Saturday,28 May 2022   07:03 am
Previous123456789...8384Next

छत्तीसगढ़ के किसानों, कृषि मजदूरों, पशुपालकों और महिला समूहों को आज 1804.50 करोड़ रूपए की मिली सौगात

21-May-2022

रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आज छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों, भूमिहीन कृषि मजदूरों, पशुपालकों एवं समूह से जुड़ी महिलाओं को बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम से राज्य के 26 लाख 68 हजार से अधिक किसानों, भूमिहीन कृषि मजदूरों, पशुपालकों और गौठानों से जुड़ी समूह की महिलाओं को 1804 करोड़ 50 लाख रुपए की राशि का सीधे उनके बैंक खातों में अंतरण किया। यह कार्यक्रम राजधानी रायपुर से लेकर सभी जिला मुख्यालयों में एक साथ आयोजित हुआ।

छत्तीसगढ़ सरकार की सबके लिए न्याय की मंशा के अनुरूप राज्य में संचालित राजीव गांधी किसान न्याय योजना, राजीव गांधी ग्रामीण कृषि भूमिहीन मजदूर न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को राशि वितरण के इस कार्यक्रम में सभी जिलों से मंत्रिगण, संसदीय सचिव, विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि, किसान, मजदूर, समूह की महिलाएं और ग्रामीण जन ऑनलाइन शामिल हुए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत खरीफ वर्ष 2021-22 की पहली किस्त के रूप में किसानों को 1720 करोड़ 11 लाख रुपए, राजीव गांधी ग्रामीण कृषि भूमि मजदूर न्याय योजना के तहत 71 करोड़ 8 लाख रुपये तथा गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालकों, गौठान समितियों और महिला समूहों को 13 करोड़ 31 लाख रुपए ऑनलाइन अंतरित किया।

कभी गेहूं के लिए भारत को 'भिखारियों का मुल्क' बताया था अमेरिका ने, आज भारत से गेहूं के लिए लगा रहा गुहार!

20-May-2022

अभी यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से कई बड़े देशों में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक भारत को मुख्य आपूर्तिकर्ता के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन भारत ने कुछ विशेष मामलों में ही निर्यात का फैसला किया है। भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी।  निजी सेक्टर के निर्यात पर रोक लगा दी गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि, भारत ने ये फैसला इसलिए लिया है, ताकि देश में बढ़ रही गेहूं और आटे की बढ़ती कीमत को काबू में किया जा सके।

गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने से अमेरिका चिढ़ गया है। जर्मनी में हुई जी-7 देशों की मीटिंग में अमेरिका के कृषि सचिव टॉम विल्सैक ने कहा कि गेहूं तक पहुंच को बाधित कर रहा है। उन्होंने इसे 'गलत समय में गलत कदम' बताया है। विल्सैक ने कहा कि हमें एक ऐसे बाजार की जरूरत है, जो जरूरतमंद लोगों तक सामान पहुंचाने में मदद करे।

भारत के गेहूं के निर्यात पर रोक के फैसले पर अमेरिका आज नाराजगी जता रहा है, लेकिन कभी ऐसा वक्त भी था जब अमेरिका गेहूं के लिए भारत को धमकाता था। तब भारत गेहूं के लिए अमेरिका पर निर्भर हुआ करता था। पाकिस्तान के साथ 1965 की लड़ाई के समय अमेरिका ने भारत को गेहूं न देने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं, अमेरिका ने एक बार भारत को 'भिखारियों' का देश भी बताया था।

Good News! अब किसानों को प्रति एकड़ खेती के लिए मिलेंगे 8640 रूपए, यहां जानें पूरी खबर

16-May-2022

किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी रहती है। ये ही नहीं सरकार हमेशा अपनी कई योजनाओं के माध्यम से किसानों की आर्थिक तौर पर मदद भी करती रहती है। इसी क्रम में सरकार देश के किसानों को खाद-बीज के लिए हर साल खातों में पैसे भेजती है।

आपको बता दें कि, हर साल सरकार खाद-बीज (fertilizer seed) के लिए किसानों के खातों में लगभग 7840 रूपए भेजती है। लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने लोन की राशि में बढ़ोतरी की है। इस वर्ष किसानों को प्रति एकड़ खाद-बीज के लिए 8640 रुपए मिलेंगे।

10 हजार किसानों को मिला लोन
गौरतलब कि बात यह है कि, जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से हर साल किसानों को खेती करने के लिए कर्ज दिया जाता है। लेकिन बैंक से किसानों को यह कर्ज दो तरह से मिलता है। एक नगद राशि के तौर पर और दूसरा खाद-बीज के रूप में दिया जाता है। बैंक कर्ज की राशि को फसल बेचने के दौरान सोसायटियों में काट ली जाती है। ऐसा करने से किसानों पर भी किसी तरह को कोई बोझ नहीं आता है। इसे किसानों को कर्ज चुकता हो जाता है और वहीं खेती करने के लिए भी किसानों को पैसे भी मिल जाते हैं।

सहकारी बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले खरीफ सीजन (Kharif Season) में 60 हजार से अधिक किसानों को 2 अरब का कर्ज दिया गया था। इस साल भी किसानों की मदद के लिए ढाई अरब रुपए तक बांटने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन अब तक देश में केवल 10 हजार किसानों को ही कर्ज की धन राशि प्राप्त हुई है।

ऐसे मिलेगा लोन (How to get loan)
सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं बनाई है। इन्हीं में से एक किसान क्रेडिट कार्ड योजना (Kisan Credit Card Scheme) भी है। इस योजना के द्वारा किसानों की आर्थिक तौर पर मदद की जाती है। अगर आप किसान है और खेती करने के लिए कर्ज की तलाश कर रहे हैं, तो सरकार की इस योजना के माध्यम से आप सरलता से खेती के लिए कर्ज प्राप्त कर सकते हैं।

