Wednesday,06 July 2022   04:48 pm

15% से अधिक महिलाओं से बनी है यूक्रेन की सेना, रूस के आगे झुकने को तैयार नहीं, विदेश मंत्रालय ने दिया धन्यवाद

09-Mar-2022

यूक्रेन पर रूसी हमलों का आज 14वां दिन है। 14 दिन बाद भी यूक्रेन पर रूसी हमले कम नहीं हुए हैं। राजधानी कीव समेत कई शहरों में अब हर जगह तबाही नज़र आ रही है। इन सबके बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ब्रिटिश संसद में भाषण दिया और कहा कि यूक्रेन रूसी हमलों के आगे नहीं झुकेगा। साथ ही जेलेंस्की ने सांसदों से रूस को ‘‘आतंकवादी देश’’ के रूप में घोषित करने की भी मांग की।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गईं तस्वीरों में सशस्त्र महिला सैनिकों को वर्दी पहने और लड़ाई के लिये तैयार दिखाया गया है। एक अन्य ट्वीट में विदेश मंत्रालय ने एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर साझा की है। इस फोटो में तेरनोपिल क्षेत्र की रहने वाली ग्रैनी मारिया को दिखाया गया है जो महिला जवानों के लिए ब्रेड सेक रही हैं।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नवीनतम सर्वे के आधार पर पता चला है कि यूक्रेन की सेना में 15% से अधिक महिलाएं हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी देते हुए यूक्रेन की सैन्य महिलाओं की तस्वीरें शेयर कीं। विदेश मंत्रालय ने आगे लिखा कि अलग-अलग तरह से यूक्रेन की रक्षा करने वाली महिलाओं की गिनती करना असंभव है। मंत्रालय ने महिलाओं को उनके योगदान के लिए शुक्रिया अदा किया।

Ukraine से Chhattisgarh के Students की वापसी जारी | अब तक छत्तीसगढ़ के 39 छात्रों की सकुशल वापसी

03-Mar-2022

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा यूक्रेन संकट के दौरान छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सहायता हेतु नई दिल्ली में सहायता केन्द्र बनाया गया है। इस केन्द्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 फरवरी से आज 2 मार्च को शाम 5 बजे तक छत्तीसगढ़ के 39 छात्र-छात्राओं की सुरक्षित वापसी हो चुकी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इन छात्र-छात्राओं को वाहन, ठहरने, भोजन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी, इसके साथ ही इन छात्र-छात्राओं को अपने गृह नगर जाने के लिए एयर टिकट कराकर उनके परिजनों को सकुशल सौंपा जा चुका है। नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन के संयुक्त आवासीय आयुक्त संजय अवस्थी से प्राप्त जानकारी के अनुसार नई दिल्ली में बनाये गए इस सहायता केन्द्र में 22 फरवरी 2022 से निरंतर दूरभाष पर यूक्रेन में फंसे छत्तीसगढ़ के 134 छात्र-छात्राओं तथा उनके परिजनों से लगातार सतत् संपर्क बना हुआ है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के छह छात्र यूक्रेन से भारत लौटे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन छात्रों से आज नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुलाकात की। उनका हालचाल पूछा।
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ से यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई के लिए गए छह छात्रों की आज एयर इंडिया की फ्लाइट से नई दिल्ली वापसी हुई है। छत्तीसगढ़ सदन में छात्रों के ठहरने के लिए व्यवस्था की गई है।
बताया जा रहा है कि यू्क्रेन के विभिन्न शहरों से लौटे छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों की वापसी का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। शनिवार देर रात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इसकी घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है – यूक्रेन से अपने निजी खर्चें से छत्तीसगढ़ लौटने वाले छात्रों और नागरिकों के खर्च का वहन छत्तीसगढ़ सरकार करेगी।
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बता दें कि रूस और यूक्रेन के मध्य जारी दंगे के बीच वहां फंसे हिंदुस्तान के लोगों की देश वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। सरकार बच्चों को तत्परता के साथ वपास ला रही है, जो डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए हुए थे।

यूक्रेन में पाकिस्तानियों को भी तिरंगे का सहारा, भारतीय झंडे के सहारे युद्धग्रस्त देश से निकल रहे कई देशों के नागरिक

03-Mar-2022

यूक्रेन और रूस के बीच जंग को सात दिन हो चुके हैं। यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ऑपरेशन गंगा चला रही है। सरकार ने भारतीयों से कहा है कि वे बंकर या हॉस्टल से बाहर निकलते समय अपनी बसों पर तिरंगा झंडा लगाकर रखें, ताकि रूसी सेना उन्हें नुकसान न पहुंचाए।

तिरंगे की इस ताकत का इस्तेमाल अब यूक्रेन में फंसे पाकिस्तान और तुर्की के स्टूडेंट भी कर रहे हैं। वे घर के पर्दों को तिरंगे के रंग में पेंट करके अपनी गाड़ियों में लगा रहे हैं, ताकि रूस की सेना उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए यूक्रेन से निकलने दे। इसे भारत के विदेश संबंधों की ताकत बताया जा रहा है।

यूक्रेन से रोमानिया के बुखारेस्ट शहर पहुंचे भारतीय छात्रों ने कहा कि तिरंगे ने उन्हें और साथ ही कुछ पाकिस्तानी और तुर्की छात्रों को युद्धग्रस्त देश में विभिन्न चौकियों को सुरक्षित रूप से पार करने में मदद की। रूसी और यूक्रेनी सैनिक तिरंगे को देखकर लोगों को सुरक्षित तरीके से यूक्रेन से निकलने में मदद कर रहे हैं। भारतीय तिरंगा पाकिस्तानी और तुर्की छात्रों के लिए बहुत मददगार साबित हुआ।'

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आज हमारे तिरंगे की ताकत पूरी दुनिया देख रही है। पाकिस्तान के छात्रों को यूक्रेन में भारतीय तिरंगे ने सहारा दिया है। पाकिस्तान ने तो अपने देश के लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है। अब नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान के बच्चों ने खुद को बचाने के लिए यूक्रेन में हमारा तिरंगा फहराया है।

क्या तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी कर रहा रूस!, रूस ने परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों के साथ शुरू कर रहा अभ्यास

02-Mar-2022

रूसी परमाणु पनडुब्बियों ने मंगलवार को बेरेंट सागर में उतरकर अभ्यास की शुरुआत की। इस अभ्यास के दौरान बर्फ से ढंके साइबेरियाई क्षेत्र में मोबाइल मिसाइल लॉन्चर की भी चहलकदमी दिखी। यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों से तनाव बढ़ने को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अपने देश के परमाणु बलों को हाई-अलर्ट पर रहने के आदेश देने के बाद ये अभ्यास किए जा रहे हैं। इन अभ्यासों से ऐसा लग रहा है कि कहीं रूस तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी तो नहीं कर रहा है। 

रूस के उत्तरी बेड़े ने एक बयान में कहा कि उसकी कई परमाणु पनडुब्बियां अभ्यास में शामिल रहीं, जिसका मकसद इन्हें विपरीत परिस्थितियों में सैन्य साजोसामान को लाने-जाने के लिए प्रशिक्षित करना है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रणनीतिक मिसाइल बलों की इकाई ने पूर्वी साइबेरिया के इरकुत्स्क प्रांत के जंगलों में अंतरमहाद्वीपीय विध्वंसक मिसाइल लांचर तैनात किए हैं। हालांकि रूसी सेना की तरफ से इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि ये अभ्यास रविवार को पुतिन द्वारा यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर परमाणु बलों को अलर्ट पर रखने से संबंधित हैं या नहीं। 

यूक्रेन को हम मदद देते रहेंगे, रूस को मनमानी नहीं करने देंगे- बाइडेन

02-Mar-2022

यूक्रेन पर आज सातवें दिन भी रूसी सैनिकों का हमला जारी है। यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए रूस एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। रूस की सेना यूक्रेन की राजधानी कीव, प्रमुख शहर खारकीव और मारियूपोल पर भी टैंकों बम और गोले बरसाने लगी है। आबादी वाले तीन क्षेत्रों पर क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रूसी सैनिकों ने यूक्रेन का प्रमुख शहर खारकीव और कीव पर मंगलवार की पूरी रात हमला किया, जिससे पूरा शहर ही थर्रा उठा। राजधानी कीव को रूस ने टैंकों से घेर रखा है।

खारकीव में दाखिल हुई रूसी सेना, राजधानी कीव की घेराबंदी तेज

बिना किसी कारण पुतिन ने यूक्रेन पर हमला किया- बाइडेन

रूस अकेला पड़ चुका है- बाइडेन

रूस की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है- बाइडेन

यूक्रेन में सेना नहीं उतारेगा अमेरिका

अमेरिका ने रूस के लिए एयरस्पेस बंद किया

रूसी सेना ने खारसेन पर कब्जा किया

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय का दावा- बेलारूस भी उनके खिलाफ सैनिक भेज सकता है

खारकीव में रूस की लैंडिंग फोर्स भी उतर गई है

रूसी विमानों का रास्ता रोकेगा US, NATO ने कहा- परमाणु हथियार का अलर्ट लेवल बदलने की जरूरत नहीं।

खेरसॉन के दो ठिकाने और बंदरगाह पर कब्जा

रूसी सेना ने पैराट्रूपर्स ने खारकीव में हॉस्पिटल को बनाया निशाना

बिना किसी कारण पुतिन ने यूक्रेन पर हमला किया- बाइडेन

जंग में मारे गए 5000 रूसी सैनिक

ओडेसे और मारियुपोल के बंदरगाहों पर रूसी सैनिकों का हमला

रूसी सैनिकों के हमले में सोवियत संघ के जमाने की इमारत ध्वस्त

तीसरे दिन रूस के हमले और तेज, हर तरफ तबाही का मंजर, यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद देंगे अमेरिका समेत 28 यूरोपीय देश

