Friday,29 October 2021   12:13 am
Previous12345Next

Maha Ashtami 2021): आज अष्टमी तिथि को होगी मां महगौरी की पूजा, इन नियमों का करें पालन, मां की बनी रहेगी कृपा

13-Oct-2021

Maha ashtami navami date: अष्टमी (Maha Ashtami 2021) के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में माता की पूजा और हवन होता है। हवन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं कि महाष्टमी के दिन के लिए हवन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हवन के लिए शुभ मुहूर्त : अष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें रूप यानी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। महाअष्टमी को एक विशेष समयकाल और मुहूर्त में पूजा की जाती है जिसे संधि पूजा कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब अष्टमी समापन की ओर हो और नवमी शुरू होने वाली हो, उस दौरान पूजा करना शुभ माना जाता है। दोनों के बीच करीब 48 मिनट का अवधि रहती है। हवन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07:42 से 08।07 के बीच का रहेगा।

महाष्टमी व्रत का महत्व : हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी के रुप में मनाया जाता है। नवरात्रि में अष्टमी तिथि को महाष्टमी कहा जाता है। इस बार 13 अक्टूबर 2021 को अष्टमी तिथि पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा की महागौरी के रुप में पूजा होती है। इस दिन देवी के अस्त्रों के रुप में पूजा होती है इसलिए इसे कुछ लोग वीर अष्टमी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा अर्चना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और आपके सभी दुखों को दूर करती हैं।

Ganesh Chaturthi 2021: भगवान गणेश से सीखें ये 3 बातें, जीवन में पाएंगे कामयाबी

13-Sep-2021

जीवन में सफल होने के लिए विनम्रता, धैर्य और तत्परता जैसे गुण जरूर होने चाहिए। भगवान गणेश हमें जिंदगी के हर पहलू पर नई सीख देते हैं। गणेश चतुर्थी पर आज हम ऐसे ही कुछ गुणों की बात करेंगे। प्रथम पूज्य गणपति (Ganpati) हर एक के जीवन (Life) में उतार-चढ़ाव में मार्गदर्शक होते हैं। पार्वती मां (Parwati Mata) और भगवान शिव (Lord Shiva) के बेटे गणेश (Son Ganesha) को विघ्नहर्ता (Vighnaharta) यानी कि परेशानियों को दूर करने वाला कहा जाता है। आइए गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के मौके पर आपको बताते हैं भगवान गणेश (Lord Ganesha) की Life से जुड़ी वो 3 बातें जो आपको Life में बनाएंगी सफल (Successful)।

रिश्तों को सम्मान देना है जरूरी : यह वह संस्था है, जिसका हिस्सा हम जन्म से पहले ही बन जाते हैं। गर्भ में आते ही हम मां-बाप, भाई-बहन जैसे रिश्तों में बंध जाते हैं। जबकि कुछ रिश्ते हम अपनी इच्छा से चुनते हैं, जैसे जीवनसाथी, दोस्त। भगवान गणेश हमें रिश्तों का सम्मान करना सिखाते हैं। फिर चाहें वह माता-पिता हों या अपने नन्हें मूषक दोस्त का। वे प्रथम पूजनीय होने के बाद भी अपने रिश्तों को सम्मान देना नहीं छोड़ता।  आपकी पोजीशन चाहें कितनी भी बड़ी हो, आप कितने भी संपन्न हो या आपकी कंपनी आपको चाहें जितना भी पैकेज दे रही हो, उसका गुमान रिश्तों के बीच नहीं आना चाहिए। भगवान गणेश आपको रिश्तों के प्रति विनम्र होना सिखाते हैं। 

 क्षमा ही परम गुण है :- जब आप तीस की उम्र तक पहुंचती हैं, तब तक आप और भी मेच्योर हो चुकी होती हैं। अब आपको सिर्फ गलती होने पर माफी मांगना ही नहीं आना चाहिए, बल्कि अपने से छोटों और अपने साथ के लोगों को माफ करना भी आना चाहिए। जैसे भगवान गणेश ने चंद्रमा को किया। 
बुलिंग आज का मामला नहीं है, बहुत समय से लोग इसे झेलते आ रहे हैं। मोटापे, स्टाइल या किसी भी वजह से लोग एक-दूसरे को बुली करते हैं। निश्चित रूप से यह अशोभनीय और बुरी बात है। मगर इसे पकड़ कर नहीं बैठना। इस तरह आपकी मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकती है और रिश्तों पर तो इसका असर आता ही है। इसलिए अपने दोस्तों, सहकर्मियों और जूनियर्स को भी एक निश्चित सीमा में माफ किया जा सकता है। पर एक चेतावनी के साथ। 

कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करें  : कभी-कभी हमारे लॉजिक हमें अपने सीनियर्स को फॉलो करने से रोकते हैं। पर जब आप कॉरपोरेट के स्ट्रक्चर को समझेंगी तो समझ आएगा कि हाई पोजीशन पर पहुंचने की यात्रा आसान नहीं होती। वे लगभग उन्हीं अनुभवों से गुजरकर वहां तक पहुंचे हैं, जिनका सामना अभी आप कर रहीं हैं। हम अपवादों की बात नहीं कर रहे। सफलता की यात्रा अनुभव और सबक दोनों देती है। तो जब आपके सीनियर्स आपको कोई असाइनमेंट दें, तो उसके प्रति पूर तरह ईमानदार रहें और उसे प्राथमिकता पर पूरा करें। यह न केवल आपको तनावमुक्त रखेगा, बल्कि आपके आसपास का माहौल भी शांतिपूर्ण रहेगा। भगवान गणेश और माता पार्वती की कथा से आप समझ सकते हैं कि जब आप अपने बड़ों की आज्ञा का पालन करते हैं, तो वे भी आपके हक में लड़ने को तैयार रहते हैं। 

अपने स्वाभिमान की रक्षा करें :- लेडीज, यह आपको हमेशा याद रखना चाहिए। चाहें घर हो या कॉरपोरेट। अपने स्वाभिमान की रक्षा करना हमेशा जरूरी है। किसी भी ऐसी चीज के लिए हां न कहें, जिसे पूरा करना आपके लिए मुश्किल हो। ये किसी टॉक्सिक रिलेशन में बंधना या गलत नौकरी के लिए हां कहना, कुछ भी हो सकता है। 
कोरोनावायरस महामारी के कारण बहुत से लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा। आप अकेली नहीं हैं, ऐसा बहुतों के साथ हुआ। इसलिए किसी भी तरह की शेमिंग को खुद पर हावी न होने दें। आज नहीं तो कल, आपको आपकी प्रतिभा के अनुसार पोजीशन और पैकेज जरूर मिलेगा। इसलिए निराश न हों और अपने सम्मान को बचाए रखें। 

Ganesh Chaturthi 2021: आज घर-घर विराजेंगे बप्पा, गणेश चतुर्थी पर इस शुभ मुहूर्त में करें बप्पा का पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

10-Sep-2021

आज देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है। आज से गणेशोत्सव शुरू होगा और 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन किया जाएगा। आज ब्रह्म और रवियोग में गणपति स्थापना होगी। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त 12 बजकर 17 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त से शुरू होगा और रात 10 बजे तक पूजन का शुभ समय रहेगा। इस साल गणेश चतुर्थी पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। गणेश चतुर्थी के दिन 11 बजकर 09 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक पाताल निवासिनी भद्रा रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, पाताल निवासिनी भद्रा का योग शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की कृपा से सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

गणेश चतुर्थी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

  • गणेश चतुर्थी शुक्रवार 10 सितंबर 2021
  • मध्याह्न गणेश पूजा का मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक
  • अवधि- 02 घंटे 29 मिनट
  • वर्जित चन्द्रदर्शन का समय- सुबह 09 बजकर 11 मिनट से शाम 08 बजकर 52 मिनट तक
  • अवधि- 11 घंटे 41 मिनट
  • चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ- 10 सितंबर 2021 को 12 बजकर 18 मिनट से
  • चतुर्थी तिथि का समापन- 10 सितंबर 2021 को 09 बजकर 57 मिनट तक

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि

  • गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और फिर स्नान करें
  • गणेश जी की प्रतिमा घर लाएं और उसे पूजा स्थल पर स्थापित करें।
  • बप्पा को उनकी प्रिय वस्तुएं मोदक, लड्डू और दूर्वा अर्पित करें।
  • जब तक विनायक घर पर विराजे हैं तब तक नियम से दोनों पहर की पूजा अवश्य करें।
  • पूजा में फल, फूल, पंचामृत, लाल कपड़ा, भोग, अक्षत, नारियल, पांचों मेवे, कलावा, लौंग को शामिल करें।
  • लंबोदर की पूजा आरती से ही पूरी होती है इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

Hartalika Teej 2021: कल है हरतालिका तीज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