इसके लिए आपको अपने नजदीकी जिला सहकारी बैंक में संपर्क करना होगा। इसके अलावा आप अन्य राष्ट्रीयकृत निजी बैंकों (Nationalized private banks) के जरिए भी केसीसी लोन यानी खेती करने के लिए लोन प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि हर निजी बैंकों में कर्ज की राशि अलग-अलग होती है।

किसानों को बड़ी राहत: केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद की तिथि 31 मई तक बढ़ाई, जानें खाद्य मंत्री ने क्या कहा

16-May-2022

सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई, 2022 तक बढ़ा दिया है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी गेहूं किसान को असुविधा न हो। सरकार द्वारा बढ़ती कीमतों और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के कारण गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह घोषणा की गई है।

उपभोक्ता मामलों, खाद्य और वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति और बाजार मूल्य भी केंद्रीय पूल के तहत मौजूदा रबी विपणन सीजन 2022-23 के दौरान गेहूं की अनुमानित खरीद को प्रभावित कर सकते हैं।”

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के सचिव के जारी पत्र को बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे गेहूं उत्पादक राज्यों की सरकार के पास भेज दिया गया है। ऐसे में इन राज्यों के करोड़ों किसानों को गेहूं बेचने के लिए अब 15 दिन का वक्त और मिल गया है।

गौरतलब कि केंद्र सरकार के इस आदेश से पहले ही मध्यप्रदेश, हरियाणा सहित कुछ अन्य राज्यों में गेहूं खरीद की समय सीमा बढ़ा दी गई थी। इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस कीमत पर अब देश के करोड़ों किसान 31 मई तक गेहूं की बिक्री कर सकेंगे।

मेरे अन्नदाता खुश हैं, इस बात की मुझे बहुत खुशी : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

10-May-2022

सरगुजा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट मुलाकात के लिए मंगलवार को सरगुजा जिले के लुंड्रा विधानसभा के सहनपुर ग्राम पहुंचे। यहां आम के पेड़ के नीचे लोगों से भेंट मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं की। मुख्यमंत्री ने युवाओं को बड़ी सौगात देते हुए धौरपुर में नये शासकीय महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा की। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में तेजी आए इसके लिए मुख्यमंत्री ने धौरपुर में एसडीएम कार्यालय की स्थापना की भी घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने ग्राम गगोली के पास मछली नदी पर पुल निर्माण, ग्राम पंचायत कुन्नी और रघुनाथपुर में उप तहसील खोलने, सहनपुर मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नयन करने के साथ ही सहनपुर में उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने की घोषणा की। उन्होंनेे सहनपुर साप्ताहिक बाजार में शेड और चबूतरा का निर्माण, शासकीय उ.मा. स्कूल उदारी और लमगांव में अतिरिक्त कक्ष के निर्माण, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लुंड्रा में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, शासकीय उ.मा. विद्यालय करौली, बरगीडीह, रघुनाथपुर में भवन निर्माण की स्वीकृति भी दी है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि धौरपुर में एसबीआई की शाखा खोलने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने यह भी कहा है कि जनता की सुविधा के लिए जहां जिस चीज की आवश्यकता होगी वहां उसे जरूर पूर्ण किया जाएगा। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, लुंड्रा विधायक डॉ. प्रीतम राम और अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू भी उपस्थित थे।

खेत में इस हर्बल उत्पाद का इस्तेमाल कर कमाई को पांच गुना बढ़ा सकते हैं किसान, पढ़ें इसे घर में बनाने का तरीका

09-May-2022

प्राचीन भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में रसायन का उपयोग नहीं होता था पर उसके बावजूद सभी का पेट भरने के लिए पौष्टक भोजन मिलता था। कृषि वैज्ञानिकों ने प्राचीन भारत में इस्तेमाल किए जाने वाले जैविक उर्वरक (Organic Manure) कुनापजला की दोबारा से खोज की है और इसका हर्बल संस्करण भी पेश किया है, जिसे हर्बल कुनापजला (Herbal Kunapajala) कहा जाता है।

इसे खेत की मिट्टी के लिए संजीवनी कहा जाता है। क्योकि इसके इस्तेमाल से ना सिर्फ खेतों में पैदावार बढ़ती है बल्कि खेत की मिट्टी भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है और फसलों पर कीट का भी प्रभाव नहीं होता है।

हर्बल कुनापजला के इस्तेमाल से खेती की लागत कम हो जाती है इससे किसानों को कमाई बढती है। इसके इस्तेमाल से खेती करके किसान विभिन्न फसलों से होने वाले शुद्ध लाभ को 0।25 फीसदी से पांच गुना (यानी 25 फीसदी) तक बढ़ा सकते हैं। हर्बल कुनापजला के इस्तेमाल से कई जगहों पर सकारात्मक परिणाम आए हैं। इसे बनाना बेहद दी आसान है। किसान इसे अपने खेत और घर में इस्तेमाल होने वाली चीजों से बना सकते हैं।

कुनापजला बनाने की विधि

200 लीटर की क्षमता वाला एक ढक्कन वाला ड्रम ले और उसमें गाय का गोबर और गोूमत्र डालें

इसके बाद इसमें नीम की खली, अंकुरित उड़द और कुटा हुआ गुड़ डालकर मिलाएं।

फिर इसमें 10-20 लीटर पानी डालकर डंडे से अच्छी तरह मिला लें।

इसके बाद उसमें अपने खेत के खरपतवार को, औषधीय पौधे और नीम के पत्ते को कुचल कर डाल दें।

फंगल रोगों की रोकथाम के लिए इसमें अंरडी के फलियों और जामुन के के पेड़ की बारिश कटी हुईं पत्तियां और टहनिया डाल दें।

इसके बाद धान की भूसी को एक बड़े बर्तन ने पानी डालकर 15-20 मिनट तक उबाल दें और दो दिन ठंडा करने के बाद ड्रम में डाल दें।