26-Feb-2022

रूस की सेना यूक्रेन पर हमलों की रफ्तार तेज करते हुए जल्द ही कीव पर कब्जा कर सकती है। पिछले तीन दिनों में रूसी सेना ने यूक्रेन पर चार तरफ से हमला कर उसकी सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया है। हालांकि, राजधानी कीव अभी तक रूसी सेना के कब्जे से दूर रही थी।

अब खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने चिंता जताई है कि कीव पर रूसी सेना के कब्जे का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि आज की रात हमारे लिए सबसे कठिन होने वाली है, लेकिन हमें खड़े रहना होगा। बताया गया है कि जेलेंस्की को अमेरिका की तरफ से यूक्रेन छोड़ने का प्रस्ताव मिला था। लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।

यूक्रेन की राजधानी कीव में रूसी सेना काफी अंदर तक घुस चुकी है। इस बीच एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों सेनाओं की जंग कीव की सड़कों तक पहुंच गई है। अब यूक्रेनी अधिकारी लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे सड़कों पर न निकलें और घर में ही रहें। नागरिकों से खिड़की या बाल्कनी पर न आने के लिए कहा गया है, ताकि वे मलबे या गोली की चपेट में आने से बच जाएं।

यूक्रेन इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। ज्यादा से ज्यादा लोग अपने परिवार और करीबी की जान बचाकर भाग जाना चाहते हैं। इस बीच यहां की सरकार ने देश में बन रहे तनावपूर्ण हालात को देखते हुए18-60 साल के सभी पुरुषों को देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

यूक्रेन की सेना का दावा है कि उसने राजधानी कीव (एपी) से 40 किलोमीटर दक्षिण में एक शहर वासिलकिव के पास पैराट्रूपर्स ले जा रहे एक रूसी सैन्य परिवहन विमान को मार गिराया है।

Russia-Ukraine विवाद : ​​जंग के बीच शांति के संकेत, NATO की चेतावनी-यूक्रेन पर तुरंत बंद करे कार्रवाई

26-Feb-2022

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रूस, यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए तैयार हो गया है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शनिवार को युद्ध का दूसरा दिन है। ऐसे में यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए रूस तैयार हो गया है। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देश रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। जबकि कुछ देशों ने प्रतिबंध लगा भी दिए हैं। हालांकि रूस बातचीत के लिए तैयार हो गया है मगर यूक्रेन के सामने एक शर्त रखी है।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यदि यूक्रेन की सेना अपने हथियार डाल देती है तो रूस, यूक्रेन के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रूस नहीं चाहता है कि यूक्रेन पर नियो-नाजियों का शासन हो।  इसके अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अंडरग्राउंड हो गए हैं।

NATO ने कहा है कि रूस यूक्रेन सरकार का तख्तापलट करना चाहता है।  100 से ज्यादा फाइटर जेट अलर्ट पर हैं। रूस हमें हल्के ना लें, यूक्रेन को हम पूरा समर्थन देते रहेंगे। यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद देते रहेंगे। हम हर पल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, यूक्रेन की सेना हिम्मत से लड़ रही है। यूक्रेन में वहीं हो रहा है जिसका हमें अंदेशा था। रूस ने नियमों का उल्लंघन किया है। यूक्रेन पर रूस के हमले पर नाटो की ओर से कहा गया है कि रूस पर पहले ही बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। नाटो प्रासंगिक हितधारकों और यूरोपीय संघ सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ निकटता से समन्वय करना जारी रखेगा। नाटो ने कहा कि हमने नाटो क्षेत्र में गठबंधन और समुद्री संपत्तियों के पूर्वी हिस्से में रक्षात्मक भूमि और वायु सेना तैनात की है। हमने नाटो की रक्षा योजनाओं को सक्रिय किया है ताकि हम सुरक्षित गठबंधन क्षेत्र का जवाब देने के लिए खुद को तैयार कर सकें।

रूस के खिलाफ एक्शन की तैयारी को लेकर NATO की अहम बैठक शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इसमें यूक्रेन की मदद को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

Russia-Ukraine crisis: संकटग्रस्त यूक्रेन का दावा- मार गिराए रूस के 800 से अधिक सैनिक, US ने पुतिन के देश पर लगाए आर्थिक प्रतिबंध

25-Feb-2022

संकटग्रस्त यूक्रेन में रूस के हमले तेज हो गए हैं। कुछ देर पहले टीवी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि वहां की राजधानी कीव में 40 मिनट के भीतर 35 से अधिक मिसाइल अटैक हुए। इससे लोगों के बीच दहशत का माहौल पनप गया है।

