Wednesday,28 September 2022   06:25 am
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चीन ने कार में लगा दी बुलेट ट्रेन वाली तकनीक, चलती नहीं, रोड पर तैरती है ये कार

22-Sep-2022

Flying Cars :- चीन एक नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से मौजूदा इलेक्ट्रिक कार्स का माइलेज बढ़ाया जा सकता है। फ्यूचर में किस टेक्नोलॉजी का बोलबाला होगा, इस पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। मगर इलेक्ट्रिक कार्स का विस्तार तेजी से हो रहा है।

दुनियाभर में लोग पेट्रोल और डीजल कार्स से इलेक्ट्रिक कार्स की ओर मूव कर रहे हैं। इन गाड़ियों के साथ एक समस्या बैटरी और चार्जिंग स्टेशन की है। हर जगह फास्ट चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हैं और सिंगल चार्ज में आप कहां तक इन्हें लेकर जा सकते हैं। ऐसे में चीन Maglev टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।

Southwest Jiaotong यूनिवर्सिटी में रिसर्चर्स ने 8 पैसेंजर कार्स को मॉडिफाइ किया है। इन कार्स को मैग्नेट्स की मदद से एक कंडक्टर रोड पर 143 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जा सका है। Maglev टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से कार रोड से 35mm ऊपर दौड़ती है। चीनी मीडिया ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया है। इस प्रोग्राम से जुड़े रिसर्चर्स का कहना है कि पैसेंजर गाड़ियों में Maglev (Magnetic Levitation) टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से एनर्जी यूज घटेगा। इसके साथ ही वीइकल्स की रेंज भी बढ़ेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा इलेक्ट्रिक वीइकल इंडस्ट्री को मिल सकता है। जहां यूजर्स कार की रेंज को लेकर अभी परेशान रहते हैं।

 

 

ताइवान में 2 दिन में दूसरा भूकंप, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 6.9, जापान में सुनामी का अलर्ट जारी ?

19-Sep-2022


ताइवान के दक्षिणपूर्वी तट पर रविवार को भूकंप आया। US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.9 मापी गई। इसके पहले शुरुआती छोटे झटके भी आए। वहीं, 17 सितंबर को यहां 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था।भूकंप ताइवान के ताइतुंग शहर से लगभग 50 किलोमीटर (30 मील) नॉर्थ में आया। इसे लेकर जापान ने ताइवान के पास स्थित आइलैंड्स में सुनामी की चेतावनी जारी की है। US जियोलॉजिकल सर्वे ने पहले भूकंप की तीव्रता 7.2 मापी थी। बाद में इसे डाउनग्रेड करके 6.9 कर दिया गया।भूकंप के चलते ताइवान में कई जगहों पर सड़कें टूट गई हैं। स्टेशन पर खड़ी कुछ ट्रेनें तक पलट गईं, वहीं कुछ ट्रेनें हिलती नजर आईं। यूली में एक स्टोर गिर गया, जिसमें 4 लोग दब गए। उन्हें रेस्क्यू कर लिया गया है।कई इलाकों में ब्रिज टूट गए, जिससे ब्रिज से गुजर रहीं गाड़ियां भी नीचे आ गिरीं। डोंगली स्टेशन पर ट्रेन पटरी से उतर गई, यही नहीं उस स्टेशन की छत भी गिर गई। स्थानीय प्रशासन इस भूकंप में भारी नुकसान होने की बात कह रहा है। बता दें कि इससे पहले साल 2016 में आए भूकंप से ताइवान में 100 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, साल 1999 में 7.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 2000 लोग मारे गए थे।

 

Leicester Violence: इंग्लैंड के लीसेस्टर में दो समुदायों में झड़प, धार्मिक स्थल पर हमले के बाद भड़के ऐक्शन में पुलिस ?

19-Sep-2022


लंदन: इंग्लैंड के लीसेस्टर में दो समुदायों में झड़प के बाद भारी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। इस झड़प की शुरुआत करीब एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। तब एक समुदाय ने दूसरे के धार्मिक प्रतीक को उखाड़ दिया था। रविवार रात को दोबारा एक समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर दूसरे समुदाय के पूजा स्थल में तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद लीसेस्टर समेत ब्रिटेन के कई हिस्सों में तनाव दोबारा बढ़ गया है। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें समुदाय विशेष के लोगों को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते देखा जा सकता है। भीड़ ने दूसरे समुदाय के पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश की।इस घटना के बाद एक धार्मिक संगठन ने प्रवक्ता ने कहा कि कल बेलग्रेव रोड पर एक बड़े समूह को विरोध प्रदर्शन करते, हिंसा और आतंक फैलाते देखा गया। इन लोगों ने एक धर्म के पूजा स्थल में तोड़फोड़ भी की। हम इस तरह के व्यवहार को देखकर हैरान और दुखी हैं। कृपया सुरक्षित रहें, हम अपने समुदाय से व्यवस्था बनाए रखने। लीसेस्टर के पुलिस प्रमुख ने भी एक वीडियो जारी कर लोगों से इस हिंसा में शामिल न होने का आग्रह किया। कल रात जारी किए वीडियो में चीफ कांस्टेबल रॉब निक्सन ने कहा: 'हमें शहर के पूर्वी लीसेस्टर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अव्यवस्था के फैलने की कई रिपोर्टें मिली हैं। सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। उन्हें लोगों को खदेड़ने और किसी को भी रोककर जांच करने की शक्तियां दी गई हैं। कृपया कोई भी ऐसे प्रदर्शनों में शामिल न हों।लीसेस्टरशायर के पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि शनिवार रात और रविवार सुबह दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि समुदाय विशेष के पूजा स्थल पर हमले की खबरें सच नहीं है। पुलिस को हिंसा और संपत्तियों को पहुंचे नुकसान के कई घटनाओं की सूचना दी गई है और जांच की जा रही है। हम लीसेस्टर के मेल्टन रोड पर एक धार्मिक इमारत के बाहर एक आदमी को झंडा खींचते हुए एक वीडियो के बारे में जानते हैं। हम स्थानीय समुदाय के नेताओं के समर्थन से बातचीत और शांति का आह्वान करना जारी रख रहे हैं।

 

Google के लिए झटका भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ बिग टेक एकाधिकार को चुनौती दे रहा है ?