फिर इसमें एक लीटर दूघ या पांच सात दिन पुराना छाछ डाले।

ध्यान रहे कि ड्रम में पानी की कुल मात्रा 150 लीटर होनी चाहिए। इसके बाद ढक्कन को टाइट कर दे हैं अगर गर्मियों का मौसम से तो 15 दिन औप सर्दी का मौसम है सो 30-45 दिनों के लिए छोड़ दें। रोज सुबह शाम इस सामग्री को डंडे से हिलाएं।

जब बुलबुले आना बंद हो जाएं तो तब आपका मिश्रण तैयार हो जाता है। इसे कपड़े से छानकर इस्तेमाल करें। अगर स्प्रे के तौर पर इसका इस्तेमाल करना चाहते है तो दो बार इसे छान दे।

Farmer news: 0 % ब्याज पर किसानों को मिलेगी खाद, इस तारीख के बाद देना होगा 4 प्रतिशत

02-May-2022

सरकार किसानों की आर्थिक तौर पर मदद करने के लिए अपने कई योजनाओं में समय-समय पर बदलाव करती रहती है। इसके अलावा सरकार ऐसी बेहतरीन योजनाएं भी बनाती रहती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ सके। इसी क्रम में सरकार की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में इस बार 3396.650 टन रासायनिक खाद भंडारण है। इतना भंडारण होने पर भी किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर बेचने पर पंजीकृत आनाकानी कर रहे हैं।  
किसान खाद को नहीं खरीद रहे : आपको बता दें कि फरवरी से 15 जून तक देश के किसान खाद को नहीं खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें हानि का सामना करना पड़ता हैं। वहीं जिला विपणन विभाग को वर्ष 2022-23 में 9100 टन रासायनिक खाद की बिक्री करने का टारगेट दिया गया है। जिसमें से उन्हें 5779.490 टन मिल चुका है। देखा जाए, तो प्रारंभिक स्टॉक में 6014.790 टन रासायनिक खाद का आवंटित किया गया है। इसके अलावा जिला विपणन विभाग (marketing department) के द्वारा 3369.650 टन खाद विभिन्न समितियों को भी भेज दिया गया है। साथ ही समितियों के पास पहले से ही 2645.140 टन स्टॉक रखा हुआ है।


एडवांस लिफ्टिंग स्कीम का लाभ (Advantages of Advance Lifting Scheme)
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एडवांस लिफ्टिंग के लिए तय किए गए समय तक रासायनिक खाद (chemical fertilizer) को लेने पर जीरो प्रतिशत तक ब्याज का भुगतान देना पड़ता है और अगर वहीं आप इस खाद को समय के बाद लेते हैं, तो आपको 4 प्रतिशत तक ब्याज का भुगतान करना होता है, लेकिन समय पर रासायनिक खाद लेने पर भी किसानों को जीरो प्रतिशत एडवांस लिफ्टिंग स्कीम का लाभ नहीं मिल रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पता चला है, कि देश के ज्यादातर किसानों को एडवांस लिफ्टिंग स्कीम की सही जानकारी के अभाव ना होने से हर साल 4 प्रतिशत तक ब्याज पर रासायनिक खाद को खरीद रहे हैं।
एडवांस लिफ्टिंग स्कीम (Advance Lifting Scheme) के द्वारा समय पर खाद को खरीदने पर किसानों को जीरो फीसदी ब्याज देना होता है, लेकिन इस बात की जानकारी ग्रामीण किसानों को बहुत ही कम पता होती हैं। जिसका फायदा सीधा पंजीकृत रासायनिक खाद मालिकों को मिलता है।

50 हेक्टेयर खेत में मिर्च की फसल लहलहा रही

29-Apr-2022

खेत में लहलहाती फसलों को देख किसानों के चेहरे पर स्वाभाविक मुस्कान आ जाती है। ग्रीष्मकाल में सिचाई के लिए पानी मिले तो मेहनतकश किसान गर्मी के मौसम में भी खेत को हरभरा कर देते है।

जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत डुमरकोना में जोकारी नाला मिट्टी बांध एवं नहर निर्माण का कार्य वर्ष 2020-21 में मनरेगा के तहत कराया गया। जिसके फलस्वरूप रबी के मौसम में 50 हेक्टेयर खेत में मिर्च की फसल लहलहा रही है। गर्मी और बरसात दोनो सीजन में साग-सब्जी की अच्छी पैदावार होने के कारण किसानों को हर साल लाखों रूपए की आमदनी से उनके जीवन में खुशहाली एवं जीवन स्तर में सुधान आने लगा है।

जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डुमरकोना में जोकारी नाला मिट्टी बांध एवं नहर निर्माण से ग्राम डुमरकोना के आस-पास के लगभग 200 हेक्टर कृषि भूमि की सिचाई की सुविधा मिलने लगी है। अब यहॉ के किसानों को रबी एवं खरीफ दोनो फसल का लाभ मिल रहा है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है। साथ ही भू-जल स्तर में भी सुधार आया है। इस क्षेत्र की भूमि मिर्ची की फसल के अनुकूल है। जोकारी नहर निर्माण से सिचाई सुविधा मिल जाने से किसानो ने 50 हेक्टर भूमि पर मिर्च की फसल लगाई थी। जिससे किसानों की आमदनी बढ़ गयी है। आमदनी बढ़ने से किसनों में खुशहाली का माहौल है।
गांव के किसान भागीरथ प्रधान, सोन साय राम, रामप्रसाद यादव, राम कुमार यादव, संजय राम, लालमन मनी, बलवंत ने बताया कि गर्मी और बरसात दोनो सीजन में साग-सब्जी की अच्छी पैदावार होने के कारण किसानों को हर साल लाखों रूपए की आमदनी हो जा रही है। स्थानीय बाजारों में भी मिर्च, टमाटर, भिण्डी, लौकी, बरबटी का विक्रय करने से अच्छा खासा मुनाफा किसानों को प्राप्त हो रहा है। किसानों ने बताया कि बांध निर्माण होने से धान के रकबा में लगभग 25 हेक्टर की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पहले भूमि असिंचित थी। बांध निर्माण होने से पूर्ण रूप से सिंचित हो गई है। परंपरागत धान की फसल का उत्पादन भी बढ़ गया है। अब मानसूनी बारीश का इंतजार नहीं करना पड़ता है। समय पर सिचाई हो जाती है। 

देश के 14 करोड़ किसानों को बड़ी राहत, मोदी सरकार बढ़ाएगी खाद सब्सिडी

27-Apr-2022

देश के 14 करोड़ किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार नेफर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) बढ़ाने का फैसला लिया है। खरीफ सीजन आ रहा है और उर्वरकों के रॉ मैटीरियल काफी महंगे हो रहे हैं। हाल ही में खाद कंपनियों ने डीएपी की कीमतों में 150 रुपए की वृद्धि हुई है। यूरिया और दूसरे उर्वरकों के दाम में भी वृद्धि होने का पूरा अनुमान है। ऐसे में पहले से ही डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान किसानों (Farmers) पर सरकार खाद की महंगाई का बोझ नहीं डालना चाहती। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में फर्टिलाइजर सब्सिडी बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाएगी तो किसानों को महंगा खाद खरीदना पड़ेगा। फिलहाल, सरकार किसानों से महंगा खाद खरीदवाने का राजनीतिक रिस्क नहीं लेना चाहती।

सरकार का प्रयास है कि रॉ मैटीरियल के रेट में वृद्धि का बोझ किसानों पर न पड़े। इसलिए वो सब्सिडी का और भार उठाने की तैयारी कर रही है। बताया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के रॉ मैटीरियल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। क्योंकि फॉस्फेटिक और पोटेशियम उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खाद कंपनियों के मुताबिक रॉ मैटीरियल काफी महंगा हो गया है। कनाडा, चाइना, जार्डन, मलेशिया इंडोनेशिया और अमेरिका से भी खाद का रॉ मैटीरियल आता है।

कितनी है खाद सब्सिडी : पिछले कुछ वर्षों से उर्वरक सब्सिडी 80 करोड़ रुपये के आसपास होती थी। लेकिन रॉ मैटीरियल के बढ़ते दाम की वजह से डीएपी का दाम लगभग डबल हो गया था। इसलिए सरकार ने भारी सब्सिडी देकर किसानों को राहत दी। लेकिन इससे 2020-21 में उर्वरक सब्सिडी 1।28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इसके बाद फिर रॉ मैटीरियल के दाम में तेजी आई तो भी सरकार ने निर्णय लिया कि इसका असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। इस तरह 2021-22 में यह इससे भी अधिक हो गई। बताया जा रहा है इस बार यह सब्सिडी 1।4 से 1।5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।

नीति आयोग की बैठक में उठा था मुद्दा : मवार 25 अप्रैल को नीति आयोग द्वारा विज्ञान भवन में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पर आयोजित बैठक में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने फर्टिलाइजर सब्सिडी का मुद्दा उठाया था। कृषि विशेषज्ञों ने कहा था कि कुछ समय में फर्टिलाइजर सब्सिडी 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जिस प्रकार हरित क्रांति के लिए किसानों को रासायनिक खाद पर सब्सिडी और अन्य सहायता उपलब्ध कराई गई उसी प्रकार प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना और सहयोग करना आवश्यक है।

यूरिया, डीएपी पर कितनी सब्सिडी : पिछले दिनों ने रसायन एवं उवर्रक मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा में कहा था कि सरकार का प्रयास है कि किसानों को यूरिया सहित विभिन्न उर्वरक पर्याप्त मात्रा में और सही दाम पर मिले। इसके लिए सब्सिडी का पूरा भार उठा रही है। मांडविया ने बताया था कि कई देशों में यूरिया की कीमत (Urea Price) लगभग चार हजार रुपये प्रति बोरी है, जबकि इंडिया में इसका दाम 266 रुपये है। इसी तरह डीएपी पर सरकार प्रति बोरी 2650 रुपए की सब्सिडी दे रही है।

खेती में ‘नुकसान’ के बाद भी किसानों को बड़ी राहत देती है यह योजना, जानें कैसे उठा सकते हैं लाभ

26-Apr-2022

खेती को प्रकृति आधारित व्यवसाय कहा जाता है। जिसमें प्रकृति पर ही खेती (Agriculture) का फल निर्भर होता है। अच्छी बारिश, धूप किसी भी फसल के लिए जरूरी होती है, तो वहीं कई बार इनकी अधिकता से फसल खराब भी हो जाती है। कुल मिलाकर किसानों (Farmer’s) की मेहनत प्रकृति पर ही निर्भर है, ऐसे में सीजन खत्म होने तक किसान खेती से होने वाली आय को लेकर अनिश्चित रहते हैं। तो कई बार किसानों की पूरी फसल आपदाओं की भी भेंट चढ़ जाती है। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। खेती में इस तरह के नुकसान को किसान एक छोटी सी सुझबूझ से कम कर सकते हैं। जिसमें किसानों की राह पीएम फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) आसान बनाती है। आईए जानते हैं कि यह योजना कैसे किसानों के लिए मददगार है और किसान कैसे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगना को छोड़कर देश के सभी राज्यों में लागू है।

भारत में 6 से 12 साल के बच्चों को लगेगी कोवैक्सीन, DCGI ने दी इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी  

उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान ना जाएं’ UGC के नोटिस से आगबबूला हुआ पाकिस्तान, भारत से मांगा स्पष्टीकरण

किसान ऐसे उठा सकते हैं इस याेजना का लाभ : देशभर के अमूमन अधिकांश राज्यों के किसान पीएम फसल बीमा योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए किसानों को एक आवेदन फार्म भरना होता है। यह आवेदन फार्म ऑफलाइन और ऑनलाइन यानी दोनो मोड में उपलब्ध है। किसान अगर ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो वह पीएम फसल बीमा योजना की वेबसाइट https://pmfby।gov।in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वहीं आफलाइन आवेदन के लिए किसान किसी भी बैंक से फार्म लेकर भर कर जमा करा सकते हैं। यह फार्म बैंक में ही जमा कराना होगा। विशेष यह है किसानों को बीमा के लिए फसल बुआई के 10 दिनों के अंदर आवेदन करना होता है, तभी कोई भी फसल बीमा के लिए पात्र मानी जाती है।