वहीं, सुबह साढ़े चार बजे (यूक्रेनियन समय के मुताबिक) राजधानी कीव में एक रिहायशी इमारत पर हवाई अटैक कर दिया गया। इस बीच, समाचार चैनल एबीपी न्यूज ने कीव में मेयर के हवाले से बताया कि कीव में दो इमारतों में आग लगी है, जबकि तीन लोग घायल हो गए हैं। इससे पहले, रात भर वहां धमाकों की आवाज आती रही। यूक्रेन में मार्शल लॉ लगाया गया है, जिसके तहत कुछ निर्धारित समय में ही लोग बाहर निकल सकते हैं।

इस युद्ध के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  गुरुवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और यूक्रेन के साथ 'हिंसा को तत्काल बंद करने' की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध से नहीं बातचीत करने से ही समाधान निकलेगा। मोदी ने पुतिन से कहा NATO-रूस बातचीत कर रास्ता निकालें।

प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों की सुरक्षा के बारे में भारत की चिंताओं के बारे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को अवगत कराया और बताया कि भारत उनके सुरक्षित निकास और भारत लौटने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के इस कदम की कड़ी निंदा की और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। अमेरिका ने सीधी जंग न करने की घोषणा की और रूस के बैंकों पर कड़े प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।

रूस के यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई का असर, डॉलर के आगे बेदम हुआ रुपया,LPG और CNG के दाम भी 10 से 15 रुपए तक बढ़ सकते हैं

24-Feb-2022

रूस के यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा के बाद भारत समेत दुनियाभर शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। वहीं, डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया भी बेदम हो गया है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 75.14 के स्तर पर आ गया है।  

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: केडिया एडवाइजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक रुपया की स्थिति और बदतर हो सकती है। भारतीय करेंसी 76.40 रुपए प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है। अजय केडिया का कहना है कि ये रूस और यूक्रेन के टेंशन का असर है। इस वजह से कच्चे तेल के दाम भी 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुके हैं। वहीं, भारत के शेयर बाजार ने भी साल की सबसे बड़ी गिरावट देखी है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 3 प्रतिशत टूट गए। 

एक दिन पहले: सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन यानी बुधवार को रुपया 23 पैसे की बढ़त के साथ 74.61 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया 74.64 प्रति डॉलर पर खुलने के बाद 74.54 के दिन के उच्चस्तर तक गया। इस दौरान यह 74.73 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक भी आया, अंत में रुपया 23 पैसे की बढ़त के साथ 74.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। वहीं, मंगलवार को रुपया 29 पैसे टूटकर 74.84 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण सबसे बड़ा खतरा नेचुरल गैस की सप्लाई चेन के डैमेज होने को लेकर है। दुनिया की कुल नेचुरल गैस उत्पादन में 17% हिस्सा रूस का है। ऐसे में यूक्रेन-रूस विवाद से इसकी सप्लाई प्रभवित हो रही है। इससे वैश्विक स्तर पर गैस की कमी का असर दिखने लगा है और आने वाले दिनों में LPG और CNG की कीमतों में प्रति किलो 10 से 15 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

रूस और यूक्रेन के युद्ध की आहट ने बढ़ाई चिंता, भारत में इन चीजों पर बढ़ेगी महंगाई

23-Feb-2022

नई दिल्ली (इंडिया)। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के हालात से भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि अगर युद्ध शुरू होता है तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचेगी। क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर जाएंगी और इसका सीधा असर अन्य देशों पर महंगाई में वृद्धि के तौर पर देखने को मिलेगी। आइए जानते हैं भारत किस तरह इससे प्रभावित होगा।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी मुद्दों के चलते पहले ही क्रूड ऑयल की कीमत आसमान छू रही है। कच्चे तेल की कीमतें 96.3 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर को छू गई हैं जो कि  2014 के बाद सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञों की मानें तो जल्द ही ये 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर जाएंगी।

भारत का यूक्रेन के बीच व्यापार अच्छे-खासे स्तर पर है। हालांकि, भारत और रूस के बीच व्यापार में कुछ कमी जरूर आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच अगर युद्ध होता है तो भारत में इसके प्रभाव कुछ जरूरी चीजों पर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकते हैं। बता दें कि भारत यूक्रेन को दवा और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे सामान बेचता है, जबकि यूक्रेन से खाने के तेल से लेकर खाद और न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी चीजों की खरीदारी करता है। युद्ध होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार नहीं होगा और भारत के लिए परेशानी बढ़ेगी।

प्राकृतिक गैस की कीमतें 10% बढ़ेंगी (सीएनजी, पीएनजी, बिजली)

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) बास्केट में कच्चे तेल से संबंधित उत्पादों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 9 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि, भारत की WPI मुद्रास्फीति में लगभग 0.9 प्रतिशत की वृद्धि करेगी।

 

एलपीजी और केरोसिन पर बढ़ेगी सब्सिडी

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से एलपीजी और केरोसिन पर सब्सिडी बढ़ने की उम्मीद है।

 

पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी

आपको बता दें कि तेल भारत के कुल आयात का लगभग 25 प्रतिशत है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में तेजी का असर चालू खाते के घाटे पर पड़ेगा।

 

गेहूं के भी बढ़ सकते हैं दाम

यदि काला सागर क्षेत्र से अनाज के प्रवाह में रुकावट आती है, तो विशेषज्ञों को डर है कि इसका कीमतों और ईंधन खाद्य मुद्रास्फीति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। रूस दुनिया का शीर्ष गेहूं निर्यातक है जबकि यूक्रेन गेहूं का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है।

 

धातुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी

पैलेडियम, ऑटोमोटिव एग्जॉस्ट सिस्टम और मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली धातु की कीमत हाल के हफ्तों में बढ़ गई है। पैलेडियम का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

Russia-Ukraine Conflict: रूस-यूक्रेन विवाद की जड़ क्या? कभी साथ रहे देश आज जंग की कगार पर, जानें 30 साल में कैसे बदले हालात?

23-Feb-2022

रूस और यूक्रेन के बीच काफी समय से विवाद चला आ रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव नया नहीं है। करीब 30 साल पहले तक दोनों देश एक ही थे, लेकिन आज रूस और यूक्रेन की सीमा दुनिया की सबसे तनावपूर्ण सीमा में गिनी जाती है।

1939 से 1945 तक दूसरा विश्व युद्ध चला और इसमें अमेरिका, फ्रांस, सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक संघ (USSR) और ब्रिटेन ने मिलकर इटली और जापान के खिलाफ जमकर युद्ध किया। इस दौरान 1945 में अमेरिका ने सबसे आगे निकलते हुए जापान पर परमाणु बम गिरा दिया और इसी के साथ दूसरा विश्व युद्ध भी खत्म हो गया। हालांकि, यहां पर यूएसएसआर को यह बात चुभ गई कि अमेरिका के पास इतने घातक हथियार थे तो सहयोगी होने के नाते उसने बताया क्यों नहीं। यहीं से दोनों देशों के बीच शीत युद्ध की शुरुआत हुई और दोनों देश दुनिया के अन्य देशों को अपने पाले में करने के उद्देश्य से आगे बढ़े। यही वह समय था जब नाटो नाम के एक संगठन का जन्म हुआ और इसे अमेरिका ने 12 देशों के समर्थन से बनाया। 1949 में जन्में नाटो में शुरू में 12 देश थे लेकिन समय के साथ अन्य देश भी इससे जुड़ते गए और अब ये 30 देशों का एक मजबूत संगठन बन गया है। 1949 में NATO की स्थापना की गई थी, जिसका मकसद था कि इसके आसपास के देश सोवियत संघ से अपने आप को डिफेंड कर पाएं।

 

24 अगस्त 1991 को सोवियत संघ से यूक्रेन अलग हुआ था। सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन को पश्चिमी देशों का सहारा मिला।

2014 में यूक्रेन में जो सरकार थी, वह काफी हद तक रूस की समर्थक थी। इसके चलते यूक्रेन ने NATO में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया।

2019 के चुनाव में यूक्रेन में वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने डोनबास की पुरानी स्थिति को बहाल करने का वादा किया। जेलेंस्की ने सत्ता में आते ही NATO में शामिल होने की कोशिशें तेज कर दीं। नवंबर 2021 में सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आया कि रूस ने यूक्रेन की सीमा के पास सैनिकों की तैनाती करनी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी फिर से NATO में शामिल होने की हलचल तेज हो गई है।

इस तनातनी के बीच सवाल उठता है कि आखिर ये बवाल है किस बात पर है? तो इसका जवाब ये है कि खुद को असहज पाने के कारण यूक्रेन, नाटो से हाथ मिलाना चाहता है। वहीं रूस अमेरिका से आश्वासन चाहता है कि यूक्रेन को किसी भी शर्त पर नाटो में जगह न दी जाए।

रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन NATO में शामिल हो, क्योंकि रूस को लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो NATO के सैनिक और ठिकाने उसकी सीमा के पास आकर खड़े हो जाएंगे।

इसी बीच समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अमेरिका ने चेतावनी दी है कि रूस जानबूझकर "फॉल्स फ्लैग अभियान" को अंजाम दे सकता है जिससे यूरोप में विश्व युद्ध द्वितीय के बाद के सबसे बड़े सैन्य संघर्ष के शुरू होने का ख़तरा है। अमेरिका का कहना है कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो उसे वैश्विक स्तर पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

 

डेंगू के खिलाफ बड़ा कदम: देश में तैयार होगी डेंगू की दवा, सरकारी और गैर सरकारी संस्थान साथ करेंगे काम

