं के हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। इस बिल का सबसे बड़ा मकसद मातृ मृत्यु दर के खतरे को कम करना है।

शादी की उम्र बढ़ाने का एक मकसद ये भी है कि जो लड़कियों उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं, उन्हें पढ़ाई के लिए समय मिलेगा। शादी से पहले वो करियर बना सकेंगी। अधिकतर लड़कियां आर्थिक तौर पर अपने पैरों पर भी खड़ी हो सकेंगी। अब इस रिपोर्ट के मूल आधार की ओर बढ़ते हैं, जिसे कुपोषण से जोड़ा जा रहा है। कम उम्र में मां बनने से महिलाओं की सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है, ये हमने विज्ञान के नजरिए से भी समझने की कोशिश की।

वाकई ये फैसला क्रांतिकारी और ऐतिहासिक हैं। इस फैसले का भारत के समाज पर भी गहरा असर पड़ेगा। लड़कियां अगर सेहदमंद होगी, अगर पढ़ लिखने के बाद शादी करेंगी तो इससे उनके प्रति रुढ़िवादी सोच में बदलाव आएगा। महिलाओं की जिम्मेदारी घर की रसोई और बच्चों के पालन पोषण तक ही सीमित नहीं मानी जाएगी। ऐसे में पक्ष और विपक्ष के बीच लड़कियां खुद क्या सोचती हैं, हमने ये भी जानने की कोशिश की। आपको हमने पहले लाडो का जश्न दिखाया था और अब उनके विचार सुनाते हैं। संभव है अब शादी के फैसलों में लड़कियों की राय को भी ज्यादा महत्व मिलेगा, जैसा कि अभी बहुत कम मामलों में होता है। अभी लड़की पढ़ी लिखी होती है तो परिवार शादी कराने से पहले एक बार उसकी सहमति जरूर लेता है, लेकिन कम शिक्षित लड़कियों से उनकी राय नहीं पूछी जाती। ये वो फर्क है जो बेतुकी और शर्मनाक दलील देने वाले राजनेताओं और जनप्रतिनिधों को समझने की जरूरत है।

Omicron Variant: बढ़ सकती हैं मौतें और भर्ती होने के मामले, डब्ल्यूएचओ ने कहा- हर देश में पहुंच चुका ओमिक्रॉन

15-Dec-2021

कोरोना वायरस के नए ओमीक्रॉन वेरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह अधिक तेजी से फैल रहा है। अभी तक 77 देशों में इसके मामले दर्ज किए गए हैं।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि वह इस बात से चिंतित हैं कि वेरिएंट पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं।

एक बयान में संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी की तरफ से कहा गया, ‘चूंकी दुनियाभर में ओमीक्रॉन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में हमें लगता है कि अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों और यहां तक कि मौत के मामलों में भी बढ़ोतरी होगी।’ एजेंसी ने कहा कि नए वेरिएंट का महामारी पर एक बड़ा प्रभाव हो सकता है, लेकिन यह अभी भी निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन स्वरूप इतनी तेजी से फैल रहा है, जितना पहले किसी अन्य स्वरूप को नहीं देखा गया था। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से ओमिक्रॉन का प्रसार रोकने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि अकेले टीकाकरण से कोई भी देश इस संकट से बाहर नहीं निकल सकता है।

इसने यह भी कहा कि अभी ओमिक्रॉन को पूरी तरह से समझने के लिए और जानकारियों की आवश्यकता है। हम देशों को अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों के डाटा को हमारे कोविड-19 क्लिनिकल डाटा प्लेटफॉर्म पर साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इससे हमें इसे समझने में मदद मिलेगी।

भारत में अब तक 61 केस

हालांकि, शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में केस कम हो रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात ये है कि दुनियाभर में बूस्टर डोज लगने के बाद भी लोग ओमीक्रॉन वेरिएंट की चपेट में आ रहे हैं। इजरायल, अमेरिका जैसे मुल्कों में लोगों को बूस्टर डोज लगाने का सिलसिला जारी है। लेकिन इन सबके बाद भी लोग ओमीक्रॉन वेरिएंट की चपेट में आए हैं।

ओमीक्रॉन के अब तक 61 मामले आ चुके हैं। दिल्ली में इसके 4 नए केस सामने आए हैं। अब यहां ओमीक्रॉन के कुल 6 मरीज हो गए हैं। महाराष्ट्र में ओमीक्रॉन के 8 नए केस मिले हैं, जिनमें 7 अकेले मुंबई से है। पूरे देश की अगर बात करें तो महाराष्ट्र में कुल 28 केस आ चुके हैं। राजस्थान में 17, दिल्ली में 6, गुजरात में 4, कर्नाटक में 3 के अलावा केरल, आंध्रप्रदेश और चंडीगढ़ में 1-1 केस सामने आ चुके हैं। इस तरह से देश के 8 राज्यों में ओमीक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं।