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चीन में माता-पिता को मिलेगी बच्चों के अपराध की सजा, कानून लाने की तैयार में संसद

19-Oct-2021

चीन ने बच्चों को अपराध की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत बच्चों के अपराध या बुरे बर्ताव के लिए उनके माता-पिता को दंडित किया जाएगा। इतना ही नहीं बच्चों के अपराध करते या बुरा बर्ताव करते पकड़े जाने पर माता-पिता को परिवार शिक्षा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा जाएगा। वहां उन्हें बच्चों की बेहतर परवरिश करना सिखाया जाएगा। इसके लिए चीनी संसद एक विशेष कानून लाने की तैयारी कर रही है।

परिवार में व्यावहारिक शिक्षा का अभाव
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता जेंग ताइवे के अनुसार, किसी नाबालिग बच्चे के बुरा व्यवहार करने के बहुत से कारण होते हैं। लेकिन सबसे बड़ा कारण परिवार में व्यावहारिक शिक्षा का अभाव होता है। इसी सप्ताह संसद की स्थायी समिति विधेयक के मसौदे की समीक्षा करेगी।
उसकी स्वीकृति के बाद प्रारूप को विधेयक के रूप में संसद के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि माता-पिता किस तरह से बच्चों के आराम, खेलने और व्यायाम के लिए समय सुनिश्चित करें।

बच्चों को बुरी चीजों की लत से बचाने पर जोर
सरकार इस साल से बच्चों को बुरी चीजों की लत से बचाव के लिए कई कदम उठा रही है।
बच्चों में ऑनलाइन गेम की लत को कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसे अफीम की तरह नशा कहा गया है।
शिक्षा मंत्रालय ने इंटरनेट गेमिंग के घंटे सीमित किए हैं।
बच्चों को शुक्रवार, शनिवार और रविवार को एक-एक घंटे ही इंटरनेट गेम खेलने की अनुमति है।
इंटरनेट के सेलिब्रिटी की भगवान जैसी पूजा और बच्चों में उनका असर कम करने की कोशिश भी की जा रही है।

बच्चों को लेकर हो जाएं सतर्क, US में 7 दिनों में 2.5 लाख मासूम कोरोना संक्रमित

10-Sep-2021

इंडिया  में बड़ी संख्या में बच्चे वायरल का शिकार हैं और उनके ऑक्सीजन लेवल में कमी आने से पैरेंट्स परेशान हो रहे हैं। हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों के ऑक्सीजन लेवल में उतार-चढ़ाव आता ही है। इसका कारण यह है कि ऑक्सीमीटर उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक से नहीं नाप पाता है। उनकी उंगलियों का छोटा होना भी इसका एक कारण है। ऐसे में पैरेंट्स को डरने नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो और तीन दिन से अधिक तेज बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

तीसरी लहर में भारतीय बच्चों को लेकर जताई गई आशंका अमेरिकी बच्चों पर सच साबित होती दिख रही है। यहां बच्चों पर कोरोना का कहर टूट पड़ा है। इस समय अमेरिका के अस्पतालों में कुल 2396 कोरोना संक्रमित बच्चे भर्ती हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड है। यही नहीं, बीते एक सप्ताह के दौरान बच्चों में संक्रमण के 2.5 लाख से ज्यादा मामले सामने आए और ये भी अपने आप में रिकॉर्ड है। महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक एक हफ्ते में बच्चों के संक्रमित होने की यह सर्वाधिक संख्या है।

अगस्त, 2020 से अब तक अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या 55 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक 6 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में प्रतिदिन 369 से अधिक संक्रमित बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि विशेषज्ञ बच्चों के संक्रमित होने का एक मात्र कारण स्कूल खुलने को नहीं मान रहे हैं। इसलिए देशभर में डेल्टा वेरिएंट के कहर को देखते हुए संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है।

चीन में नए कानून को मिली मंजूरी, अब पैदा कर सकेंगे 3 बच्चे

01-Sep-2021

चीन। बूढ़ी होती आबादी और जनसंख्या बढ़ने की धीमी रफ्तार से चिंतित चीन ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है।  चीन में अब कपल तीन बच्चे पैदा कर सकेंगे।  सरकार इसके लिए नया कानून लेकर आई है।  चीन की राष्ट्रीय विधायिका ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लाई गई तीन बच्चों की नीति का शुक्रवार को औपचारिक रूप से समर्थन किया।  सोमवार को लिए गए फैसले के मुताबिक, अब चीन में कोई कपल तीन बच्चे पैदा कर सकेगा।  पहले चीन में सिर्फ दो बच्चे पैदा करने की इजाजत थी।

दरअसल, हाल ही में चीन ने अपने जनसंख्या के आंकड़े जारी किए थे।  इसके मुताबिक, पिछले दशक में चीन में बच्चों के पैदा होने की रफ्तार का औसत सबसे कम था।  इसका मुख्य कारण चीन की टू-चाइल्ड पॉलिसी को बताया गया।   आंकड़ों के मुताबिक, 2010 से 2020 के बीच चीन में जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार 0। 53% थी।  जबकि साल 2000 से 2010 के बीच ये रफ्तार 0। 57% पर थी।  यानी पिछले दो दशकों में चीन में जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार कम हो गई है।  इतना ही नहीं, आंकड़ों में बताया गया कि साल 2020 में चीन में सिर्फ 12 मिलियन बच्चे पैदा हुए, जबकि 2016 में ये आंकड़ा 18 मिलियन था।  यानी चीन में साल 1960 के बाद बच्चों के पैदा होने की संख्या भी सबसे कम पर पहुंची।

सरकारी चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, नया कानून कहता है कि देश परिवारों के बोझ को कम करने के लिए वित्त, कर, बीमा, शिक्षा, आवास और रोजगार सहित सहायक उपाय करेगा।  इस साल मई मे सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) ने सभी जोड़ों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति देने के लिए अपनी सख्त दो-बच्चों की नीति में ढील दी थी।  चीन ने 2016 में दशकों पुरानी एक-बाल नीति को खत्म करते हुए सभी जोड़ों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी।  नीति निर्माताओं ने इसे देश में जनसांख्यिकीय संकट के लिए दोषी ठहराया था।

बच्चों की सेहत बनाने को लेकर कड़ा नियम, सप्ताह में तीन घंटे ही खेल सकेंगे ऑनलाइन गेम

31-Aug-2021

घर में बैठे-बैठे ऑनलाइन गेम खेलने की लत से बच्चों की सेहत न खराब हो, इसके लिए चीन ने गाइडलाइंस तय कर दी हैं। अब देश में बच्चे एक सप्ताह में तीन घंटे ही ऑनलाइन गेम्स खेल सकेंगे। यह नियम 18 साल से कम आयु वालों के लिए बनाया गया है। सरकार का कहना है कि बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत को सही रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन गेम्स कंपनियां अब बच्चों को सिर्फ शुक्रवार, शनिवार और रविवार को ही एक-एक घंटे के लिए ऑनलाइन गेम की सुविधा दे सकेंगे।

देश में टेक्नोलॉजी कंपनियों पर चीन सरकार की ओर से सख्ती के बीच यह कदम उठाया गया है। हाल ही में देश की दिग्गज टेक कंपनी टेंसेंट ने सरकार की ओर से लागू किए गए नियमों को अपनाया है। हाल ही में सरकार की ओर से ऑनलाइन गेम्स को लेकर कहा गया था कि यह अफीम की तरह है। उसके बाद से ही ऑनलाइन गेम्स कंपनियों पर सख्ती शुरू कर दी गई है।

ओलंपिक गेम्स में दूसरे नंबर पर रहने वाले चीन का यह कदम भले ही कड़ा हो, लेकिन बच्चों की शिक्षा और सेहत के लिहाज से अहम है। फिजिकल गेम्स से दूर होकर ऑनलाइन गेम्स में बिजी रहने के चलते बच्चों की सेहत पर असर पड़ने को लेकर असर चिंताएं जाती रही हैं। ऐसे में चीन सरकार का यह कदम वाजिब मालूम पड़ता है। बता दें कि चीन बच्चों के जन्म से लेकर अन्य तमाम मसलों पर कड़े नियमों के लिए चर्चित रहा है।

तालिबान की असलियत आई सामने, एक साथ नहीं पढ़ सकेंगे लड़के-लड़कियां

30-Aug-2021

अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन लागू होने के बाद अब तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उच्च शिक्षा मंत्रालय के कार्यवाहक मंत्री के रूप में नियुक्त किए गए अब्दुल बकी हक्कानी ने ऐलान किया है कि अब से स्कूलों में लड़के और लड़कियां अलग-अलग पढ़ाई करेंगे। उन्होंने कहा कि नई सरकार में जल्द ही स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग क्लासरुम की व्यवस्था की जाएगी। पश्चिमी सेनाओं के निकलने के पहले ही 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले तालिबान ने कहा है कि देश में लड़कियां यूनिवर्सिटी में पढ़ पाएंगी लेकिन वे लड़कों के साथ बैठकर नहीं पढ़ पाएंगी।  पिछली बार जब तालिबान सत्ता में आया था तो उसने लड़कियों के पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

उच्च शिक्षा के लिए कार्यवाहक मंत्री अब्दुल बकी हक्कानी के मुताबिक, "अफगानिस्तान के लोग शरिया कानून के मुताबिक पढ़ाई जारी रखेंगे।  लड़के और लड़कियां अलग-अलग वातावरण में पढ़ेंगे। "

उन्होंने कहा कि तालिबान "एक उचित और इस्लामी पाठ्यक्रम बनाना चाहता है जो हमारे इस्लामी, राष्ट्रीय और ऐतिहासिक मूल्यों के अनुरूप हो और दूसरी ओर अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो। "

लड़कियों और लड़कों को भी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अलग किया जाएगा जो कि पहले से ही गंभीर रूढ़िवादी अफगानिस्तान में आम था।

तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों में हुई प्रगति का सम्मान करने का वचन दिया है, लेकिन सिर्फ इस्लामी कानून की उनकी सख्त व्याख्या के मुताबिक।  सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महिलाएं काम कर सकती हैं, सभी स्तरों पर शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं और पुरुषों के साथ घुलने-मिलने में सक्षम हो सकती हैं।

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के अधिकारियों से बात करते हुए हक्कानी ने कहा कि अफगानिस्तान में लड़कियों को पढ़ने का अधिकार दिया जाएगा लेकिन वह लड़कों के साथ एक ही क्लासरुम में नहीं पढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि नई सरकार में महिलाओं के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। नए कार्यवाहक शिक्षा मंत्री ने कहा कि जल्द ही फिर से यूनिवर्सिटी खोली जाएंगी और लोगों की सैलेरी का भुगतान भी किया जाएगा।

Tourism Update: विदेश घूमने का है प्लान, तो इन भव्य मंदिरों में जरूर करें भगवान के दर्शन, दुनियाभर से आते हैं लोग

28-Aug-2021

कला और संस्कृति के देश भारत 'मंदिरों का देश' भी है, क्योंकि यहां देवी-देवताओं के हजारों मंदिर (Temple) हैं।  भारत के प्राचीन से लेकर नए मंदिर दुनियाभर के भक्तों के आकर्षण का केंद्र हैं।  लेकिन भारत ही नहीं यहां से बाहर विदेशों में भी हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं।  और ये सभी मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं।  दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।  आइए जानते हैं विदेशों में मौजूद इन भव्य मंदिरों के बारे में, जिन्हें देखकर शायद आप भी इनके दर्शन के लिए प्लान बनाएंगे।

मुन्नेस्वरम मंदिर, श्रीलंका  (Mukteswaram Temple)

श्रीलंका के मुन्नेस्वर गांव में स्थित यह एक भव्य और विशाल मंदिर है, जिसके परिसर में कुल पांच मंदिर हैं। इसमें भगवान शिव और मां काली का भी मंदिर है। मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद इसी जगह पर भगवान शिव की आराधना की थी। इसलिए इस मंदिर को बेहद ही खास माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं। 

पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल (Pashupatinath Temple Nepal )

भारत से करीबी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर (Pashupatinath Temple Nepal ) दुनिया के कुछ सबसे प्राचीन हिंदू मंदिरों में से एक है।  यहां भगवान शिव के पशुपति रूप की पूजा की जाती है।  यूनेस्को (UNESCO ) ने इस मंदिर को विश्व विरासत स्थल का दर्जा भी दिया है। हर साल भारत के लाखों भक्त यहाँ भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं।  

मुरूगन टेंपल, ऑस्ट्रेलिया  (Murgan temple)

ऑस्ट्रेलिया की राजधानी सिडनी में स्थित इस भव्य मंदिर में भगवान मुरूगन विराजमान हैं। चूंकि भगवान मुरुगन को पहाड़ों का देवता माना जाता है, इसलिए इस मंदिर को भी न्यू साउथ वेल्स के पहाड़ों पर बनवाया गया है। सिडनी में रहने वाले हिंदू लोगों को इस मंदिर और भगवान के प्रति आस्था है। अगर आप कभी सिडनी जाएं तो  मुरूगन टेंपल जरूर जाएं। 

साइकिल पर पिज्जा डिलीवरी करने को मजबूर अफगानिस्तान के पूर्व आईटी मंत्री, सामने आईं बेबसी की तस्वीरें, बताई वजह

25-Aug-2021

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद नेताओं में भी दहशत का माहौल बना हुआ है। कई नेता काबुल छोड़कर दूसरे देश में शरण ले रहे हैं। इसी क्रम में अफगानिस्तान के पूर्व आईटी मंत्री सैयद अहमद शाह सादत भी जर्मनी में शरण लेने को मजबूर हो गए। सादत ने यहां रहने का तो प्रबंध कर लिया लेकिन रोजी-रोटी के लिए साइकिल पर पिज्जा डिलीवरी करने को मजबूर हैं। अहमद शाह सादत ने भी अफगानिस्तान सरकार से मतभेद के बाद अफगानिस्तान को छोड़ा दिया था और शुरूआत में किसी को नहीं पता था कि वो अफगानिस्तान से निकलकर कहां गये हैं। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि वो जर्मनी में हैं और पैसे कमाने के लिए एक पिज्जा बेचने की दुकान में काम कर रहे हैं।

आपको बता दें कि आज जर्मनी में पिज्जा बेचने को मजबूर अहमद शाह सादत एक साल पहले तक अफगानिस्तान सरकार में आईटी एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर थे और एक वक्त अफगानिस्तान की राजनीति में उनका काफी दबदबा हुआ करता था। लेकिन, अब वो जर्मनी के लिपजिंग शहर में पिज्जा की होम डिलीवरी कर रहे हैं। एक वक्त जर्मनी में कई ओहदों को संभाल चुके अहमद शाह सादत को हालांकि, पिज्जा डिलीवरी बॉय कहने में शर्म नहीं आती है और वो अपनी स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं।