22-Feb-2022

नई दिल्ली (इंडिया)। भारत में ये बीमारी विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान रफ्तार पकड़ती है। जिस दिन डेंगू वायरस से संक्रमित कोई मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके करीब 3-5 दिनों बाद ऐसे व्यक्ति में डेंगू बुखार के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। हम सब जानते हैं कि देश में डेंगू का कितना प्रकोप रहता है। हर साल हजारों लोगों को डेंगू (Dengue ) की बीमारी होती है। इस बीमारी का भी कोई इलाज नहीं है। अब भारत सरकार डेंगू की बीमारी से निपटने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गई है। इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी विभाग के टीएचएसटीआई (Transitional Health Science and Technology Institute -THSTI) ने डीएनडीआई (Drugs for Neglected Diseases initiative-(DNDi) India Foundation के साथ समझौता किया है। इस समझौते के तहत अगले पांच साल के अंदर डेंगू की प्रभावशाली दवा को विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत सरकारी संस्था और गैर सरकारी संस्था मिलकर रिसर्च करेंगे और डेंगू के लिए प्रभावकारी, सुरक्षित और सस्ती दवा विकसित करेंगे। इस योजना से परिचित अधिकारी ने यह जानकारी दी है। आंकड़ों के मुताबिक करीब सौ देशों में 39 करोड़ डेंगू संक्रमण के मामले हर साल आते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत मामले एशिया में आते हैं। 2021 में भारत में 164,103 डेंगू के मामले आए थे जबकि 2019 में 205, 243 नए मामले आए थे।

VIDEO: पक्षियों का झुंड अचानक जमीन पर गिरा, लोगों ने प्रदूषण और 5-जी तकनीक को बताया जिम्मेदार

17-Feb-2022

मैक्सिको: उत्तरी अमेरिका का एक वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि मैक्सिको के कुआउटेमोक शहर में पक्षियों का एक झुंड अचानक जमीन पर आ गिरा। झुंड में पीले सिर वाले ब्लैक बर्ड्स शामिल थे। इनकी संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। 
जानकारी के मुताबिक, इनमें कई परिंदों की मौत हो गई है। घटना 7 फरवरी की है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कई लोगों ने इस घटना के लिए प्रदूषण, 5-जी तकनीक और बिजली के तारों को जिम्मेदार ठहराया है।
पास के मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह घटना रिकॉर्ड हो गई। इस फुटेज में रहस्यमयी हालात में सैकड़ों पक्षियों को आसमान से गिरते हुए दिखाया गया है। कुछ देर बाद उनमें से अधिकांश उड़ गए, जबकि कुछ पक्षियों के शव सड़कों पर बिखरे हुए देखे जा सकते थे।

WARNING: GRAPHIC CONTENT

Security footage shows a flock of yellow-headed blackbirds drop dead in the northern Mexican state of Chihuahua pic.twitter.com/mR4Zhh979K

— Reuters (@Reuters) February 14, 2022

यूके सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी में इकॉलॉजिस्ट डॉ रिचर्ड ब्रॉटन ने कहा कि ऐसा लगता है कि एक पेरेग्रीन या बाज का एक झुंड इन पक्षियों का पीछा कर रहा था। ऐसे मे हजारों की संख्या में ये पक्षी शिकारियों से बचने के लिए तेजी से नीचे आए, लेकिन भीड़ के कारण वे जमीन को शायद अच्छी तरह से देख न सके। इससे बड़ी संख्या में पक्षी जमीन से टकरा गए। उनकी स्पीड इतनी ज्यादा रही होगी कि मौके पर ही सैकड़ों पक्षियों की मौत हो गई।

 

इस देश ने बदला अपने मुल्क का नाम, राष्ट्रपति ने की थी घोषणा, जानिए अब किस नाम से बुलाया जाएगा

15-Feb-2022

भारत में जहां शहरों, रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने (Name Change) की परंपरा चल रही है, वहीं खुद को इस्लाम का सबसे बड़ा पैरोकार बताने वाले रेचप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने अपने देश का नाम ही बदल डाला है। तुर्की को अब तुर्किये (Turkey Is Now Turkiye) के नाम से जाना जाएगा। यानी अब सभी तरह के व्यापार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और राजनयिक कार्यों के लिए तुर्की की जगह तुर्किये का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने एक बयान जारी कर कहा था कि उन्होंने देश के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नाम को ‘तुर्की’ से तुर्किये में बदल दिया (Turkey Name Change) है। उन्होंने यह भी बताया था कि तुर्किये शब्द तुर्की राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को बेहतरीन तरीके से दर्शाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एर्दोगन को मुल्क का नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

INDIA ने CHINA को फिर दिया तगड़ा झटका, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले 54 ऐप्स बैन