08-Sep-2021

नई दिल्ली (इंडिया)। पंचाग  के अनुसार कल यानि 9 सितंबर को देशभर में महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी।  ये व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है।  इस दिन महिलाएं सोलह ऋंगार आदि करके भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना करती हैं।  महिलाएं बहुत ही बेसब्री से व्रत का इंतजार कर रही हैं।  कुछ महिलाएं पहली बार हरतालिका तीज का व्रत रख रही हैं, तो चलिए आपके उन सभी सवालों के जवाब हम बताते हैं, जो आपके मन में चल रहे हैं।  व्रत वाले दिन की शुरुआत कैसे करें, किस समय व्रत की पूजा करना सही रहता है, पूरा दिन व्रत रखकर क्या-क्या कर सकते हैं, पूजा की थाली में क्या समग्री रखें और व्रत का पारण कैसे करें।

पूजा विधि :

हरतालिका तीज के दिन व्रत रखकर पूरे विधि विधान से महादेव और मां पार्वती पूजा-अर्चना करनी जरूरी होती है।  इसलिए हरतालिका तीज के दिन सबसे पहले आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना है।  इसके बाद संकल्प लेकर निर्जला व्रत रखा जाता है।  इसके बाद अपने हाथों से भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी या बालू से बनी मूर्ति बनाकर स्थापित कर लें और सूर्य के अस्त होने के बाद प्रदोष काल में पूजा करें।  पूजा की दौरान मां पार्वती को सुहाग की सभी वस्तुओं को चढ़ाएं।  इन सब के बाद व्रत कथा पढ़ें या सुनें।  इसके बाद शिव पार्वती की पूरे मन से आरती करें।

हरतालिका तीज मुहूर्त 2021:

प्रातःकाल हरितालिका तीज पूजा मुहूर्त – 06:03 AM से 08:33 AM

अवधि – 02 घण्टे 30 मिनट

प्रदोषकाल हरितालिका तीज पूजा मुहूर्त – 06:33 PM से 08:51 PM

अवधि – 02 घण्टे 18 मिनट

तृतीया तिथि प्रारम्भ – 09 सितम्बर 2021 को 02:33 AM बजे

तृतीया तिथि समाप्त – 10 सितम्बर 2021 को 12:18 AM बजे

जन्माष्टमी विशेषः जीवन में धर्म, कर्म और प्रेम का समन्वय करना सिखाते हैं 'श्री कृष्ण'

30-Aug-2021

द्वापर युग में भादों मास की अष्टमी तिथि को काली घनेरी अर्धरात्रि में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रुप में श्री कृष्ण कंस की बहन देवकी के गर्भ से जन्म लिया। इसी उपलक्ष्य में हर वर्ष लोग जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं।  मैनेजमेंट मास्टर कहें या जगतगुरु गिरधर कहें, या रणछोड़ भगवान।  भगवान श्री कृष्ण को देवकी नंदन, बांके बिहारी, नंदलाल, कन्हैंया, गोपाल, केशव, वासुदेव, और द्वारिकाधीश आदि नामों से जाना जाता है। श्री कृष्ण के जितने नाम हैं उतनी कहानियां हैं। जीवन जीने के तरीकों को अगर किसी ने परिभाषित किया है, तो वो कृष्ण हैं। महानायक भगवान श्री कृष्ण जिनका चरित्र दार्शनिक होने के साथ-साथ बहुत ही व्यवहारिक भी है। भगवान श्री कृष्ण अपने साथ ऐसी चीजें रखते हैं, जो जनसाधारण के लिए कुछ ना कुछ संदेश देती हैं।

ब्रह्मचर्य की भावनाः शास्त्रों में मोर को चिर ब्रह्मचर्य जीव समझा जाता है। ब्रह्मचर्य की महान भावना को समाहित करने के प्रतीक रूप में श्री कृष्ण मोर पंख धारण करते हैं। मोर मुकुट का गहरा रंग दुख और कठिनाइयां तथा हल्का रंग सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु में मोर पंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है।

उदारता का संदेशः संसार में पृथ्वी और गो सेवा से बड़ा कोई उदार और क्षमादान देने वाला नहीं है। गाय भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय है, क्योंकि गाय सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है। गाय का मूत्र, गोबर, दूध ,दही ,और घी, इन्हें पंचगव्य कहते हैं। इनके सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है।

ब्रह्मचर्य की भावनाः शास्त्रों में मोर को चिर ब्रह्मचर्य जीव समझा जाता है। ब्रह्मचर्य की महान भावना को समाहित करने के प्रतीक रूप में श्री कृष्ण मोर पंख धारण करते हैं। मोर मुकुट का गहरा रंग दुख और कठिनाइयां तथा हल्का रंग सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु में मोर पंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है।