हालांकि, इस बात का पता अभी तक नहीं चल पाया है कि क्या वो वास्तव में इतने गरीब हो चुके हैं कि उनके पास पिज्जा डिलीवरी करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

जर्मनी के एक पत्रकार ने अहमद शाह सादत की तस्वीर को सोशल मीडिया पर सबसे पहले शेयर किया और फिर वो फोटो जमकर वायरल हो गया। इसके साथ ही जर्मन पत्रकार ने अफगानिस्तान के पूर्व मंत्री अहमद शाह सादत से बात भी की, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान के मुद्दे और अपनी माली हालत के बारे में बेबाकी से बात की है। उन्होंने कहा कि पिछले साल के अंत में उन्होंने अफगानिस्तान सरकार से अपना इस्तीफा दे दिया था और फिर वो जर्मनी आ गये थे।

अहमद शाह सादत ने जर्मनी पत्रकार को दिए इंटरव्यू के दौरान बताया कि जर्मनी आने के बाद कुछ समय तक तो उनके पास जमा किया हुआ पैसा था, लेकिन धीरे-धीरे पैसे खत्म होने लगे तो उन्होंने जीवनयापन करने के लिए कोई काम करने की सोची और उन्होंने पिज्जा डिलीवरी बॉय का काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा कि अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला उन्होंने इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि अब तालिबान को काबुल आने से कोई नहीं रोक सकता है।

अफगानिस्तान में बुर्के के दाम में दोगुनी वृद्धि, जींस पर बैन

25-Aug-2021

तालिबानी (Taliban) लड़ाके कथित तौर पर अफगान नागरिकों (Afghan Civilians) को जींस (Jeans) जैसे ‘पश्चिमी’ कपड़े पहनने के लिए सड़कों पर कोड़े मार रहे हैं. अफगानिस्तान (Afghanistan) में वापसी के बाद से ही तालिबान लोगों के साथ क्रूर व्यवहार कर रहा है. कई युवा अफगानों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उन्हें इस्लाम का अनादर करने का आरोप लगाकर जींस पहनने पर तालिबानी लड़ाकों द्वारा पीटा गया. एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि ये लड़के काबुल (Kabul) में दोस्तों के साथ घूम रहे थे. इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन्हें पकड़ लिया. लड़कों ने कहा कि उनके दो दोस्त घटनास्थल से भाग गए. लेकिन उन्हें गनप्वाइंट पर रोक लिया गया और सड़क पर पटक दिया गया और कोड़े मारे गए. तालिबान के एक अधिकारी ने स्थानीय समाचार पत्र एतिलाट्रोज को बताया कि संगठन अभी भी पुरुषों के लिए ड्रेस कोड पर फैसला कर रहा है. एक तालिबानी ने बताया कि हम पुरुषों के लिए भी ड्रेस कोड पर चर्चा कर रहे हैं। 90 के दशक में तालिबानी शासन के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक कपड़े जबकि महिलाओं और आठ साल तक की लड़कियों के लिए बुर्का पहनना अनिवार्य था। लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि तालिबान ‘पश्चिमी’ कपड़ों की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं है, जो पारंपरिक ‘अफगान पोशाक’ से हटकर हैं. इस बीच, टेलीग्राफ ने बताया कि अफगानिस्तान में बुर्के की बिक्री में तेजी आई। जिसके चलते बुर्के के दाम दोगुने हुए। जींस पहनने पर यहां लोगों की पिटाई की जा रही है।

खुद पहन रहे चश्मे-बूट, दूसरों के लिए ड्रेस कोड पर बातचीत

तालिबान के एक लड़ाके ने स्थानीय अखबार एतिलात्रोज को बताया कि हम पुरुषों के लिए भी ड्रेस कोड पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि द टेलीग्राफ की रिपोर्ट का दावा है कि तालिबान पश्चिमी सभ्यता के कपड़ों को मान्यता नहीं देगा। वहीं दूसरी तरफ अफगानिसन से आए फोटो और वीडियो में लड़ाकों को चश्मे, टोपी, बूट जैसे पश्चिमी पहनावे में देखा जा रहा है।

Afghanistan : तालिबान के खिलाफ बगावत के लिए उठी बंदूकें, अफगान के बलगान प्रांत में 300 तालिबानियों को मार गिराया

23-Aug-2021

अफगानिस्तान का एकमात्र इलाका पंजशीर जो कि तालिबान के कब्जे से बाहर है, अब तालिबानी आतंकी पंजशीर की तरफ बढ़ रहे हैं।  कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने इसे तालिबान का आत्मघाती कदम बताया है।  सालेह का दावा है कि पंजशीर की तरफ जाने वाले सलांग हाइवे को बंद कर दिया गया है।  

अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक बागलान की लड़ाई में 300 से ज्यादा तालिबानी लड़ाके मारे गए।  तालिबानी बागलान में 30 से ज्यादा हथियारबंद वाहन, लैंडमाइन और हथियार छोड़कर काबुल भाग गए हैं।  ये बागलान के जिले दिह सलाह में नार्दन एलायंस की जीत के बाद की हैं जहां गाड़ियों पर पूरी शान से अफगानिस्तान का झंडा लहरा रहा है।  यह भी जानकारी आयी है कि तालिबान लड़ाकों को बगलान में कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।  अफगानिस्तान के उत्तरी बलगान प्रांत के तीन जिलों से तालिबान को बाहर खदेड़ दिया गया है।  विद्रोहियों ने देह सलाह, पुल-ए-हिसार और बानू को तालिबानी लड़ाकों के कब्जे से मुक्त करा दिया था।  हालांकि बाद में फिर से तालिबानियों ने बानू पर कब्जा कर लिया।

काबुल से बागलान की दूरी करीब 263 किलोमीटर दूर है।  यहां तालिबानियों को मिली हार की धमक काबुल की सत्ता पर कब्जा कर चुके तालिबानी आतंकियों को डरा रही होगी।  इसी तरह नॉर्दन एलायंस की इस जीत के बाद अफगान लोकतंत्र के मुरीदों ने जो नारे लगाए वो पूरे अफगानिस्तान में उम्मीद के जयघोष का इकरार बन गया।

तालिबान अच्छी तरह जानता है कि पंजशीर पर कब्जे के बिना अफगानिस्तान पर शासन करना आसान काम नहीं है।  तालिबान किसी भी तरह इस प्रांत पर कब्जा करना चाहता है।  लेकिन इतिहास गवाह है कि पंजशीर में तालिबानियों की एक नहीं चलती है।  यह इकलौता ऐसा प्रांत हैं जहां जाने से आज भी तालिबानी डरते हैं।  हालांकि मसूद ने कहा कि वह तालिबान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।

अफगानिस्तान से अपने लोगों को बाहर निकाल रहीं महाशक्तियां, यूएन में भारत ने जताई चिंता

17-Aug-2021

संकटग्रस्त अफगानिस्तान से अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने अपने राजनयिकों व लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। नेपाल ने अपने लोगों को निकालने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मदद मांगी। दूसरी ओर, अफगानिस्तान संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने चिंता जताई और कहा- आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाए। बता दें तालिबान संकट से पहले भारत अफगानिस्तान में करीब 30 से ज्यादा प्रांतों में विकास परियोजनाएं चला रहा था।

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अब पूरी दुनिया की नज़र वहां के हालातों पर टिकी है। भारत ने 120 भारतीयों को काबुल ने निकाला है। उनको लेकर ग्लोबमास्टर प्लेन हिंडन एयरबेस पर लैंड हुआ। बीते दिन भी कुछ लोगों को बाहर निकाला गया था।

काबुल एयरपोर्ट और आसपास फंसे करीब 500 भारतीयोंं को यही डर सता रहा है कि अमेरिकी सेना के निकल गई तो उन्हें यहां से निकलना मुश्किल हो जाएगा। अनुराग के साथ प्रकाश तमांग की शिकायत है कि भारत सरकार ने हमारे लिए जो हेल्पालइन नंबर +919717785379 और ईमेल आईडी MEAHelpdeskIndia@gmail।com जारी की है, उस पर कोई जवाब नहीं आ रहा। उनका कहना है कि बीते तीन दिनों से काबुल स्थित भारतीय दूतावास के फोन भी नहीं उठाए जा रहे हैं। सभी ने अपने-अपने नागरिकों को वहां से निकाल लिया, लेकिन भारत ने वो तत्परता नहीं दिखाई। परिणाम यह है कि आज भी कई भारतीय अफगानिस्तान में फंसे हैं। अनिश्चितता और असुरक्षा के माहौल में उन भारतीयों का एक-एक पल किस तरह कट रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल नहीं हैं।

अफगान संकट पर चर्चा के लिए पीएम आवास पर बड़ी बैठक हो रही है। इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और एनएसए अजित डोभाल मौजूद हैं। यहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी हैं।

महात्मा गांधी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देगा अमेरिका, संसद में दोबारा पेश किया गया प्रस्ताव

14-Aug-2021

महात्मा गांधी को अमेरिका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलेगा। इस संबंध में अमेरिकी संसद में एक बार फिर प्रस्ताव पेश किया गया, जो न्यूयॉर्क के एक सांसद ने दिया। उन्होंने शांति और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी को कांग्रेस के स्वर्ण पदक से सम्मानित करने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कल पेश किया। महात्मा गांधी अमेरिकी कांग्रेस का स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले पहले भारतीय होंगे। कांग्रेसनल गोल्ड मेडल संयुक्त राज्य में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। कांग्रेस महिला कैरोलिन बी मैलोनी ने एक प्रस्ताव पेश करने के बाद कहा- “”महात्मा गांधी के ऐतिहासिक सत्याग्रह, अहिंसक प्रतिरोध के आंदोलन ने राष्ट्र और दुनिया को प्रेरित किया। उनका उदाहरण हमें दूसरों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने के लिए उत्साहित करता है”।