19-Sep-2022


 Google के खिलाफ 4.1 बिलियन डॉलर के यूरोपीय संघ के रिकॉर्ड एंटीट्रस्ट फाइन को बरकरार रखने के बाद, Google की मूल कंपनी अल्फाबेट को एक बड़ा झटका लगा है। Google को कथित रूप से Android फ़ोन निर्माताओं पर रणनीतिक प्रतिबंध लगाने के लिए दंडित किया गया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके खोज इंजन को अकेले लाभ मिले। यूरोपीय संघ के फैसले के लगभग तुरंत बाद दक्षिण कोरिया में एक और फैसला आया, जहां सांसदों ने कथित गोपनीयता उल्लंघन के लिए अल्फाबेट और मेटा पर 71 मिलियन डॉलर का संयुक्त जुर्माना लगाया। जांच से पता चला कि Google उपयोगकर्ता डेटा एकत्र कर रहा था और उसका अध्ययन कर रहा था, और उनकी वेबसाइट के उपयोग पर नज़र रख रहा था।जैसा कि Google और अन्य बिग टेक दिग्गज कई मोर्चों पर अपनी एकाधिकारवादी प्रथाओं पर दुनिया भर में बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं, भारत भी प्रौद्योगिकी फर्मों के विश्वास-विरोधी और एकाधिकारवादी व्यवहार को संबोधित करने के लिए कमर कस रहा है।भारत में, CCI और MEITY के नेतृत्व में ‘कार्यों’ की एक श्रृंखला भी संभावित परिदृश्यों की ओर ले जा रही है जहाँ नियामक प्राधिकरणों के लिए बिग टेक की अप्रतिबंधित गैर-जवाबदेही और भारतीय समाचार प्रकाशकों के साथ व्यवहार में उनके कथित अविश्वास-विरोधी व्यवहार भी जा रहे हैं। गंभीर रूप से चुनौती दी जाए। यह ध्यान दिया जा सकता है कि भारत ने लगातार यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि तकनीकी दिग्गज न केवल घरेलू कानूनों के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार हैं, बल्कि नेटिज़न्स के अधिकारों का उल्लंघन भी नहीं करते हैं। एक संसदीय समिति भी बिग टेक एकाधिकार से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करती रही है। भारतीय प्रतिस्पर्धा समिति (सीसीआई), भारत सरकार के तहत एंटीट्रस्ट वॉचडॉग भी डीएनपीए (डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन) द्वारा दायर Google के खिलाफ याचिका पर आगे बढ़ रही है, जो Google द्वारा अर्जित विज्ञापन राजस्व के वितरण में उचित हिस्सेदारी की मांग कर रही है। समाचार प्रकाशकों के अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म। DNPA के तत्वावधान में भारत के ये प्रमुख मीडिया संगठन, Google जैसे बिग टेक दिग्गजों को घरेलू समाचार प्रदाताओं के साथ अपने संबंधों में निष्पक्ष होने और राजस्व-साझाकरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक पिच बनाने के लिए एक साथ आए हैं।अमेरिका में, निश्चित रूप से, हाल के दिनों में Google को हिला देने के उद्देश्य से विकास की एक धार आई है। 13 प्रभावशाली कंपनियों के एक समूह ने अमेरिकी कांग्रेस से एक प्रस्तावित विधेयक को हरी झंडी दिखाने का आह्वान किया, जो Google और अन्य तकनीकी दिग्गजों की शक्तियों को काफी कम कर सकता है। अलग से, अमेरिकी न्याय विभाग ने Google पर एकाधिकारवादी व्यवहार का आरोप लगाते हुए एक संघीय न्यायाधीश से शिकायत की। यदि वह प्रस्ताव एक परीक्षण के लिए आगे बढ़ता है और Google को दोषी ठहराया जाता है, तो बड़ी दूरसंचार कंपनियों को भारी कमाई का नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खुलासे से पता चलता है कि Google कथित तौर पर सैमसंग, ऐप्पल और अन्य दूरसंचार दिग्गजों को अरबों डॉलर का भुगतान करता है ताकि उसके खोज इंजन का एकमात्र वर्चस्व सुनिश्चित हो सके।

नासा का मिशन DART:500 किलो का स्पेसक्राफ्ट उल्का पिंड से टकराकर उसकी दिशा बदलेगा जानिए कैसे ?

17-Sep-2022


NASA के वैज्ञानिक ग्रह के सुरक्षा सिस्टम को टेस्ट करने वाले दुनिया के पहले मिशन की तैयारी कर रहे हैं।अंतरिक्ष एजेंसी अपने डबल एस्ट्रॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (DART) के साथ आने वाले दिनों में धरती की ओर बढ़ रहे उल्का-पिंडों सुरक्षा देने से जुड़ी टेक्नोलॉजी की जांच करेगी।यह टेस्ट धरती के करीब से गुजरने वाले उल्का-पिंड से जानबूझकर एक टक्कर करवाते हुए किया जाएगा।इसमें टारगेट डाइमॉर्फस नाम के उल्का-पिंड को बनाया गया है, जो 525 फीट चौड़ा है।अंतरिक्ष में धरती किसी छोटी सी गेंद की तरह है.अगले महीने होने जा रहे टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि DART के साथ स्पेसक्राफ्ट को ऑटोनॉमस तरीके से नेविगेट करते हुए उल्का-पिंड के साथ जानबूझकर टकराया जा सकता है या नहीं।साथ ही इस टक्कर के असर, उल्का-पिंड की दिशा और रफ्तार पर इसके प्रभाव को समझने की कोशिश भी की जाएगी।1,500mph रफ्तार से होने वाली टक्कर के बाद हुए बदलावों का पता धरती पर मौजूद टेलीस्कोप्स की मदद से लगाया जाएगा।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की योजना इस पूरे इवेंट की 26 सितंबर को लाइवस्ट्रीमिंग करने की है।NASA की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब चैनल्स पर भी यह लाइव देखा जा सकेगा।लॉरेल, मेरीलैंड स्थित DART एयरक्राफ्ट्स बनाने वाली जॉन्स हॉपकिन्स अप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी की ओर से 'इंपैक्ट डे' पर एक लाइव ब्रीफिंग भी आयोजित की जाएगी।टक्कर का समय 26 सितंबर को शाम 7:14 ईस्टर्न टाइम (भारत में 27 सितंबर तड़के 4:44 बजे) तय किया गया है।एजेंसी की ओर से पिछले साल 33 करोड़ डॉलर कीमत वाला एक छोटा प्रोब लॉन्च किया गया था, जो धरती से करीब सात अरब मील दूर जा रहा है।इसके साथ LICIACube नाम का छोटा स्पेसक्राफ्ट भी भेजा गया है, जो DART से 10 दिन पहले रिलीज किया जाएगा।इसकी मदद से इंपैक्ट के दिन टक्कर की फोटोग्राफ्ट और इमेजरी डाटा जुटाया जाएगा।नए डाटा का फायदा मौजूदा सिस्टम में सुधार करते वक्त मिलेगा।संभवनाओं पर बात करें तो वैज्ञानिकों का कहना है हर 20,000 साल में औसत 460 फीट का एक उल्कापिंड धरती से टकराता है। 1908 में साइबेरिया में 40 मीटर का उल्कापिंड गिरा था, जिससे लंदन शहर के बराबर जंगल को तबाह कर दिया था।