अहंकार का परित्यागः भगवान कृष्ण के गले में वैजयंती माला सुशोभित है, जो कमल के बीजों से बनी है। कमल के बीज बहुत ही सख्त होते हैं, जो कभी टूटते नहीं है। इसका तात्पर्य है, जब तक जीवन है तब तक ऐसे रहो जिससे तुम्हें देखकर कोई दुखी ना हो। दूसरा यह बीजों की माला है। इस माला के माध्यम से भगवान यह संदेश देते हैं कि जमीन से जुड़े रहो, हमेशा अपने अस्तित्व के नजदीक रहो और अहंकार का त्याग करो।

तब उनके सारथी बने श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं। ऐसे ही वर्तमान जीवन में उत्पन्न कठिनाईयों से लडऩे के लिए मनुष्य को गीता में बताए ज्ञान की तरह आचरण करना चाहिए। इससे वह उन्नति की ओर अग्रसर होगा।

1- क्रोध पर नियंत्रण
गीता में लिखा है क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं। जब तर्क नष्ट होते हैें तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है।

2 नजरिया से बदलाव
जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है। इससे वह इच्छित फल की प्राप्ति कर सकता है।

3- मन पर नियंत्रण आवश्यक
मन पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते, उनका मन उनके लिए शत्रु का कार्य करता है।

4- आत्म मंथन करना चाहिए
व्यक्ति को आत्म मंथन करना चाहिए। आत्म ज्ञान की तलवार से व्यक्ति अपने अंदर के अज्ञान को काट सकता है। जिससे उत्कर्ष की ओर प्राप्त होता है।

5- सोच से निर्माण
मुनष्य जिस तरह की सोच रखता है, वैसे ही वह आचरण करता है। अपने अंदर के विश्वास को जगाकर मनुष्य सोच में परिवर्तन ला सकता है। जो उसके लिए काल्याणकारी होगा।

6- कर्म का फल
गीता में भगवान कहते हैं मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसके अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदकर्मों को महत्व देना चाहिए।

7- मन को ऐसे करें नियंत्रित
मन चंचल होता है, वह इधर उधर भटकता रहता है। लेकिन अशांत मन को अभ्यास से वश में किया जा सकता है।

8- सफलता प्राप्त करें
मनुष्य जो चाहे प्राप्त कर सकता है, यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे तो उसे सफलता प्राप्त होती है।

9- तनाव से मुक्ति
प्रकृति के विपरीत कर्म करने से मनुष्य तनाव युक्त होता है। यही तनाव मनुष्य के विनाश का कारण बनता है। केवल धर्म और कर्म मार्ग पर ही तनाव से मुक्ति मिल सकती है।

10- ऐसे करें काम
बुद्धिमान व्यक्ति कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता देखता है। यही उत्तम रूप से कार्य करने का साधन है।

 

Krishna Janmashtami 2021: देशभर के इन मंदिरों में जन्माष्टमी के मौके पर होती है खास धूमधाम, आप भी करें कान्हा के दर्शन

29-Aug-2021

नई दिल्ली (इंडिया)  भगवान कृष्ण से जुड़ा जन्माष्टमी का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर मथुरा वृंदावन के अलावा पूरे देश में उत्सव का माहौल देखते ही बनता है। हिंदी पंचांग के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी हर साल भादों के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह जन्माष्टमी 30 अगस्त 2021 को यानी कल मनाई जाएगी। इस बार की जन्माष्टमी पर कई योग बन रहें है। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा के दौरान कुछ सरल उपाय करने से भक्तों पर भगवान कृष्ण का विशेष आशीर्वाद व कृपा होगी। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जायेंगे। उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होगा। 

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका, गुजरात : कृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर द्वारका इस्कॉन मंदिर में उल्लास के साथ भगवान कृष्ण का जन्म उत्सव मनाया जाएगा। द्वारकाधीश मंदिर को चार धामों में पश्चिमी धाम कहा जाता है। गुजरात में स्थित इस मंदिर को जगत मंदिर भी कहते हैं। बात जन्माष्टमी की हो तो यहां इस दिन श्रीकृष्ण के भव्य स्वरूप का यहां दर्शन कर सकते हैं।  दिन भर 24 घंटे यहां का प्रांगण कीर्तन से गुंजायमान रहेगा, जिसका लाइव प्रसारण इस्कॉन द्वारका यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। आध्यात्मिक संगीत को वैश्विक मंच पर ले जाने वाली 58वें ग्रेमी अवॉर्ड के लिए नामांकित गौर मणि देवी माता जी का कीर्तन श्रोताओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। कीर्तन में एक ऐसी प्रार्थना एवं शक्ति है जो हमें सीधे भगवान से जोड़ने के लिए पुल का काम करती है।