14-Feb-2022

भारत सरकार ने एक बार फिर चाइनीज ऐप्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 54 चीनी ऐप्स को बैन (54 Chinese apps ban) करने का आदेश जारी किया है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम से वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि भारतीयों की निजता और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए यह प्रतिबंध लगाए गए हैं। बैन किए गए 54 ऐप्स की लिस्ट में अधिकतर ऐप्स ऐसे थे जो चीन की दिग्गज कंपनियों- Tencent, Alibaba और NetEase से संबंधित थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर ऐप्स 2020 में बैन किए गए ऐप्स का "रीब्रांडेड या रीक्रिस्टेड अवतार" थे।

चीन की ओर से पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भारतीय सीमा के अंदर लगातार विस्तार किया जा रहा है। भारतीय सेना की ओर से हमेशा यह जानकारी साझा की जा रही है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन गांव बसाने के साथ भूटान और तिब्बत के रास्ते अपने रेलमार्ग का विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही, वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए अपने मोबाइल ऐप्स का लगातार इस्तेमाल कर रहा है। सरकार ने इसी के मद्देनजर उसके अन्य ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

हिजाब, बुर्का, नकाब पर दुनिया में कहां-कहां है विवाद और किन देशों में लगी है पाबंदी

11-Feb-2022

भारत के कर्नाटक के एक कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब विवाद थमा नहीं है। मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया है कि जब तक ये मामला सुलझ नहीं जाता तब तक धार्मिक पोशाकों पर रोक रहेगी, फिर वह हिजाब हो या भगवा कपड़ा। हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई जिस तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है।

किसी की नज़र में ये संवैधानिक अधिकार है तो किसी का मानना है कि शिक्षण संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों को पहनना सही नहीं। लेकिन दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं जहां बरसों पहले ही सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने या इस्लामिक नक़ाबों पर रोक लगा दी गई। कुछ देशों में तो नियमों के उल्लंघन पर मोटे जुर्माने का भी प्रावधान है।

ऐसे में जानते हैं कि किन-किन देशों में बुर्का, नकाब या फेस कवर करने वाले परिधानों पर बैन लगाया है। साथ ही जानते हैं इन बैन को लेकर क्या नियम है।

चीन : चीन में हैनान द्वीप के जातीय अल्पसंख्यक उत्सुल समुदाय के लोगों पर कुछ रोकटोक लगाई गई थी। चीन कम्युनिस्ट सरकार ने उइगर मुस्लिमों की तरह ही इन पर धार्मिक प्रतिबंध लगाई थी, जिसका अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध हुआ। हैनान के द्वीप प्रांत के सान्या शहर में केवल 10 हजार की आबादी वाले इस छोटे से उत्सुल मुस्लिम समुदाय को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में अपने पारंपरिक कपड़े पहनने को लेकर टारगेट किया गया।

फ्रांस : आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में फ्रांस पहला ऐसा देश बन गया था, फेस कवर करने वाले बुर्का पर बैन लगाया गया था। बता दें कि पहले तो स्कूल से इसकी शुरुआत हुई थी और साल 2004 में इस पर बैन लगा दिया था। इसके बाद 2011 में पब्लिक प्लेस में चेहरा ढकना पर बैन लगा दिया गया था। साथ ही इसका उल्लंघन करने वाले लोगों पर जुर्माने का प्रावधान है और अगर किसी महिला पर बुर्का पहनने के लिए दबाव डाला जाता है तो उस पर ज्यादा जुर्माना है।

स्विट्जरलैंड : साल 2021 में स्विट्जरलैंड ने बुर्का पर बैन लगा दिया था। इस फैसले के बाद से फिर धार्मिक आजादी, सुरक्षा, महिला अधिकारों को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, इसके बाद 51 फीसदी वोटर्स ने बैन के पक्ष में वोटिंग की थी।

नीदरलैंड्स: अगस्त 2019 में नीदरलैंड्स में भी बुर्का, नकाब पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया था। वहां सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सरकारी इमारतों, शिक्षण संस्थान, अस्पताल आदि में इनके इस्तेमाल पर बैन लगाया था। सरकार ने फेस कवरिंग परिधानों पर बैन लगाया था और पालन ना करने पर जुर्माने का प्रावधान रखा गया।

श्रीलंका : अप्रैल 2021 में श्रीलंका की कैबिनेट ने बुर्का पर बैन लगाने का प्रस्ताव पास किया। यहां कुछ हमलों और नेशनल सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया था, क्योंकि उस दौरान श्रीलंका में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया था।

बेल्जियम: जुलाई, 2011 में बेल्जियम ने चेहरा कवर करने वाले परिधानों पर बैन लगाया था। ऐसा ना करने पर सात दिन की जेल की सजा और जुर्माना का प्रावधान रखा गया था। वैसे यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं रहती हैं और वो इसके पक्ष में है।