आगे मैलोनी कहा- “उनकी विरासत ने नस्लीय समानता के लिए जिसमें मार्टिन लूथर किंग जूनियर के आंदोलन से लेकर नेल्सन मंडेला की रंगभेद के खिलाफ लड़ाई तक, दुनिया भर में नागरिक अधिकार आंदोलनों को प्रेरित किया। एक जनसेवक के रूप में मैं उनके साहस और उदाहरण से प्रतिदिन प्रेरित होता हूं। आइए हम सभी गांधी के रास्ते पर चले और वह परिवर्तन करें, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं”।

अमेरिकी सांसद कैरोलिन बी मैलोनी ने दावा किया वो 2019 कांग्रेसनल गोल्ड मेडल महात्मा गांधी को मिले, इसके लिए वो काम कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे पहले नेल्सन मंडेला और मार्टिन लीथर किंग को कांग्रेसनल गोल्ड मेडल मिल चुका है। ये बापू के रास्ते पर चले और उन्हें ये मेडल मिला तो जिस गांधी से प्रभावित होकर मंडेला और मार्टिन लूथर ने इतना महान काम किया उन्हें तो ये सम्मान जरूर मिलना चाहिए।

WhatsApp पर अब कभी मिस नहीं होगी Group Video Call! जानें कैसे इस्तेमाल करें नया फीचर

12-Aug-2021

(Note: ध्यान रहे कि इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए आप वॉट्सऐप का लेटेस्ट वर्जन इस्तेमाल कर रहे हो। आइए जानते हैं कैसे WhatsApp पर मिस्ड ग्रुप कॉल को join किया जाता है।)

कई बार हमें ग्रुप Video/Voice की आई कॉल मिस हो जाती है और हमें उस कॉल के मेंबर से खुद को फिर से ऐड करने के लिए कहना पड़ता है, लेकिन नए फीचर के आने के बाद इस मिस्ड कॉल को यूज़र अपने हिसाब से जॉइन कर सकेंगे।

WhatsApp ने हाल ही में नया फीचर Joinable Calls लॉन्च किया है। इस नए फीचर से यूज़र्स चल रही वीडियो कॉल को भी जॉइन कर सकते हैं। जॉइनेबल कॉल फीचर का मकसद है कि यूज़र्स अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के कॉल को मिस न करें। इस फीचर के तहत यूज़र चल रही कॉल को छोड़ कर दोबारा फिर से जॉइन भी कर सकते हैं। यूज़र्स को उनके कॉल लॉग में ‘tap to join’ ऑप्शन मिलता है, जिसपर जाकर वह मिस्ट ग्रुप कॉल में जुड़ सकते हैं।

>>इसके लिए सबसे पहले WhatsApp ओपेन करें, और Calls पर टैप करें।

>>यहां आपकी कॉल लॉग के टॉप पर उस कॉल के लिए ‘tap to join’ ऑप्शन दिखेगा, जिस ग्रुप कॉल को आपने मिस कर दिया है।

>>Group कॉल पर टैप कर करें, और ग्रुप कॉल को इंटर करने के लिए Join पर प्रेस करें।

18 साल का लड़का होगा ब्लू ऑरिजिन की स्पेस फ्लाइट का पहला यात्री

16-Jul-2021

Youngest Astronaut : अमेजन के संस्थापक जैफ बेजोस (Jeff Bezos) की स्पेस कंपनी ब्लू ऑरिजिन (blue origin) की पहली यात्री उड़ान में उनके साथ पहले यात्री (passenger) के तौर पर एक 18 साल का लड़का अंतरिक्ष में जाएगा। इस फ्लाइट में उड़ान भरने के साथ ही यह लड़का दुनिया का सबसे कम उम्र का अंतरिक्ष यात्री (world youngest astronaut) होने का रिकॉर्ड बना लेगा। इससे पहले सबसे कम उम्र के अंतरिक्ष यात्री का रिकॉर्ड विघटित हो चुके सोवियत संघ के जी. तितोव (G. Titov) के नाम पर था, जिसने अपने ही देश के दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन के चार महीने बाद 25 साल की उम्र में पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरी थी।

ब्लू ऑरिजिन ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि 2.8 करोड़ डॉलर की नीलामी के विजेता के बजाय जैफ बेजोस (Jeff Bezos) के साथ आगामी मंगलवार को 18 वर्षीय ओलिवर डाएमन (Oliver Damon) उड़ान भरेंगे। कंपनी ने कहा कि नीदरलैंड (Netherlands) निवासी डाएमन नीलामी में उपविजेता थे और अब वह अंतरिक्ष (Space) में जाने के लिए टिकट का भुगतान करने वाले पहले यात्री बनेंगे। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि डाएमन कितना पैसा चुकाने वाले हैं। डाएमन ने एक डच ब्रॉडकास्टर की तरफ से पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, मैं जीरो-जी और दुनिया को ऊपर से देखने के अनुभव के बारे में सोचकर बेहद उत्साहित हो रहा हूं।

हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि डाएमन कितना पैसा चुकाने वाले हैं। डाएमन ने एक डच ब्रॉडकास्टर की तरफ से पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, मैं जीरो-जी और दुनिया को ऊपर से देखने के अनुभव के बारे में सोचकर बेहद उत्साहित हो रहा हूं।

ब्लू ऑरिजिन के मुताबिक, एक निजी इक्विटी फर्म के सीईओ जोस डाएमन के बेटे ओलिवर डाएमन पिछले साल हाईस्कूल करने के बाद पायलट की ट्रेनिंग ले चुके हैं। वह और उनके पिता अमेरिका में अंतरिक्ष में जाने का प्रशिक्षण भी पूरा कर चुके हैं।

ब्लू ऑरिजिन के मुताबिक, 10 मिनट की इस उड़ान में बेजोस और डाएमन के अलावा दो अन्य यात्री भी होंगे। ये यात्री बेजोस के भाई मार्क और 1960 के दशक में नासा के मर्क्यूरी-7 अंतरिक्ष यान के लिए चुनी गई 13 पायलटों में से एक वॉली फंक रहेंगी। फंक को नासा ने बाद में महिला होने के चलते इस अभियान से अलग कर दिया था।

हैती के राष्ट्रपति की घर में घुसकर हत्या, हत्या के बाद हैती में अशांति का माहौल, सरकार ने अमेरिका से रक्षा करने को लगाई गुहार

14-Jul-2021

कैरेबियाई देश हैती में हमलावरों द्वारा वहां के राष्ट्रपति जोवेनेल मोइज की घर में घुसकर हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस हमले में देश की प्रथम महिला और उनकी पत्नी भी घायल हो गई। उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई ज रही है। इस घटना की पुष्टि देश के अंतरिम प्रधानमंत्री क्लॉड जोसेफ ने की है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है।

अमेरिकी कांग्रेस के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि शब्द “सैनिकों” के लिए फ्रांसीसी शब्द “पुलिस” भी हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अनुरोध में हैती के एयरपोर्ट और बंदरगाहों के साथ-साथ इसके गैसोलीन भंडार की रक्षा करने वाले अमेरिकी सैनिकों को शामिल किया जा सकता है, जिसने पहली बार जमीन पर अमेरिकी सैनिकों की क्षमता की सूचना दी थी। एफबीआई ने एक बयान में कहा कि हैती सरकार ने राष्ट्रपति मोइस की हत्या की जांच के लिए अमेरिकी सहायता का अनुरोध किया। फिलहाल एफबीआई हैती में अमेरिकी दूतावास के सहारे यह निर्धारित कर रही है कि हम इस प्रयास का सर्वोत्तम समर्थन कैसे कर सकते हैं।

इसी बीच हैती में बाहरी सुरक्षा बलों के लिए अनुरोध मानवाधिकार समूहों और के अधिवक्ताओं के लिए चिंता बढ़ा रहा है। हाईटियन ब्रिज एलायंस के कार्यकारी निदेशक गुएरलाइन जोज़ेफ़ ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें हैती में ‘सुरक्षा’ प्रदान करने के लिए बाहरी ताकतों की आवश्यकता है। हम जानते हैं और हमारे पास संयुक्त राष्ट्र बलों का इतिहास और उन सभी के बाद का इतिहास है।’ 1915 में हैती के राष्ट्रपति की हत्या के बाद 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका ने लगभग दो दशकों तक हैती पर कब्जा कर लिया था। कब्जे का विरोध करने वाले कम से कम 15 हजार हैती नागरिक मारे गए थे।

USA के 36 राज्यों और वाशिंगटन डीसी ने गूगल के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

09-Jul-2021

नई दिल्ली,इंडिया। अमेरिका के 36 राज्यों और वाशिंगटन डीसी ने गूगल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि गूगल का एंड्रॉइड ऐप स्टोर पर नियंत्रण एकाधिकार विरोधी कानूनों का उल्लंघन करता है। गूगल प्ले स्टोर में कुछ खास अनुबंधों और अन्य प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण के जरिए गूगल ने एंड्रॉइड उपकरण उपयोगकर्ताओं को मजबूत प्रतिस्पर्धा से वंचित किया। वर्चस्व के गलत इस्तेमाल से अरबों डॉलर कमाने वाली ये दिग्गज कंपनी लाखों छोटे व्यवसाय खत्म कर रही है।

इसमें आगे कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपयोगकर्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकते हैं और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, जबकि मोबाइल ऐप की कीमतों में भी कमी आ सकती है।