जगन्नाथ पुरी, ओडिशा : ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान वासुदेव अपने अग्रज बलराम एवं बहन सुभद्रा (अर्जुन की पत्नी व अभिमन्यू की माता) के साथ विराजमान हैं। रथयात्रा के बाद यहां सबसे अधिक रौनक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ही होती है। यहां श्रीकृष्ण अपने भाई-बहन के साथ श्याम रंग में स्थापित हैं। हिंदू धर्म में इस मंदिर का खास महत्व है।

 बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन :  श्रीकृष्ण के बचपन का वृंदावन में बीता था, ऐसे में जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में दर्शन करना बड़ा ही महत्व रखता है। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित ये मंदिर श्रीकृष्ण के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। प्रभु श्रीकृष्ण को बांके बिहारी भी कहा जाता है इसलिए उनके नाम पर ही इस मंदिर का नाम श्री बांके बिहारी मंदिर रखा गया है। जन्माष्टमी के दिन यहां मंगला आरती हुआ करती है, फिर इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए रात 2 बजे ही मंदिर के दरवाजे खुल जाते हैं। ये जानना भी अहम है कि इस मंदिर में मंगला आरती साल में केवल एक बार ही होती है। बालकृष्ण के जन्म के बाद यहां पर श्रद्धालुओं के बीच खिलौने और वस्त्र बांटे जाते हैं।

श्रीकृष्ण मठ मंदिर, उडुपी : यह कर्नाटक का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस मंदिर की सबसे अहम बात ये है कि यहां भगवान की पूजा खिड़की के नौ छिद्रों में से ही की जाती है। यहां हर साल जन्माष्टमी पर पर्यटकों का तांता लग जाता है। पूरे मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। ऐसे में यहां श्रीकृष्ण के इस मंदिर की शोभा देखते ही बनती है।

द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा : द्वारकाधीश मंदिर में प्रभु श्रीकृष्ण के काले रंग की प्रतिमा स्थापित है, जबकि यहां राधा की मूर्ति सफेद रंग की है। प्राचीन मंदिर होने के कारण इसकी वास्तुकला भी भारत की प्राचीन वास्तुकला से प्रेरित बताई जाती है। जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही यहां विशेष पूजा की शुरुआत हो जाती है फिर रात को 12 बजे के बाद पूरी रात श्रीकृष्ण का श्रृंगार और पूजन होता है।

Raksha Bandhan 2021 Date, Puja Vidhi, Muhurat: कब है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, देखें भद्रा काल और राहु काल कब से कब तक

22-Aug-2021

Raksha Bandhan 2021 shubh muhurat : भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते को समर्पित त्योहार रक्षाबंधन इस बार 22 अगस्त, रविवार को मनाया जायेगा। ये त्योहार हर साल सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं ( जिसे हम राखी कहते हैं) और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक सबसे पहले देवी लक्ष्मी ने राजा बली को राखी बांधकर अपना भाई बना लिया था। जानिए कैसे मनाते हैं राखी का त्योहार और क्या रहेगा इसका शुभ मुहूर्त…

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब से कब तक

रक्षा बंधन तिथि – 22 अगस्त 2021, रविवार

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 21 अगस्त 2021,  शाम 03:45 मिनट

पूर्णिमा तिथि समापन – 22 अगस्त 2021, शाम 05:58 मिनट

शुभ मुहूर्त – सुबह 06:17 मिनट से शाम 04:30 मिनट

रक्षा बंधन का समय – 10 घंटा 13 मिनट

 

रक्षा बंधन के लिए दोपहर में समय – 01:44  से 04:23 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:04 से 12:58 मिनट तक

अमृत काल – सुबह 09:34 से 11:07 तक

ब्रह्म मुहूर्त – 04:33 से 05:21 तक

सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक भद्रा प्रभावी रहेगा।

 

राखी बांधने की विधि:

-अब राखी बांधने की प्रक्रिया शुरू करें। इसके लिए भाई को पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बिठाएं।

-ध्यान रखें राखी बांधते समय भाई के सिर पर एक रुमाल जरूर होना चाहिए।

-फिर बहन अपने भाई के माथे पर टीका लगाएं और उस कुछ अक्षत लगाएं।

-कुछ अक्षत भाई के ऊपर आशीर्वाद के रूप में छींटें।

-फिर दीया जलाकर भाई की आरती उतारें। मान्यता है कि ऐसा करने से बहन अपने भाई को बुरी नजरों से बचाती हैं।