 

Gautam Adani: गौतम अडानी बने दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स, जानें लिस्ट में पहले नंबर पर कौन?

16-Sep-2022

भारतीय बिजनेसमैन गौतम अडानी शुक्रवार को दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गए। उन्होंने फ्रांस के एलवीएमएच के बर्नार्ड अर्नाल्ट को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है। गौतम अडानी एंड फैमिली का नेट वर्थ 154.6 बिलियन डॉलर है। हालांकि, एलन मस्क अब भी पहले नंबर पर हैं। दूसरे नंबर पर गौतम अडानी, तीसरे नंबर पर बर्नार्ड अर्नाल्ट, चौथे नंबर पर जेफ बेजोस और पांचवे नंबर पर बिल गेट्स हैं। वहीं मुकेश अंबानी 92.1 बिलियन डॉलर नेट वर्थ के साथ 8वें स्थान पर हैं। इसके बाद से सोशल मीडिया पर #gautamadani ट्रेंड कर रहा है। बहुत से लोग मीम्स बनाकर इस पर हैरानी जताने के साथ-साथ मजाकिया ट्वीट भी कर रहे हैं।

रैंक नाम कुल संपत्ति (डॉलर में) कंपनी/उद्योग देश
1. एलन मस्क 273.5 अरब टेस्ला, स्पेस एक्स अमेरिका
2. गौतम अडानी एंड फैमिली 155.5 अरब इंफ्रास्ट्रक्चर, कमोडिटी भारत
3. बर्नार्ड अर्नाट एंड फैमिली 155.2 अरब LVMH फ्रांस
4. जेफ बेजोस 149.7 अरब अमेजन अमेरिका
5. बिल गेट्स 105.3 अरब माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका
6. लैरी एलिसन 98.3 अरब सॉफ्टवेयर अमेरिका
7. वॉरेन बफेट 96.5 अरब बर्कशायर हैथवे अमेरिका
8. मुकेश अंबानी 92.2 अरब डायवर्सिफाइड भारत
9. लैरी पेज 89 अरब गूगल अमेरिका
10. सर्गी ब्रिन 85.4 अरब गूगल अमेरिका

(स्रोत: Forbes)

पाकिस्तान की चेतावनी के बाद हरकत में आया रिमोट कंट्रोल बम से उड़ाया,तालिबान के खिलाफ उठाई थी बंदूक ?

14-Sep-2022

 

पाकिस्तान में तालिबान के खिलाफ आवाज उठाने वाले निशाने पर हैं। मंगलवार को कबाल तहसील के बड़ा बांदी इलाके में एक ब्लास्ट हुआ। इसमें पांच लोग मारे गए। जिनकी जान गई, उनमें से एक की पहचान शांति समिति के सदस्य इदरीस खान के रूप में हुई। डिस्ट्रिक पुलिस आफिसर (DPO) जाहिद मारवत के मुताबिक, विस्फोट कबाल तहसील के बड़ा बांदी इलाके में हुआ। शवों को सैदु शरीफ टीचिंग हॉस्पिटल ले जाया गया। विस्फोट में दो पुलिस कर्मियों की भी मौत हो गई। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह एक टार्गेट अटैक था। इदरीस खान इसका निशाना थे। वे शांति समिति(ग्राम रक्षा समितियां) के सदस्य थे। इनका गठन 2007 और 2009 के बीच तालिबान द्वारा क्षेत्र पर नियंत्रण करने के बाद स्वात में किया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन समितियों के सदस्यों ने अपने गांवों और यूनियन काउंसिल की रक्षा के लिए तालिबान आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। स्वात स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) फैयाज खान ने लोकल मीडिया को बताया। इदरीस और उनके पुलिस गार्ड-हेड कांस्टेबल रामबिल और कांस्टेबल तौहीद  एक व्हीकल में यात्रा कर रहे थे। जब वे शाम 6:30 बजे के करीब कोट कटाई गांव के पास पहुंचे, तभी यह विस्फोट हुआ। हमले में एक राहगीर सनाउल्लाह और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति भी मारा गया। फैयाज ने कहा कि इदरीस जिस वाहन में यात्रा कर रहे थे, वह भी पूरी तरह से नष्ट हो गया। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है।  विस्फोट की सूचना के तुरंत बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने घटना का संज्ञान लिया और पुलिस आईजी से एक रिपोर्ट तलब की। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कसम खाई कि शहीदों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।इस बीच, बारा बंदाई के एक निवासी ने लोकल मीडिया को बताया कि शांति समितियों के सदस्यों को प्रतिबंधित संगठनों और आतंकवादियों द्वारा लंबे समय से धमकी दी जाती रही है। उन्होंने कहा, "आतंकवाद के दौरान इन लोगों ने तालिबान के खिलाफ बंदूकें उठाईं और उनका विरोध किया था।

Papua New Guinea में कांपी धरती, 7.6 तीव्रता का आया तेज भूकंप, कई इमारतों को पहुंचा नुकसान जानिए ?

12-Sep-2022

 

आज सुबह पूर्वी पापुआ न्यू गिनी की धरती उस वक्त कांप गई, जिस वक्त 7.6 तीव्रता का तेज भूकंप आया। भूकंप की वजह से शहर मदांग और Further Inland से भारी नुकसान की खबर है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वहां पर कई इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, यही नहीं इस तीव्र भूकंप के बाद अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने वहां पर सुनामी की चेतावनी जारी की थी लेकिन कुछ वक्त उसने अपनी चेतावनी को वापस ले लिया।भूकंप कायनंटू शहर से लगभग 67 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया है। भूकंप के बाद से शहर में बिजली गुल है और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।भूकंप के दौरान लोग सड़कों पर घर के बाहर नजर आए। जब भूमि में अचानक कंपन शुरू हो जाता है तो उसे भूकंप कहते हैं। ये एक नेचुरल प्रक्रिया है। जब पृथ्वी के अंदर यानी कि लिथोस्फीयर के अंदर कंपन पैदा होता है तो बहुत सारी एनर्जी आउट होती, जो कि भूकम्पीय तरंगों में कन्वर्ट हो जाती है और धरती कांपने लगती है, इसी प्रक्रिया को भूकंप कहते हैं। ये बहुत ज्यादा घातक भी होते हैं।

भारत-चीन तनाव 28 महीने बाद खत्म! PP-15 से भारत और चीन के सैनिकों की वापसी शुरू; चीन ने की पुष्टि ?

09-Sep-2022

चीनी रक्षा मंत्रालय ने जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, ‘‘चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की बैठक के 16वें दौर में बनी सहमति के अनुसार, 8 सितंबर 2022 को जियानन डाबन क्षेत्र से चीनी और भारतीय बलों ने समन्वित और नियोजित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया है, जो सीमावर्ती इलाकों में शांति के लिए अच्छा है।’चीनी सेना ने शुक्रवार को पुष्टि की कि पूर्वी लद्दाख के ‘गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स’ क्षेत्र में ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट 15’ से चीन और भारत के सैनिकों की ‘‘समन्वित एवं नियोजित तरीके’’ से वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूर्वी लद्दाख में दो साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में अहम कदम आगे बढ़ाते हुए भारतीय एवं चीनी सेनाओं ने गुरुवार को घोषणा की कि उन्होंने गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र के ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट 15’ से बलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारत लगातार कहता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। गतिरोध को हल करने के लिए दोनों सेनाओं ने कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की बातचीत की।


शुरू हुई सैनिकों की वापसीSCO शिखर सम्मेलन से पहले सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया की घोषणादोनों देशों ने LAC पर 50,000 से 60,000 सैनिकों की तैनाती कर रखी है
Ladakh Standoff: चीनी सेना ने शुक्रवार को पुष्टि की कि पूर्वी लद्दाख के ‘गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स’ क्षेत्र में ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट 15’ से चीन और भारत के सैनिकों की ‘‘समन्वित एवं नियोजित तरीके’’ से वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूर्वी लद्दाख में दो साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में अहम कदम आगे बढ़ाते हुए भारतीय एवं चीनी सेनाओं ने गुरुवार को घोषणा की कि उन्होंने गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र के ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट 15’ से बलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारत लगातार कहता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। गतिरोध को हल करने के लिए दोनों सेनाओं ने कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की बातचीत की।



चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की बैठक के 16वें दौर में बनी सहमति

चीनी रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा, ‘‘चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की बैठक के 16वें दौर में बनी सहमति के अनुसार, 8 सितंबर, 2022 को जियानन डाबन क्षेत्र से चीनी और भारतीय बलों ने समन्वित और नियोजित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया है, जो सीमावर्ती इलाकों में शांति के लिए अच्छा है।’’ यहां भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि चीनी सेना की प्रेस रिलीज में जिस जियानन डाबन क्षेत्र का जिक्र किया गया है, वह गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स इलाके का वही ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट-15’ है, जिसका गुरुवार को भारतीय प्रेस रिलीज में उल्लेख किया गया था। यह एक संयुक्त बयान है, लेकिन दोनों पक्षों ने इलाके का उल्लेख विभिन्न नाम से किया है।

दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी

दिल्ली में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा गुरुवार रात को जारी संयुक्त बयान में कहा गया था, ‘‘भारत-चीन के बीच 16वें दौर की कोर कमांडर स्तर की बैठक में बनी सहमति के अनुसार, 8 सितंबर 2022 को गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स (पीपी-15) क्षेत्र से भारतीय और चीनी सैनिकों ने समन्वित एवं नियोजित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के लिए अच्छा है।’’

SCO शिखर सम्मेलन से पहले सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया की घोषणा

बता दें कि उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से लगभग एक सप्ताह पहले सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया की घोषणा की गई है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल होंगे। ऐसी अटकलें हैं कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर किसी पक्ष ने कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। दोनों सेनाओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पीछे हटने की प्रक्रिया की शुरुआत जुलाई में हुई 16वें दौर की उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता का परिणाम है।

शुरू हुई सैनिकों की वापसी

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट 15’ (पीपी-15) से सैनिकों की वापसी गुरुवार सुबह शुरू हुई और दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडर आगामी कदमों के तौर-तरीकों पर काम कर रहे हैं। 16वें दौर की कोर कमांडर-स्तर की वार्ता के बाद, दोनों पक्षों के जमीनी कमांडर ने पीछे हटने की प्रक्रिया की बारीकियों पर सिलसिलेवार बात की। सूत्रों ने कहा कि भारत देपसांग और डेमचोक के टकराव वाले शेष बिंदु क्षेत्रों में लंबित मुद्दों के समाधान के लिए दबाव बनाए रखेगा।

पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट क्षेत्रों से हुई थी सैनिकों की वापसी

कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की थी। पैंगोंग झील क्षेत्र से पीछे हटने की प्रक्रिया पिछले साल फरवरी में हुई थी, जबकि गोगरा में ‘पेट्रोलिंग प्वाइंट’ 17 (ए) क्षेत्र से सैनिकों और उपकरणों की वापसी पिछले साल अगस्त में हुई थी। सोलहवें दौर की सैन्य वार्ता जयशंकर के अपने चीनी समकक्ष वांग यी से बाली में मुलाकात के 10 दिन बाद हुई थी। पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध शुरू हो गया था। दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी अस्त्र-शस्त्र भी तैनात कर दिए थे। दोनों पक्षों में से प्रत्येक ने LAC पर संवेदनशील क्षेत्र में 50,000 से 60,000 सैनिकों की तैनाती कर रखी है।

britain की महारानी अपने पीछे छोड़ गईं कितनी दौलत? जानें कैसे होती थी एलिजाबेथ की कमाई ?