न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल जेम्स और उनके साथियों ने गूगल पर यह आरोप भी लगाया कि ऐप डेवलपर को अपनी डिजिटल सामग्री को गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से बेचने के लिए मजबूर किया जाता है और इसके लिए गूगल को अनिश्चित काल के लिए 30 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है।

जेम्स ने आरोप लगाया, ‘‘गूगल ने कई वर्षों तक इंटरनेट के गेटकीपर के रूप में काम किया है, लेकिन हाल ही में, यह हमारे डिजिटल उपकरणों का गेटकीपर भी बन गया है, जिसके चलते हम उन सभी सॉफ्टवेयर के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं, जिसका हम हर दिन उपयोग करते हैं।"''

जिस लैब से फैला कोरोना, उसी को अवॉर्ड देने की तैयारी में चीन

24-Jun-2021

चीन  ने दुनिया को कोरोना दिया है, आज वह खुद को अवार्ड के लिए अपना नाम दे रहा है। दुनिया को कोरोना देने के बाद चीन की यह सबसे बड़ी शर्मनाक हरकत मानी जा रही है। दरअसल चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

एकडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने कोरोना महामारी की रोकथाम और कोरोना वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। हालांकि वैश्विक स्तर पर यह माना जाता रहा है कि इस लैब से ही कोरोना वायरस विश्व में फैला था लेकिन चीन इस बात से इनकार करता रहा है।

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है।

इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 

चीन में नया कानून आने के बाद इस साल तलाक दर में 70% की गिरावट

21-May-2021

नागरिक मंत्रालय के मुताबिक, चीन में नया कानून आने के बाद इस साल तलाक दर में 70% की गिरावट आई। इस हफ्ते शुरुआती 3 महीनों में देशभर से तलाक के 2.96 लाख आवेदन आए। पिछले साल ये संख्या 10 लाख से ज्यादा थी। नए नियम के तहत तलाक के आवेदक जोड़ों को कूलिंग ऑफ पीरियड के अंतर्गत 30 दिन का समय दिया गया है। इससे भी कई मामले कम हुए।

तलाक को कई चरणों की प्रक्रिया बना दिया गया था। सबसे पहले, विवाह सलाहकारों से काउंसलिंग कराई जाती है। उन्हें 30 दिन दिए जाते हैं। अवधि पूरी होने के बाद पति - पत्नी को स्थानीय नागरिक मामलात ब्यूरो में जाकर तलाक के लिए दोबारा आवेदन देना होता है। 30-60 दिन के भीतर दोबारा आवेदन नहीं हुआ, तो तलाक की अर्जी खारिज हो जाती हैं।

यह है नया कानून

तलाक को कई चरणों की प्रक्रिया बना दिया गया था। सबसे पहले, विवाह सलाहकारों से काउंसलिंग कराई जाती है। उन्हें 30 दिन दिए जाते हैं। अवधि पूरी होने के बाद पति - पत्नी को स्थानीय नागरिक मामलात ब्यूरो में जाकर तलाक के लिए दोबारा आवेदन देना होता है। 30-60 दिन के भीतर दोबारा आवेदन नहीं हुआ, तो तलाक की अर्जी खारिज हो जाती हैं।

K P Sharma Oli फिर बने Nepal के Prime, सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने में नाकाम रहा विपक्ष

14-May-2021

नेपाल।  नेपाल में सियासी संकट के बीच एक बार फिर से बाजी पलट गई है। संसद में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाने के बावजूद केपी शर्मा ओली (Khadga Prasad Sharma Oli) ने फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल कर ली। जानकारी के मुताबिक गुरुवार को विपक्ष बहुमत हासिल करने में असफल रहा, जिसके चलते ओली को फिर से प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया। 

गुरुवार को रात नौ बजे का समय बीतने के बाद राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने केपी शर्मा ओली को एक बार फिर से देश का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। ऐसा उन्होंने देश के संविधान में प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किया। ओली आज फिर से शपथ लेंगे।

बता दें कि राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी ने ओली सरकार के विश्वास मत हासिल नहीं कर पाने के बाद विपक्ष दलों को गुरुवार तक नई सरकार का गठन करने के लिए आमंत्रित किया था। वहीं दूसरी ओर ओली को उम्मीद थी कि उनकी पार्टी बहुमत हासिल कर लेगी।

गौरतलब है कि 10 मई यानी बीते सोमवार को राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी के निर्देश पर संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के आहूत विशेष सत्र में प्रधानमंत्री ओली की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में उन्हें केवल 93 मत मिले, जबकि 124 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया था।

ओली को 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत जीतने के लिए 136 मतों की जरूरत थी, क्योंकि चार सदस्य इस समय निलंबित हैं। बता दें कि पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' नीत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद ओली सरकार अल्पमत में आ गई थी।

इसलिए पीएम ओली को निचले सदन में सोमवार को बहुमत साबित करना था। वहीं सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर प्रधानमंत्री के पक्ष में मतदान का अनुरोध किया था, लेकिन ओली को सफलता नहीं मिल सकी।


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