Russia Ukraine War : हम आपको वो सलाह तो नहीं दे रहे.... रूस-यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर ने यूरोपीय देशों को फिर सुनाया

Punjab में भी लागू होगा Delhi जैसा Education Model, सीएम भगवंत मान ने किया ऐलान

बटाईदार किसान भी पात्र,इतना चुकाना पड़ता है प्रीमियम : पीएम फसल बीमा योजना के तहत बटाईदार किसान भी अपनी बोई हुई फसल का बीमा करा सकते हैं। इसके लिए बटाईदार किसनों को अनिर्वाय रूप से आधार संख्या और बाेई गई फसल के बारे में घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होता है। इस योजना के तहत किसान खाद्या फसलों, तिलहन, बागवानी और व्यवसायिक फसलों का बीमा करवा सकते हैं। बीमा के लिए किसानों को निर्धारित प्रीमियर का भी भुगतान करना होता है। जिसके तहत खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का 2 फीसदी, रबी फसलों का 1।5 फीसद और व्यावसायिक व बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5 फीसद प्रीमियर का भुगतान करना होता है। बाकी का भुगतान राज्य व केंद्र सरकार की तरफ से किया जाता है।

PM KISSAN के 12 करोड़ 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए खुशखबरी, राज्य सरकारों ने कर दिया Rft Sign

22-Apr-2022

PM Kisan Latest News: पीएम किसान के 12 करोड़ 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए खुशखबरी है। पीएम किसान सम्मान निधि की 11वीं या अप्रैल-जुलाई 2022 की किस्त बहुत जल्द आपके खाते में गिरने वाली है। राज्य सरकारों ने पात्र किसानों के लिए Rft Sign कर दिया है। अगर आपके स्टेटस में Rft Signed by State For 8th Installment या फिर आपकी जो किस्त बनती हो, जैसे 11वीं है तो  Rft Signed by State For 11th Installment मिले तो 11वीं किस्त बहुत जल्द आने वाली है। बहुत हद तक यह संभव  है कि अक्ष्य तृतीया के दिन यानी 3 मई को पीएम मोदी खुद किस्त जारी करें। क्योंकि पिछले साल 15 मई को किस्त जारी की गई थी।

आपकी किस्त आएगी या नहीं इसके लिए सबसे पहले आपको अपने पीएम किसान खाते का स्टेटस चेक करना पड़ेगा। इसके लिए आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर इस स्टेप्स को फॉलो करें...

STEP-1: पहले पीएम किसान (PM Kisan) की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। यहां आपको दाएं साइड पर 'Farmers Corner' का विकल्प मिलेगा

STEP-2: यहां ‘Beneficiary Status' के ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां नया पेज खुल जाएगा।

STEP-3:  नए पेज पर आधार नंबर या बैंक खाता संख्या में से किसी एक विकल्प को चुनिए। इन तीन नंबरों के जरिए आप चेक कर सकते हैं कि आपके  खाते में पैसे आए या नहीं।

STEP-4: आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए। इसके बाद 'Get Data' पर क्लिक करें।

 STEP-5: यहां क्लिक करने के बाद आपको सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी। यानी कौनसी किस्त कब आपके खाते में आई और किस बैंक अकाउंट में क्रेडिट हुई। इस समय आपके स्टेटस में अगली किस्त के बारे में Rft Signed by State for 11th installment लिखा मिलेगा।

जब आप पीएम किसान सम्मान निधि की वेबसाइट (https://pmkisan.gov.in/) पर जाकर अपना पेमेंट स्टेटस चेक ( Installment Payment Status) करते हैं तब कई बार आपको  Rft Signed by State for 1st, 2nd, 3rd, 4th, 5th 6th, 7th, 8th 9th, 10th या 11th instalment लिखा मिलेगा। यहां Rft की फुलफार्म है Request For Transfer, जिसका मतलब हैं कि 'राज्य सरकार द्वारा लाभार्थी के डेटा की जांच कर ली गई है, जो की सही पाया गया है।' राज्य सरकार केंद्र से अनुरोध करती है की लाभार्थी के खाते में पैसे भेजे जाएं।

Ration Card धारक अब उमंग ऐप से घर बैठे पा सकेंगे राशन, लंबी कतरों से मिलेगी मुक्ति

21-Apr-2022

केंद्र सरकार की ओर से ‘राशन सर्विस’ (Ration Service) की सुविधा उमंग ऐप (UMANG App) में शुरू की गई है। इससे अब राशन कार्ड (Ration Card) धारकों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर लंबी-लंबी कतरों में खड़ा होने लोगों को इससे मुक्ति मिल सकेगी। आप घर बैठे अपना राशन उमंग ऐप के जरिए बुक कर सकते हैं।

केंद्र सरकार की ओर से मेरा राशन सेवा की शुरुआत उमंग ऐप पर की गई है। यह सुविधा देश के 22 राज्‍यों में शुरु की गई है। इसके तहत नजदीकी शॉप को खोजने के साथ ही, नए राशन कार्ड का लाभ लेने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

क्‍या मिलेगी सुविधा
केंद्र सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए इस योजना की शुरूआत की है। जिसके तहत प्रवारियों को इसका ज्‍यादा फायदा होगा। साथ ही इस ऐप से राशन दुकान की सटीक जानकारी भी मिलेगी। उमंग ऐप पर राशन सर्विस के तहत अगर आप‍का राशन लेने से संबंधित कोई सुझाव है तो भी ले सकेंगे। साथ ही राशन की अन्‍य जानकारी भी उपलब्‍ध है। इसके अलावा आप उमंग ऐप के जरिए उचित मूल्‍य की दुकान का पता लगा सकेंगे।