-इसके बाद बहन भाई की दायीं कलाई पर राखी बांधते हुए इस मंत्र को बोलें। ‘ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’

-अब भाई-बहन एक दूसरे का मुंह मीठा करें।

-अगर बहन बड़ी है तो भाई उसके चरण स्पर्श करे और अगर बहन छोटी है तो वो भाई के पैर छुए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करे।

-अंत में भाई बहन को कुछ न कुछ उपहार देने की परंपरा निभाते हैं।

रक्षाबंधन के बाद चमकेगा इन राशियों का भाग्य, देखें क्या आपके जीवन में भी होगी खुशियों की बरसात

21-Aug-2021

रविवार को आर्थिक दृष्टिकोण से लाभदायक समय है। हालांक‍ि कुछ राशियों में धन संपत्ति के मामले में लाभदायक समय है और मेहनत के अच्छे परिणाम मिलेंगे। वहीं कुछ राशियों का कामकाज में मन नहीं लगेगा और खर्चे अनियंत्रित रहेंगे।  रक्षाबंधन का पावन पर्व 22 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन के कुछ दिनों बाद बुध देव राशि परिवर्तन कर कन्या राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इस समय बुध देव सिंह राशि में विराजमान हैं। बुध देव को ज्योतिष में  बुद्धि, तर्क, संवाद, गणित, चतुरता और मित्र का कारक ग्रह माना जाता है। सूर्य और शुक्र, बुध के मित्र हैं जबकि चंद्रमा और मंगल इसके शुत्र ग्रह हैं। बुध के शुभ होने पर व्यक्ति को जीवन में सभी तरह के सुखों का अनुभव होता है। बुध देव 26 अगस्त को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और 22 सितंबर तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बुध का राशि परिवर्तन शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ होगा। नौकरी और व्यापार के लिए ये समय किसी वरदान से कम नहीं है। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करने का अवसर प्राप्त होगा। मान- सम्मान और पद- प्रतिष्ठा में वृद्दि के योग बन रहे हैं।

तुला राशि

बुध देव के राशि परिवर्तन से तुला राशि वालों को लाभ होगा। लेन- देन के लिए समय शुभ है।ॉधन- लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करेंगे।  भाई- बहन का सहयोग मिलेगा। इस समय किस्मत का साथ मिलेगा।

कन्या राशि

बुध देव कन्या राशि में ही प्रवेश करने जा रहे हैं। यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं रहने वाला है। हर तरफ से लाभ होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। नौकरी और व्यापार के लिए समय शुभ रहेगा। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

 

सिंह राशि

बुध का कन्या राशि में प्रवेश सिंह राशि के जातकों के लिए शुभ कहा जा सकता है।  नौकरी और व्यापार में तरक्की करेंगे। धन- लाभ होगा, जिससे आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। लेन- देन करने के लिए समय शुभ है। निवेश करने से लाभ होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त करेंगे।

Raksha Bandhan 2021 : रक्षा बंधन पर राशि के अनुसार भाई को बांधे इस रंग की राखी ,आपके भाई के लिए होगी शुभ

18-Aug-2021

Rakhi Colour According To Zodiac Sign: भाई बहन के अटूट प्यार के बंधन का त्योहार रक्षाबंधन (Raksha bandhan) में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। रक्षाबंधन के लिये बहनों ने राखियों की शॉपिंग करनी शुरु कर दी है, तो वहीं भाईयों ने भी अपनी बहनों को गिफ्टस् देने के लिये खरीददारी शुरु कर दी है। इस बार रक्षाबंधन का पर्व 22 अगस्त (22 August) यानी आगामी रविवार को मनाया जाएगा। ऐसे में बाज़ारों में रक्षाबंधन को लेकर खास तैयारियां दिख रहीं हैं, जिसमें नई पैटर्न की राखिया, रंग-बिरंगी राखियां, डिज़ाइनर राखियों से पूरा बाज़ार जग-मग है। लेकिन क्या आप ये जानती हैं कि आपके भाई की राशि को ध्यान में रखते हुए उसे किस तरह की राखी बांधनी चाहिए।।।? शायद नहीं। वैसे तो राखी भाई-बहन के बीच स्नेह और प्रेम का प्रतीक कही जाने वाली एक रेशम की डोर है, लेकिन इसी राखी को अगर आप अपने प्यारे भाई की कलाई पर उसकी राशि के अनुकूल रंग को ध्यान में रखते हुए बांधेंगी तो सोने पर सुहागा हो जाएगा। आईए जानते हैं कि कौन सी राशि के भाई को किस रंग की राखी बांधनी चाहिए और किस प्रकार की मिठाई खिलानी चाहिए, ताकि उसके जीवन में मिठास बनी रहे।