09-Sep-2022

 

महारानी की संपत्ति में कई बेशकीमती कलाकृतियां, हीरे-जेवरात, लग्जरी कारें, शाही स्टैंप कलेक्शन और घोड़े शामिल हैं। रॉयल कलेक्शन में 10 लाख से ज्यादा चीजें शामिल हैं जिनकी अनुमानित कीमत 10 खरब रुपए है।ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरुवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल थीं। वह दुनिया की अकेली ऐसी महिला थीं जिन्हें विदेशी यात्रा के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि 96 साल की महारानी के पास कितना पैसा था और उनकी आय का प्रमुख स्रोत क्या था? कई रिपोर्ट्स में इसे लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए गए हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शाही परिवार के सदस्यों को करदाताओं की तरफ मोटी रकम प्राप्त होती है। जबकि शाही परिवार की आय के अन्य स्रोत अज्ञात हैं। खबरों की मानें तो महारानी की आय के तीन मुख्य स्रोत थे। इनमें सोवेरिन ग्रांट, प्रिवी पर्स और उनकी निजी संपत्ति से होने वाली आय शामिल है।ब्रिटेन की महारानी की संपत्ति के बारे में अक्सर अनुमान लगाया जाता है लेकिन खुद महारानी की तरफ से इस बारे में कभी कुछ सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन उनकी आय के आधार पर कुछ विशेषज्ञों ने इस संबंध में अपना अनुमान लगाया है। गुडटू नामक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की अनुमानित कुल संपत्ति 365 मिलियन पाउंड यानी 33.36 अरब रुपए से अधिक थी। संडे टाइम्स रिच लिस्ट के अनुसार यह 2020 में उनकी कुल संपत्ति से 15 मिलियन पाउंड अधिक थी और इसमें उनकी निजी आय और सोवेरिन ग्रांट शामिल है।


कुल संपत्ति 6,631 अरब रुपए से अधिक
पिछले कुछ साल में महारानी पेपर की सालाना रिच लिस्ट में 30 स्थान तक नीचे गिर गईं। 2020 में वह 372वें स्थान पर थीं और 2018 के बाद से यह 30 स्थानों की गिरावट थी। पूरे राजशाही परिवार की संपत्ति की बात करें तो फोर्ब्स मैग्जीन के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 72.5 बिलियन पाउंड (6,631 अरब रुपए से अधिक) है। महारानी के आय के प्रमुख स्रोतों के बारे में बात करें तो उन्हें सोवेरिन ग्रांट वार्षिक तौर पर सरकार से प्राप्त होती थी, जबकि बाकी दो स्रोत स्वतंत्र थे (प्रिवी पर्स महारानी की निजी आय होती है) जिनमें करदाताओं का पैसा शामिल नहीं था।


पैलेस में आने वालों से नहीं होती कमाई
कुछ लोगों का मानना है कि महारानी को बकिंघम पैलेस, विंडसर कैसल और टॉवर ऑफ लंदन जैसी शाही संपत्तियों में आने वाले लोगों से पैसा मिलता था। हालांकि यह सच नहीं है। इस राजस्व का इस्तेमाल द रॉयल कलेक्शन के लिए किया जाता था। लंदन के अलावा शाही परिवार की संपत्ति स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में भी है। यह महारानी की निजी संपत्ति है जिसे बेचा नहीं जा सकता बल्कि यह उनके उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित होगी।


रॉयल कलेक्शन में 10 लाख से ज्यादा चीजें शामिल
इसके अलावा महारानी की संपत्ति में कई बेशकीमती कलाकृतियां, हीरे-जेवरात, लग्जरी कारें, शाही स्टैंप कलेक्शन और घोड़े शामिल हैं। रॉयल कलेक्शन में 10 लाख से ज्यादा चीजें शामिल हैं जिनकी अनुमानित कीमत 10 खरब रुपए है। हालांकि यह संपत्ति ब्रिटेन के एक ट्रस्ट के पास है। ब्रिटेन के नए राजा किंग चार्ल्स की सालाना आय के बारे में बात करें तो उन्हें हर साल Duchy of Cornwall से करीब 21 मिलियन पाउंड की आय प्राप्त होती है।

डोनाल्ड ट्रंप बोले-पीएम मोदी मेरे दोस्त है , मेरे कार्यकाल में भारत के साथ सबसे बेहतर रहे संबंध ?

09-Sep-2022

 

Donald Trump on PM Modi relationship: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बार फिर तारीफ की है। NDTV को दिए गए अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं। भारत का मुझसे बेहतर दोस्त कभी नहीं रहा है। उन्होंने अपने चुनाव लड़ने के भी संकेत दिए हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि डेमोक्रेट्स उनको चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क के पास बेडमिंस्टर में अपने विशेष गोल्फ क्लब में दिए गए इंटरव्यू में कहा कि हर कोई चाहता है कि मैं चुनावी रेस में शामिल हो जाउं, मैं चुनाव में आगे हूं लेकिन चुनाव लड़ने का फैसला बाद में लिया जाएगा।


भारत के साथ संबंधों पर खुलकर की चर्चा

ट्रंप ने भारत के साथ अपने संबंधों पर कहा कि उनके संबंध भारत से सबसे अच्छे रहे हैं। बराक ओबामा, हो या जो बिडेन, इन लोगों से अधिक मित्रता मैंने भारत के साथ रखी है। यह कोई भी जाकर पीएम नरेंद्र मोदी से पूछ सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में भी उनको भारतीय समुदाय से भारी समर्थन मिलता रहै। बीते चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यहां आकर उनके लिए वोट अपील की और हम दोनों के संबंधों के बारे में बताया। यहां भारतीयों ने अपार समर्थन भी दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मेरे भारत और प्रधान मंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। हम हम दोस्त थे। और मुझे लगता है कि वह एक महान व्यक्ति है और बहुत अच्छा काम कर रहा है। 

दूसरे कार्यकाल के लिए मौका मिला तो करुंगा यह काम

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत की प्राथमिकताएं, उर्जा स्वतंत्रता है। पीएम मोदी को मौका मिला हुआ है। मुझे अगर मौका मिला तो हम अपने देश को उर्जा स्वतंत्रता प्रदान करेंगे। हम अपनी अर्थव्यवस्था को एक बेहतरी की ओर लेकर जाएंगे। हमारी अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया में गर्जना करेगी। उन्होंने कहा कि हम नौकरियों का यहां रिकार्ड बनाएंगे। हम वह काम करेंगे जो पिछले दो सालों में नहीं हो सका।