ऑस्ट्रिया: अक्टूबर 2017 में ऑस्ट्रिया ने धार्मिक परिधानों समेत फुल फेस कवरिंग परिधानों पर बैन लगा दिया था, जिसमें बुर्का और नकाब आदि शामिल है। इसके लिए करीब 12 हजार रुपये तक का जुर्माना भी रखा गया है और पुलिस मुंह ढकने वाले लोगों पर कार्रवाई कर सकती है।

बुलगेरिया : 2016 में बुलगेरिया की संसद ने सुरक्षा को देखते हुए चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर बैन लगाया था। इसके अलावा ऐसा ना करने वाले लोगों पर जुर्माने का प्रावधान भी है।

New Travel Guidelines अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी, यहां पढ़ें नई गाइडलाइंस , खत्म किया गया 7 दिन का अनिवार्य क्वारंटीन

10-Feb-2022

नई दिल्ली (इंडिया) दिल्ली में अब कोरोना (Corona) की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। रोज़ाना सामने आ रहे कोरोना मामलों में लगातार गिरावट देखी गई है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों (International Passengers) के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस 14 फरवरी से प्रभावी होंगी।

नई गाइडलाइंस के अनुसार, ‘जोखिम में’ और अन्य देशों का कोई सीमांकन नहीं होगा। इसके अलावा देश में आने के बाद 14 दिनों की सेल्फ मॉनिटरिंग और सेल्फ टेस्टिंग की भी बात कही गई है। जबकि पहले सात दिनों के लिए होम क्वारंटाइन अनिवार्य था।

नई गाइडलाइंस में सभी यात्रियों को यात्रा से पहले एयर सुविधा पोर्टल पर एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म में अपनी पूरी जानकारी देने को कहा गया है जिसमें पिछले 14 दिन का उनका यात्रा रिकॉर्ड भी शामिल है।

इसके अलावा उन्हें यात्रा से 72 घंटे पहले तक की RT-PCR नेगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीन की दोनों खुराकें लगाने का सर्टिफिकेट भी जमा करना होगा।
फॉर्म में दी गई जानकारी, नेगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट गलत होने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
नए नियमों के अनुसार, केवल बिना लक्षण वाले यात्रियों को ही फ्लाइट में बैठने दिया जाएगा।
यात्रियों को उड़ान के दौरान कोविड संबंधी प्रोटोकॉल्स का पालन करना होगा और किसी भी यात्री में कोविड के लक्षण दिखने पर उसे आइसोलेट कर दिया जाएगा।
भारत में आने पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी और स्क्रीनिंग के दौरान संक्रमण के लक्षण दिखने पर उन्हें तुरंत आइसोलेट करके अस्पताल ले जाया जाएगा।
संक्रमित पाए जाने पर उनके संपर्कों पर निगरानी रखी जाएगी।

चीन में माता-पिता को मिलेगी बच्चों के अपराध की सजा, कानून लाने की तैयार में संसद

19-Oct-2021

चीन ने बच्चों को अपराध की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत बच्चों के अपराध या बुरे बर्ताव के लिए उनके माता-पिता को दंडित किया जाएगा। इतना ही नहीं बच्चों के अपराध करते या बुरा बर्ताव करते पकड़े जाने पर माता-पिता को परिवार शिक्षा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा जाएगा। वहां उन्हें बच्चों की बेहतर परवरिश करना सिखाया जाएगा। इसके लिए चीनी संसद एक विशेष कानून लाने की तैयारी कर रही है।

परिवार में व्यावहारिक शिक्षा का अभाव
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता जेंग ताइवे के अनुसार, किसी नाबालिग बच्चे के बुरा व्यवहार करने के बहुत से कारण होते हैं। लेकिन सबसे बड़ा कारण परिवार में व्यावहारिक शिक्षा का अभाव होता है। इसी सप्ताह संसद की स्थायी समिति विधेयक के मसौदे की समीक्षा करेगी।
उसकी स्वीकृति के बाद प्रारूप को विधेयक के रूप में संसद के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि माता-पिता किस तरह से बच्चों के आराम, खेलने और व्यायाम के लिए समय सुनिश्चित करें।

बच्चों को बुरी चीजों की लत से बचाने पर जोर
सरकार इस साल से बच्चों को बुरी चीजों की लत से बचाव के लिए कई कदम उठा रही है।
बच्चों में ऑनलाइन गेम की लत को कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसे अफीम की तरह नशा कहा गया है।
शिक्षा मंत्रालय ने इंटरनेट गेमिंग के घंटे सीमित किए हैं।
बच्चों को शुक्रवार, शनिवार और रविवार को एक-एक घंटे ही इंटरनेट गेम खेलने की अनुमति है।
इंटरनेट के सेलिब्रिटी की भगवान जैसी पूजा और बच्चों में उनका असर कम करने की कोशिश भी की जा रही है।