मेष  राशि  (Aries) (चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,अ):-  इस राशि के भाई को रेड कलर के धागे की राखी बांधे। मीठे में उसे मालपुआ खिला सकती हैं।

वृष  राशि (Taurus) (ई,उ,ए,ओ,वा,वी,वु,वे,वो):- इस राशि के भाई को सफेद रंग वाली रेशमी धागे की राखी बांधनी है। उसे मीठे में दूध से बनी मिठाई खिलाएं।

मिथुन  राशि  (Gemini) (क,की,कु,घ,छ,के,को,ह):-  इस राशि के भाई को हरे रंग की डोरी की राखी बांधे। उसे बेसन से बनी मिठाई खिला सकती हैं।

कर्क  राशि (Cancer) (हि,हे,हु,हो,डा,डी,डू,डे,डो) :-  कर्क  राशि वाले भाइयों को पीले रंग की रेशमी धागे वाली राखी बांधे, उन्हें मीठे में रबड़ी खिलाएं।

सिंह  राशि (Leo) (मा,मी,मू,मे,मो,टा,टी,टु,टे) :-   इस राशि के भाई को पांच रंगों से बनी राखी बांधे। उन्हें रसभरी मिठाई खिला सकती हैं।

कन्या  राशि (Scorpio) (टो,पा,पी,पू,ष,ण,ठे,पे,पो) :- कन्या राशि वाले भाइयों को गणपति के प्रतीक की राखी बांधें और लड्डू से मुंह मीठा कराएं।

तुला  राशि  (Libra) (रा,री,रू,रे,रो,ता,ती,तू,ते) :-  तुला राशि के भाई को हल्के पीले रंग की रेशमी डोरी की राखी बांधें और हलवे से मुंह मीठा करा दें।

वृश्चिक  राशि (Scorpio) (तो,ना,नी,नू,ने,यो,या,यि,यु):-  इस राशि के भाई को गुलाबी रंग की डोरी की राखी बांधिए और तिल के गुड़ वाले लड्डू खिलाएं।

धनु  राशि (Sagittarius) ( ये,यो,भा,भी,भू,धा,फ,ढ,भे):-  इस राशि के भाई को सफेद या पीली डोगी की राखी बांधें और मीठे में छेना की मिठाई खिलाएं।

मकर  राशि (Capricorn) (भो,जा,जी,जू,खि,खा,खु,खो,गा,गि):-  मकर राशि के भाई को मल्टीकलर राखी बांधे और मीठे में रस वाली मिठाई खिलाएं।

कुंभ  राशि (Aquarius) (गू,गे,गो,सा,सी,सू,से,सो,द):-  कुंभ राशि के भाई को ब्लू कलर की राखी बांधिए।

मीन  राशि (Pisces) (दा,दु,थ,झ,दे,दो,चा,चि):- इस राशि के भाई को येलो-ब्लू कलर की जरी की राखी बांधनी है। मीठे में गुलाब जामुन खिलाएं।

Sawan Somvar 2021 : इस विशेष दिन की तिथि, समय, पूजा विधि और व्रत अनुष्ठान के बारे में जानें

16-Aug-2021

 

Sawan Somvar 2021 :  शिव भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद खास होता है, बताया जाता है कि ये माह महादेव को बेहद प्रिय होता है। साल 2021 में सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होकर 22 अगस्त को समाप्त होगा। स्कंद पुराण के अनुसार, श्रावण सोमवार के दौरान भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हिंदुओं का मानना ​​​​है कि देवी पार्वती ने श्रावण सोमवार व्रत को गहनता से मनाया था। अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए ये व्रत करती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और परिवार में सुख पाने के लिए इसका पालन करती हैं।

भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस व्रत का पालन करते हैं क्योंकि वो बहुत दयालु हैं और भक्तों को शांति समृद्धि और धन्य जीवन का आशीर्वाद देते हैं। भगवान शिव को प्रणाम करें और परंपरा और प्राचीन संस्कारों के साथ मंत्रों और अभिषेक के साथ पूजा करें, भगवान शिव बहुतायत सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद देंगे।