दोनों नेता एक दूसरे के देश में पहुंच कर चुके हैं प्रचार

दरअसल, सितंबर 2019 में पीएम मोदी के दुबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद, वह और डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस के ह्यूस्टन में हाउडी मोदी रैली की थी। इस रैली में हजारों की संख्या में अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने हिस्सा लिया था। इस रैली में पीएम मोदी ने ट्रंप के समर्थन में वोट करने की अपील करते हुए कहा था कि अबकी बार ट्रंप सरकार। हालांकि, ट्रंप चुनाव जीत नहीं पाए थे और डेमोक्रेट्स नेता जो बिडेन ने उनको हरा दिया था।

 

Apple को बड़ा झटका, बिना चार्जर आईफोन बेचने पर सरकार ने लगाया 18 करोड़ का जुर्माना

09-Sep-2022

 

Brazil Government Orders: एक नई रिपोर्ट के अनुसार ब्राजील सरकार ने एप्पल पर आइफोन सेल्स पर बैन लगाने का फैसला किया है, उसकी वजह यह है कि एप्पल के आईफोन के डिब्बे में चार्जर शामिल नहीं है. चार्जर न होने की वजह से ब्राजील सरकार ने एप्पल के आईफोन को अधूरा प्रोडक्ट बताकर, एप्पल कंपनी के आईफोन सेल्स यूनिट को देश में बैन करने का आदेश दिया है. इसी के साथ ब्राजील सरकार ने एप्पल पर BRL 12.275 मिलियन का जुर्माना (जो की भारतीय मुद्रा में करीब 18 करोड़ रुपये) भी लगाया है. दरअसल एप्पल कंपनी ने दो साल पहले iPhone 12 सीरीज के लॉन्च इवेंट पर यह बता दिया था कि कम्पनी अब से आईफोन के साथ चार्जर प्रोवाइड नहीं कराएगी. बहुत से टेक कॉन्टेन्ट क्रीएटर्स ने कंपनी की इस बात को क्रिटिसाइज भी किया था, मगर कंपनी ने इस बात पर कोई एक्शन नहीं लिया था. इस प्रकार एप्पल को बिना चार्जर प्रोडक्ट लॉन्च करना महंगा पड़ गया है.

बिना चार्जर आईफोन बेचने के लिए एप्पल पर लगा जुर्माना

रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जा रहा है की जस्टिस मिनिस्ट्री ऑफ ब्राजील (Justice Ministry of Brazil) ने देश में बिना चार्जर एप्पल आईफोन मॉडल्स को बेचने पर रोक लगाने का आदेश दे दिया है. जस्टिस मिनिस्ट्री ऑफ ब्राजील ने अपनी बात में यह भी कहा है की मोबाइल के साथ चार्जर ना होना ग्राहक से जानबूझकर भेदभावपूर्ण व्यवहार है और इसी के साथ कहा है की आईफोन के इस डिब्बे में एक जरूरी पार्ट मिसिंग है अर्थात् यह एक अधूरा प्रोडक्ट है. आपको बता दें की ब्राजील सरकार ने एप्पल कंपनी पर इस अधूरे प्रोडक्ट को लेकर BRL 12.275 मिलियन का जुर्माना भी घोषित किया है, जो की इंडियन करेंसी में करीब 18 करोड़ रुपये हैं. इस तरह कंपनी को यह सौदा काफी महंगा पड़ गया है. कम्पनी ने अपनी सफाई में कहते हुए बताया कि चार्जर प्रोवाइड न कराने का कारण कार्बन उत्सर्जन को कम करना है. मगर ब्राजील सरकार ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा है की चार्जर का एनवायरनमेंट की सुरक्षा के संबंध में कोई एविडेंस नहीं है, यह एक बेवजह की बात है.


Apple iPhone में 2020 से नहीं आ रहे हैं चार्जर

आपकी जानकारी के लिए बता दें की एप्पल कंपनी ने 2020 में एक iPhone 12 लॉन्च किया था, जिसके लॉन्च इवेंट में यह अनाउंस कर दिया था की कम्पनी अब आइफोन के साथ अपने कस्टमर्स को चार्जर प्रोवाइड नहीं कराएगी. तभी से कम्पनी ने फोन के डिब्बे में चार्जर प्रोवाइड कराने बंद कर दिए थे.एप्पल को एक बड़ा नुकसान के साथ साथ रुकावटों का सामना भी करना पड़ रहा है. दरअसल बात यह है की एप्पल इस टाइम iPhone 14 Series के लॉन्च की तैयारी में लगा हुआ था. एप्पल कंपनी 7 सितंबर 2022 के रात 10.30 बजे एक लॉन्च इवेंट में लाइव स्ट्रीमिंग के द्वारा अपनी आइफोन की नई सीरीज लॉन्च करने जा रहा है. ऐसे वक्त में ब्राजील सरकार की तरफ से इस डेवलपमेंट ने तहलका मचा दिया है

19 साल की लड़की ने एक साथ दो बच्चों को दिया जन्म, पर दोनों के पिता अलग-अलग, जानें कैसे

08-Sep-2022

Twins From Two Fathers:  पुर्तगाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना गोइया राज्य के छोटे शहर माइनिरोस से है। इन बच्चों की मां ने खुलासा किया कि उस दिन मैंने दो पुरुषों के साथ कुछ घंटों के अंतराल पर सेक्स किया था। ऐसे में मैंने दूसरे व्यक्ति को डीएनए टेस्ट के लिए बुलाया। संयोग से उसका टेस्ट दूसरे बच्चे से एकदम सटीक मैच हो गया। उस लड़की ने कहा कि मैं परिणामों से हैरान थी। मुझे नहीं पता था कि ऐसा हो सकता है जबकि दोनों बच्चे देखने में बहुत समान हैं। इन दोनों बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र पर पिता के रूप में अब भी एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज है। ऐसे में डीएनए टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर बाद में बदलवाने की कोशिश की जाएगी। 