और क्‍या उमंग ऐप पर मिलता है लाभ
UMANG App भारत सरकार का एक मोबाइल App है। जिसके तहत गैस कनेक्‍शन से लेकर पेंशन, ईपीएफओ समेत 127 विभागों की 841 से अधिक सेवाएं उपलब्ध है। इसके साथ ही इसपर उपलब्‍ध सेवाएं भारत के कई भाषाओं में उपलब्‍ध है।

नींबू के भाव को क्यों लगी मिर्ची, कई राज्यों में भाव 400/ किलो, आगे क्या रह सकते हैं हालात

16-Apr-2022

पिछले कुछ दिनों में नींबू की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आमतौर पर 2-3 रुपए में बिकने वाला एक नींबू 10-15 रुपए तक में बिक रहा है।  आमतौर पर 50-60 रुपए किलो में बिकने वाले नींबू की कीमत कई शहरों में 300-400 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।

गर्मी के दिनों में जब नींबू की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तो रिकॉर्ड तोड़ कीमतों की वजह से नींबू आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है।

नींबू का भाव बढ़ने के पीछे की चार वजह

  1. मंडी में सप्लाई कम
  2. बारिश की वजह से फसल को नुकसान
  3. पिछले साल के चक्रवाती तूफान की वजह से खेती तबाह
  4. कई राज्यों में अलग-अलग वजहों से फसल की उपज कम

जून के महीने में कर्नाटक (Karnataka) से नींबू की आपूर्ति शुरू हो जाती है जिससे देशभर की मांग की पूर्ति होती है। इसके बाद अगस्‍त-सितंबर में गुजरात (Gujarat) और महाराष्‍ट्र (Maharashtra) से नींबू आना शुरू हो जाता है, ऐसे में नींबू का यह सायकल बना रहता है। कारोबारियों का कहना है कि जून से नींबू के भाव में कमजोरी देखी जा सकती है।

नींबू के दाम बहुत लंबे समय तक आसमान पर नहीं रहेंगे लेकिन अभी डेढ़ से दो महीने तक राहत मिलने की उम्‍मीद नहीं है। नींबू की नई फसल (Lemon Crop) आने के बाद ही कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।

READMORE:-

By-Polls Results उपचुनाव नतीजे: पश्चिम बंगाल में शत्रुघ्न सिन्हा और बाबुल सुप्रियो जीते

Air India Recruitment 2022: एयर इंडिया में 596 पदों पर वैकेंसी, ऐसे करें आवेदन

एक ही पटरी पर आई दो ट्रेन, पुडुचेरी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे

 

कश्मीर-हिमाचल में ही नहीं, अब देश के दूसरे हिस्सों में भी होगी सेब की खेती, किसानों को दी जा रहा है ट्रेनिंग

15-Apr-2022

नई दिल्ली (इंडिया)। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े किसानों के अलावे अब अन्य राज्य के किसान भी सेब की खेती कर सकते हैं। सेब की खेती से किसानों को काफी फायदा होता है, क्योंकि सेब ऐसे फलों में शामिल है जिसकी खपत दुनिया में सबसे अधिक होती है। कृषि वैज्ञानिक और सेब की खेती से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने सेब की एक ऐसी प्रजाति विकसित की है जिसकी खेती 45 डिग्री तापमान वाले क्षेत्रों में भी आसानी से की जा सकेगी।

45 डिग्री तापमान में हो सकती है हरीमन-99 की खेती

डॉ। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के सह निदेशक अनुसंधान एवं अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ। संजय कुमार सिंह बताते हैं कि सेब की उन्नत खेती सामान्यतः ठंडे प्रदेशों में होती है। हालांकि सेब की नई प्रजाति हरीमन 99 की खेती किसान 45 डिग्री तापमान वाले क्षेत्रों में भी कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि दक्षिण बिहार के जिलों को छोड़कर उत्तर बिहार के प्रायः जिलों में इसकी खेती की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति के सेब की खेती करने पर किसानों को 1 बीघे में लगभग 1 लाख रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने बताया कि सेब की खेती कर किसान सरकार द्वारा दिए जाने वाले करीब 50 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक सेब की बागवानी लगाकर किसान लागत से ढाई या तीन गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

डॉ। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सेब एक शीतोष्ण यानी कम तापमान में उगाया जाने वाला फल है। परंतु खासतौर पर विकसित की गई सेब की प्रजाति हरिमन-99 को उत्तर बिहार के जिलों में आसानी से उगाया जा सकता हैं।

जानकारी के अनुसार बिहार के औरंगाबाद, वैशाली, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, भागलपुर आदि जिलों में कुछ किसानों ने प्रायोगिक तौर पर सेब की बागवानी को लगाया था जिसका अनुभव किसानों के लिए काफी बेहतर रहा।

मिट्टी की जांच क्यों है जरूरी, जानिए मिट्टी का नमूना लेते समय रखें किन बातों का ध्यान?

14-Apr-2022

खेती से बढ़िया उत्पादन के लिए मिट्टी की जांच बहुत जरूरी होती है, इसका मुख्य उद्देश्य खेत की जरूरत के अनुसार उसे पोषक तत्व उपलब्ध करवाना है, जिससे कि उत्पादन तक बढ़ेगा ही साथ ही लागत में भी कमी आएगी।

सरकार भी मिट्टी की जांच पर खास ध्यान दे रही है, साल 2015 मृदा वर्ष के रूप में मनाया गया था और प्रधानमंत्री सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की भी शुरूआत की गई थी।

क्यों जरूरी है मिट्टी की जांच
देश की बढ़ती हुई जनसंख्या की खाद्यान उत्पादन की मांग को पूरा करना एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसके लिए मिट्टी का स्वस्थ्य रहना बहुत जरूरी है। पौधे के विकास के लिए कुल 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। अधिक पैदावार व लाभ लेने के लिए उर्वरको का संतुलित मात्रा में प्रयोग आवश्यक है। उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने के लिए मिट्टी का परीक्षण करवाना आवश्यक है।