इन दोनों बच्चों की मां ने साथ रहने वाले अपने बॉयफ्रेंड की खूब तारीफ की। उसने बताया कि डीएनए टेस्ट का रिजल्ट आने के बाद उसके बॉयफ्रेंड ने कोई नाराजगी नहीं जताई। वह आज भी दोनों बच्चों का ख्याल रखता है। मेरी बहुत मदद करता है। मुझे जिसकी जरूरत होती है, वह उन सभी को पूरा करता है। हालांकि, महिला ने अपने दूसरे बच्चे के पिता के बारे में कुछ नहीं बताया।
असामान्य गर्भावस्था के तरीके का अध्ययन करने वाले डॉ टुलियो जॉर्ज फ्रेंको ने बताया कि ऐसी घटना को मेडिकल साइंस की भाषा में हेटेरोपेरेंटल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह पूरी दुनिया मे हेटेरोपेरेंटल सुपरफेकंडेशन का केवल 20 वां ज्ञात मामला है। डॉक्टर ने पुर्तगाली न्यूज आउटलेट G1 को समझाया कि ऐसी गर्भावस्था तब होती है जब एक ही मां के दो अंडे अलग-अलग पुरुषों से निषेचित होते हैं। बच्चे मां की जेनेटिक मेटेरियल को साझा करते हैं, लेकिन वे अलग-अलग प्लेसेंटा में बढ़ते हैं।

पीएम मोदी-शेख हसीना वार्ता, भारत-बांग्लादेश के बीच छह समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद ?

07-Sep-2022

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन पहुंची। यहां उनका भव्य स्वागत हुआ। बांग्लादेशी पीएम के स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। शेख हसीना के चार दिवसीय भारत दौरे का दूसरा दिन है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान उनकी मुलाकात पीएम मोदी के अलावा भारत सरकार के अन्य नेताओं के साथ भी होगी। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान भारत-बांग्लादेश के बीच छह समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना के बीच मंगलवार को बातचीत के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच नदी के पानी के बंटवारे से लेकर कनेक्टिविटी तक के क्षेत्रों में सहयोग के लिए कम से कम छह समझौतों पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। इनमें कुशियारा नदी के पानी के बंटवारे पर भी एक समझौता है जिसे पिछले महीने द्विपक्षीय संयुक्त नदी आयोग की बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया था।जानकारी के मुताबिक इसके अलावा रेलवे और ऊर्जा में सहयोग समझौतों पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। निवेश, व्यापार संबंध, जल संसाधन प्रबंधन, सीमा प्रबंधन, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इसमें छह समझौते हो सकते हैं। वार्ता से पहले शेख हसीना ने दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है।एक्सपर्ट्स द्वारा यह भी बताया जा रहा है कि द्विपक्षीय वार्ता में शेख हसीना रोहिंग्या की घर वापसी के लिए भारत से अनुरोध करेंगी। क्योंकि मानवीय आधार पर रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करना बांग्लादेश के लिए अब सिरदर्द बन गया है। करीब डेढ़ लाख रोहिंग्या शरणार्थी इस समय बांग्लादेश में हैं। इनमें से कई गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं।बता दें कि बांग्लादेश के लिए जल बंटवारा एक प्रमुख मुद्दा है। शेख हसीना ने भारत के दौरे से पहले एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि भारत को इस मामले पर और व्यापकता दिखानी चाहिए। भारत से बांग्लादेश करीब 54 नदियों को साझा करता है, जिनमें से सात नदियों की पहचान प्राथमिकता के आधार पर जल बंटवारा समझौते का फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए की जा चुकी है।वहीं इससे पहले मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन पहुंचीं शेख हसीना ने कहा कि भारत हमारा मित्र है। भारत आना हमेशा ही मेरे लिए सुखद रहता है, क्योंकि हमें हमेशा याद दिलाता है कि इस देश ने बांग्लादेश की आजादी के वक्त क्या योगदान दिया था। हमारे संबंध दोस्ताना हैं और हम हमेशा एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।

China में 6.8 की तीव्रता का भूकंप, 7 लोगों की मौत, 2017 के बाद से अब तक के सबसे तेज झटके ?

07-Sep-2022

चीन के सिचुआन प्रांत में आज दोपहर तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस दौरान रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.8 मांपी गई है. भूकंप की वजह से 7 की मौत की खबर है.सोमवार को चीन के दक्षिणी पश्चिमी सिचुआन प्रांत की लुडिंह काउंटी में 6.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने ये जानकारी दी है. भूकंप के झटके दोपहर को महसूस किए गए थे. भूकंप 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर केंद्रित था. भूकंप की वजह से 7 लोगों की मौत की खबर मिल रही है. . इससे पहले जून में भी यहां भूकंप आया था जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी.चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के हवाले से बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर आया और भूकंप का केंद्र 29.59 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 102.08 डिग्री पूर्वी देशांतर से जमीन से 16 किलोमीटर की गहरायी में स्थित था.

भूकंप का केंद्र लुडिंग काउंटी रहा
भूकंप का केंद्र लुडिंग काउंटी से 39 किलोमीटर दूर स्थित था और भूकंप के केंद्र के पांच किलोमीटर के दायरे में कई गांव आते हैं. भूकंप के झटके सिचुआन प्रांत की राजधानी चेंगदु में भी महसूस किए गए, जो भूकंप के केंद्र से 226 किलोमीटर दूर स्थित है.

किसी इमारत के नुकसान की फिलहाल खबर नहीं मिली है
चीन के सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों और वीडियो में चेंगदु में इमारतों को हिलता हुआ देखा जा सकता है. अभी किसी इमारत को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है. बता दें कि सिचुआन प्रांत तिब्बत के पड़ोस में स्थित है और भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है. इस प्रांत में 2008 में विनाशकारी भूकंप आया था, जिसमें करीब 90,000 लोगों की मौत हो गयी थी.

रूस ने यूक्रेन पर हमला क्यों किया और पुतिन क्या चाहते हैं?

07-Sep-2022

कई महीनों तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर हमले की किसी भी योजना से इनकार करते रहे. लेकिन गुरुवार को उन्होंने एक लाइव टीवी कार्यक्रम में यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिटरी ऑपरेशन’ का एलान कर दिया. रूसी राष्ट्रपति के इस एलान के बाद यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ समेत देश के अन्य हिस्सों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं रूस की तरफ़ से ये कार्रवाई पुतिन के मिन्स्क शांति समझौते को खत्म करने और यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों में सेना भेजने की घोषणा के बाद की गई है. रूस की तरफ़ से इन राज्यों में सेना भेजने की वजह ‘शांति कायम करना’ बताया गया है.रूस ने हाल के महीनों में यूक्रेन बॉर्डर के पास लगभग 2 लाख सैनिकों को तैनात किया हुआ था, जिसके बाद यूक्रेन पर हमले की अटकलें काफ़ी वक़्त से लगाई जा रही थीं हालांकि रूस लगातार इन अटकलों को ख़ारिज करता रहा. अब जब हालात और ख़राब हो चुके हैं और यूक्रेन के कई शहरों पर रूस के हमले की ख़बरें और तस्वीरें आने लगी हैं, तो ऐसे में सब के मन ये सवाल आता है कि आख़िर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते क्या हैं इसे समझने के लिए हमें 8 साल पीछे यानी साल 2014 में चलना होगा. तब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था. उस वक़्त रूस समर्थित विद्रोहियों ने देश के पूर्वी हिस्से में एक अच्छे खासे इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया था. उस वक़्त से लेकर आज तक इन विद्रोहियों की यूक्रेन की सेना से भिड़ंत लगातार जारी है.दोनों देशों के बीच टकराव टालने के लिए मिन्स्क का शांति समझौता भी हुआ, लेकिन उसके बाद भी टकराव ख़त्म नहीं हुआ.पुतिन का तर्क है कि इसी वजह से वो सेना भेजने को मजबूर हैं. हालांकि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने रूस द्वारा यूक्रेन के अलगाववादी राज्यों ‘शांति कायम’ करने के उद्देश्य से सेना भेजने के तर्क को सिरे से खारिज किया है पश्चिमी देश पहले से इस बात की आशंका जताते रहे हैं कि रूस का यूक्रेन पर हमला निश्चित है. अब यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस ने उसके कई शहरों पर हमला किया है. इन शहरों में राजधानी कीएफ़, निप्रो और खारकीएफ़ शीमिल हैं.

Canada Mass Stabbing: कनाडा में चाकूबाजी से,15 घायल 10 की मौत जानिए पूरा मामला ?

05-Sep-2022


 सस्‍काचुवान शहर में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है और 15 घायल हुए हैं। अधिकारियों ने दो संदिग्‍धों- डे‍मियन सैंडरसन और माइल्‍स सैंडरसन की तस्‍वीरें जारी की हैं। दोनों काले रंग की एक कार में घूमते हुए वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस की असिस्‍टेंट कमिश्‍नर रोंडा ब्‍लैकमोर ने कहा कि पहली घटना की जानकारी स्‍थानीय समयानुसार सुबह 5.40 बजे मिली। सस्‍काचुवान में ही कम से कम 13 जगहों पर पीड़‍ित मिले हैं। ब्‍लैकमोर ने कहा कि यह हाल के वर्षों की बड़ी घटना है। रविवार को हिंसा के चलते 'सिविल इमरजेंसी' लागू कर दी गई है। जैम्स स्मिथ क्री नेशन (James Smith Cree Nation) और वेल्डन (Weldon) इलाके में ये हमले हुए हैं. पुलिस (Canada Police) को दो संदिग्धों की तलाश है जिन संदिग्धों की तस्वीरें जारी की हैं उनके नाम डेमियन सैंडरसन और माइल्स सैंडरसन हैं. दोनों ने काले रंग की कार में घूमते हुए वारदात को अंजाम दिया है. रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस की असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर रोंडा ब्लैकमोर ने बताया कि पहली घटना की जानकारी स्थानीय समय सुबह 5 बजकर 40 मिनट पर मिली. सस्केचेवान में कम से कम 13 जगहों पर पीड़ित मिले हैं.पुलिस कमिश्नर रोंडा ब्लैकमोर ने बताया कि ये हाल के सालों में हुई सबसे बड़ी घटना है. रविवार को हिंसा के चलते सिविल इमरजेंसी लागू कर दी गई है. ब्लैकमोर ने दोनों संदिग्धों को दिए संदेश में कहा कि अगर डेमियन और माइल्स सुन रहे हैं या सूचना पाते हैं तो वो खुद को फौरन पुलिस के हवाले कर दें. तो वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस घटना को भयावह बताया है.

 

भारत को रूस से निर्धारित समय पर मिलेगा एस-400 मिसाइल सिस्टम?

05-Sep-2022

 

नई दिल्ली, (S-400 Missile System): भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि भारत को तय समय से एस-400 मिसाइल सिस्टम उपलब्ध करवाया जाएगा। अलीपोव की यह टिप्पणी तब आई है, जब कहा जा रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सैन्य प्रणालियों व उपकरणों की आपूर्ति में विलंब हो सकता है।

सहयोग सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्ष प्रतिबद्ध
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति निर्धारित समय के अनुसार सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है और रक्षा क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्ष एक दूसरे के साथ हैं। अलीपोव ने यह भी कहा कि दोनों देश परस्पर निरंतर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए काफी तत्पर हैं। रक्षा सहयोग में पैदा होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए दोनों प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं।

नई वास्तविकताओं को समायोजित करने में हम कामयाब
अलीपोव ने बताया कि रक्षा सहयोग रूसी-भारतीय विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा, दोनों देश यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत प्रेरित हैं कि यह निर्बाध बना रहें। रूसी राजदूत ने कहा, हम नकारात्मक बाहरी कारकों द्वारा बनाई गई बाधाओं को सफलतापूर्वक कम करने और वैकल्पिक भुगतान व रसद विकल्पों का उपयोग करके नई वास्तविकताओं को समायोजित करने में कामयाब रहे हैं। गौरतलब है कि रूस निर्मित एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।

पांच बिलियन अमेरिकी डॉलर के करार पर दस्तखत
अलीपोव ने कहा, अक्टूबर 2018 में, भारत ने एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की पांच इकाइयों को खरीदने के मकसद से रूस के साथ पांच बिलियन अमेरिकी डॉलर के करार पर दस्तखत किए थे। बता दें कि रूस ने पिछले साल दिसंबर में मिसाइल की पहली खेप के साथ इस सिस्टम की डिलीवरी शुरू कर दी है।

उत्तरी सेक्टर में तैनात की गई है पहली खेप
पहली खेप भारत पहुंचने के बाद इसे देश के उत्तरी सेक्टर में चीन से सटी सीमा के कुछ भागों के साथ-साथ पाकिस्तान सीमा को कवर करने के लिए तैनात किया गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल्द रूस की ओर से भारत को दूसरी खेप की डिलीवरी करवाई जा सकती है, क्योंकि मास्को ने डिलीवरी की तैयारी तबरीबन पूरी कर ली है।


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