मिट्टी कि जांच मुख्यता दो समस्याओं के समाधान के लिए कि जाती है 1. फसल व फल वृक्षों के पोषक तत्वों की सिफारिशों के लिए 2. आम्लीय व क्षारीय मिट्टी के सुधार के लिए मिट्टी कि जांच से पता चलता है कि भूमि में कौन सा पोषक तत्त्व उचित, अधिक या कम मात्रा में है। यदि आप बिना मिट्टी जांच कराए पोषक तत्व डालते हैं तो संम्भव है कि खेत में जरूरत से अधिक या कम खाद डाल दी जाए। आवश्यकता से कम खाद डालने पर कम उपज मिलेगी और अधिक खाद डालने पर खाद का गलत उपयोग होगा और पैसा भी बेकार जायेगा साथ ही भूमि भी ख़राब होने की संभावना ज्यादा रहती है।

मिट्टी का नमूना कैसे लें 
मिट्टी का नमूना हमेशा फसल की बुवाई या रोपाई के एक माह पहले लेना चाहिए।
जिस खेत का नमूना लेना हो उसके अलग अलग 8 से 10 स्थानों पर निशान लगाएं। 
चुनी हुई जगह के ऊपरी सतह से घास फूंस हटा दे। 
सतह से 15 सेमी यानि आधा फुट गहरा गड्ढा खोद कर खुरपे से एक तरफ से ऊंगली की मोटाई तक का ऊपर से नीचे तक का नमूना काट ले। 
मिट्टी को बाल्टी या टब में इकट्ठा कर ले इसी तरह सभी स्थानों से नमूना इकट्ठा कर ले व अच्छी तरह मिला लें। 
अब मिट्टी को फैला कर 4 भागो में बाट लें इन चार भागों में से आमने- सामने के 2 भाग उठा कर फेंक दें, बाकी बचे हुए भाग को फिर से मिला कर 4 भाग कर लें व 2 भाग फेंक दें। बची हुई मिट्टी को मिला लें। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक हमारे पास 500 ग्राम मिट्टी शेष बचे। 
अब इस नमूने (लगभग आधा किलो मिट्टी) को साफ़ थैली में डाल लें। 
एक पर्ची पर किसान का नाम, पिता का नाम, गांव, तहसील व जिले का नाम खेत का खसरा नम्बर भूमि सिंचित है या असिंचित आदि लिख कर थैली में डाल दें। 
नमूना लेते समय क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए खेत में ऊची नीची जगह से नमूना ना लें। मेढ़, पानी की नाली व कम्पोस्ट के ढेर के नजदीक से नमूना ना लें।
पेड़ की जड़ के पास से नमूना ना लें। मिट्टी का नमूना खाद के बोरे या खाद की थैली में कभी न रखें। 
खड़ी फसल से नमूना ना लें। ऐसे खेत जहा हाल ही में उर्वरक का प्रयोग किया हो वहा से नमूना ना लें। 
मिट्टी का नमूना कहां भेजें ? 
मिट्टी का नमूना लेने के बाद उसकी जांच के लिए आप स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक या नजदीकी कृषि विभाग के दफ्तर में जमा करा सकते हैं। आप भी अपने निकटतम मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में नमूना ले जाकर दे सकते हैं जहां इसकी जांच मुफ्त की जाती है। इसलिए किसान मिट्टी का परीक्षण जरूर करवाएं और उसी के अनुसार उर्वरकों का संतुलित तरीके से प्रयोग करें।

Irrigation Scheme: किसानों को जल्द मिलेगा डिग्गियों और फार्म पोंड स्कीम का बकाया पैसा

14-Apr-2022

डिग्गियों : भारत सरकार की राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसान खेतों में वर्षा जल संग्रहण / छोटा तालाब / डिग्गी बनाने पर 25% से लेकर 80 % तक की सब्सिडी अनुदान देती है | योजना का मुख्यत, बरसात के पानी को एकत्रित कर खेती/फसलो की सिंचाई काम में लेकर खेती को उन्नत पैदावार मुख्य उधेश्य है | यह स्किम राजस्थान की मरुधरा पर खेतो में समुंद्र जैसा साबित हो रही है, प्रदेश सरकार अब तक 28400 डिग्गी तालाब इकाइयों का निर्माण करा चुकी है जिसमे किसानो को सब्सिडी /अनुदान के तहत खुशहाल किया है।

फार्म पोंड स्कीम: जिस तरह से भूमिगत जल का स्तर घट रहा है, जिसका खेती पर भी पड़ रहा है, ऐसे में बारिश के पानी को इकट्ठा करके फिर से सिंचाई के काम लेने के लिए फार्म पॉन्ड योजना की शुरूआत हुई है। लगातार घटते हुए जल स्तर को देखकर सरकार ने बारिश के पानी को संग्रहित करके खेती में उपयोग करने के लिये इस योजना का संचालन किया है। इसमें कच्चे खेत तालाब पर लागत या 50% अधिकतम 63 हजार और प्लास्टिक लाइनिंग वाले पर अधिकतम 90 हजार रुपये तक की राशि मिलती है। आप भी जानिए क्या है इसकी पात्रता, कैसे लें अनुदान का लाभ, कितना मिलेगा अनुदान, कहां करें संपर्क और कैसे करें आवेदन

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि राज्य के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना के तहत यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 5 हजार डिग्गियों का निर्माण कराने की बजट घोषणा की गई थी। इसके तहत बीकानेर जिले को 1150, आईजीएनपी (Indira Gandhi Nahar Project) बीकानेर कार्यालय को 1985, हनुमानगढ़ को 1250 एवं श्रीगंगानगर को 1270 डिग्गी निर्माण के फिजिकल एवं फाइनेंशियल टारगेट का आवंटन किया गया था।

डिग्गी निर्माण के लिए कितनी मदद

न्यूनतम 4.00 लाख लीटर पानी भराव क्षमता एवं इससे अधिक क्षमता की पक्की डिग्गी (Diggi) का निर्माण करने पर प्रति इकाई लागत का 75 फीसदी अथवा अधिकतम 3.00 लाख रुपये में से जो भी कम होगा वह मिलता है। इसके लिए संबंधित किसान के पास पास कम से कम 0.5 हैक्टेयर सिंचित कृषि कार्य योग्य भूमि होना जरूरी है।

किसानों को कितना मिला लाभ

कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 5 हजार डिग्गियों के विरूद्ध 4147 का निर्माण कर 75 करोड़ रुपए तथा फार्म पोंड में 5 हजार के विरूद्ध 4560 का निर्माण कर 26 करोड़ रुपए के अनुदान का किसानों को भुगतान किया जा चुका है। लेकिन एसएनए खाते की बाधाओं के कारण कुछ डिग्गियों व फार्म पोंड का भुगतान लंबित रह गया, जिसके लिए सभी जिलों को शेष रकम का भुगतान कर समय पर किसानों को लाभान्वित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

ATAL Bhujal Yojana: यूपी में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की हो रही है तैयारी

09-Apr-2022

लखनऊ : भूजल संरक्षण के कार्य में जनसहभागिता को बढ़ाने के लिए यूपी सरकार कई अनूठे कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार स्वच्छता मिशन की तरह ही जल संरक्षण को भी जन अंदोलन बनाने की बड़ी तैयारी में जुट गई है। इस कार्य में जनसहभागिता को बढ़ाने के लिए कई अनूठे कदम उठाने जा रही है।

अपनी दूसरी पारी में योगी सरकार ने एक बार फिर से भूगर्भजल संरक्षण की योजनाओं को तेजी से प्रदेश में भर में विस्तार देने की तैयारी की है। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तय किया गया है कि युद्ध स्तर पर गांव-गांव जल संरक्षण की योजनाओं को पूरा कराने और लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रमों में तेजी लाई जाएगी।

READMORE:-

Chhattisgarh High Court: जींस, टी-शर्ट पहनने और नौकरी के लिए बाहर जाने से नहीं तय होता महिला का चरित्र:  

 

 रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, निजी कंपनियों से हथियार खरीदने के लिए रखा 25% बजट

जल को बचाना और दोबारा उसे उपयोग में लाने के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। जल संरक्षण अभियान के लिए बैठक का आयोजन और लोगों को प्रशिक्षण देना जरूरी है। प्रदेश सरकार विभिन्न जिलों में जल संरक्षण के साथ शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करा रही है। खेत ताल योजना के तहत खेत का पानी खेत में और छत का पानी धरती में वापस जा सके, उसपर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

पुराने प्रयास का दिखा असर : पिछले कार्यकाल में सरकार के प्रयासों और जल जीवन मिशन की योजनओं से गांव-गांव में चल रहे प्रयास रंग लाने लगे हैं। स्वच्छता मिशन की तरह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की तैयारी की जा रही है। हर गांव में जल संरक्षण की योजनाओं का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। जल समितियों का गठन और पाइपलाइन से लीक होने वाले पानी के संरक्षण और रेन वॉटर हारवेस्टिंग पिट के निर्माण को भी युद्ध स्तर पर किये जाने की तैयारी है, जिससे बारिश के पानी का संरक्षण हो सके और संरक्षित पानी का दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

 READMORE:-

 IPL 2022: हार्दिक पंड्या बोले, 4 ओवर फेंकने में हो रही थकान, मैच के बाद बोले- इसकी आदत नहीं है

 

2.  LPG Cylinder Price: क्या आपको पता है कि दुनिया में सबसे 'महंगा' एलपीजी सिलेंडर भारत में बिकता है?

TAGS:-  ATAL Bhujal Yojana: Preparations are being made to make water conservation a mass movement in UP

छत्तीसगढ़ में धान बेच किसानों ने कमाए 20 हजार करोड़ रुपये, जानें- कैसे फायदेमंद हुई खेती-किसानी?

08-Apr-2022

राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में साल दर साल धान खरीदी का नया रिकॉर्ड बन रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि अब खेती-किसानी छत्तीसगढ़ में लाभकारी व्यवसाय बन गया है।

आंकड़ों के मुताबिक चालू खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। इस साल 21.77 लाख किसानों से करीब 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। इसके एवज में किसानों को करीब 20 हजार करोड़ रुपयों का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किए जाने का दावा किया गया है। बता दें कि राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने सत्र-2022-23 में धान का समर्थन मूल्य 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का ऐलान पहले ही कर दिया है। ऐसे में इस सत्र में धान की और अधिक खेती होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकार 1825 प्रति क्विंटल से अधिक की राशि एक साथ न देकर चार किश्तों में किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत दे रही है।

इसलिए फायदेमंद साबित हुई खेती

बता दें कि छत्तीसगढ़ में साल 2018 में विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान की खरीदी कर रही है। इससे पहले 1825 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी होती थी। प्रदेश में धान की खेती फायदेमंद होने की यह सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है।

सरकार का दावा है कि समर्थन मूल्य ज्यादा मिलने के कारण प्रदेश में धान की खेती का रकबा बढ़ा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का मौसम भी धान की फसल के लिए अनुकूल है।

इसके चलते ही यहां दोनों सीजन में धान की खेती की जाती है। सरकार का दावा है कि राज्य में खेती-किसानी के लिए समय पर खाद, बीज समेत अन्य सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे किसानों को खेती किसानी में फायदा हो रहा है।

धान उपार्जन केंद्रों की बढ़ी संख्या

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष 2020-21 में 2311 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 20।53 लाख किसानों ने धान बेचा था। इन किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 92।02 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया था। पिछले वर्ष 2020-21 में किसानों से 24।87 लाख हेक्टेयर में धान खरीदी की गई थी। जबकि वर्ष 2021-22 में 26।48 लाख हेक्टेयर में धान की खरीदी की गई। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 01 लाख 23 हजार 819 अधिक किसान लाभान्वित हुए। सरकार के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग 5।96 लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदी की गई है।


Previous123456789...8384Next