पूजा विधि क्या है: सुबह जल्दी उठकर नित्यकार्यों से मुक्त हो जाएं और समय से नहा-धोकर साफ वस्त्र धारण कर लें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर साफ कर वेदी की स्थापना करें और व्रत का संकल्प लें। फिर शाम में शिव जी की पूजा करें। दीये में तिल का तेल डालकर जलाएं और भगवान को फूल चढ़ाएं। शिव चालीसा और शनि चालीसा का पाठ करें, महादेव के मंत्रों का जाप करें।

जानें शुभ मुहूर्त: पंचांग के मुताबिक सावन का आखिरी सोमवार शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ रहा है। इस दिन वृश्चिक राशि में चंद्रमा रहेगा और अनुराधा नक्षत्र होगा। वहीं, सुबह साढ़े 7 से 09 बजकर 07 मिनट तक राहुकाल रहेगा, ऐसे में इस वक्त पूजा करने से बचें। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 20 मिनट तक और सुबह 9 बजकर 20 मिनट से लेकर पौने ग्यारह बजे तक रहेगा।

सावन सोमवार का अनुष्ठान

– भक्त जल्दी उठते हैं, स्नान करते हैं और मंदिर जाते हैं।

– वो उपवास रखते हैं और सायं को केवल एक बार भोजन करते हैं।

– जल, दूध, दही, शहद, शक्कर, सुगंध आदि से अभिषेक किया जाता है।

– बिल्व पत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं।

– घर में भक्त देवी पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं।

– शिव मंत्रों का जाप किया जाता है। महामृत्युंजय जप भी किया जाता है।

– गायों, मछलियों और पक्षियों को भोजन दिया जाता है।

– दान कार्य को बहुत शुभ माना जाता है।

इन 4 आदतों के कारण मनुष्य का जीवन बहुत जल्दी हो जाता है नष्ट, जानिए क्यों होता है ऐसा

08-Jul-2021

महाभारत के अनुसार महात्मा विदुर महाराज धृतराष्ट्र के भाई थे। इनकी नीतियां आज के समय में भी काफी प्रासंगिक प्रतीत होती हैं। इन्होंने अपनी नीतियों में मानव समाज के कल्याण से संबंधित कई जरूरी बातें बताई हैं। यहां हम जानेंगे विदुर जी की उस नीति के बारे में जिसमें इन्होंने बताया है कि मनुष्य की कौन सी आदतें उसे पतन की ओर ले जाती हैं।

लालच और स्वार्थ: आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी लालच बुरी बला है। इससे इंसान खुद का ही नुकसान कर लेता है। विदुर नीति के अनुसार भी लालच इंसान का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। जो व्यक्ति लालच करता है, उसका जीवन बहुत जल्दी नष्ट हो जाता है। लालची व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। विदुर नीति लालच इंसान की आयु कम होने का कारण बनता है।

क्रोध: विदुर नीति अनुसार मनुष्य को अधिक क्रोध करने से बचना चाहिए क्योंकि क्रोध आने पर मनुष्य को सही और गलत का भान नहीं रहता है। ऐसे में मनुष्य कोई न कोई गलती करके अपना ही नुकसान कर लेता है। इसलिए कहा गया है कि अत्यधिक क्रोध करने वालों का जीवन कम समय का होता है।

त्याग: जीवन में सुख और शांति बने रहे इसके लिए व्यक्ति के अंदर त्याग का गुण होना चाहिए। जिस इंसान के अंदर त्याग की भावना नहीं होती है ऐसे लोगों का जीवन लघु माना जाता है। स्वार्थी इंसान के अंदर त्याग भावना बिल्कुल भी नहीं होती वो हर चीज में सिर्फ अपनी ही खुशी देखता है। जिस कारण ऐसे लोगों को दुख के समय में किसी का साथ नहीं मिल पाता। विदुर नीति अनुसार त्याग का गुण न होने पर व्यक्ति का जीवनकाल लघु माना जाता है।

अहंकार: व्यक्ति को अहंकार की भावना से दूर रहना चाहिए। अहंकारी व्यक्ति को भी सही और गलत की समझ नहीं होती जिस कारण वो खुद का ही नुकसान कर बैठता है। अहंकार किसी भी इंसान की बुद्धि भ्रष्ट कर देता है। विदुर नीति अनुसार ऐसे लोगों का जीवन भी लघु माना जाता है।

कोरोनाकाल में व्रत और रोज़ा रख रही हैं तो , रखना होगा खास ख्याल

15-Apr-2021

नई दिल्ली,इंडिया। ये साल 2021 है। अप्रैल का महीना चल रहा है। तमाम धर्मावलंबी नवरात्र और रमज़ान मना रहे हैं।  व्रत के दौरान इम्यूनिटी को बरकरार रखना बहुत आवश्यक है।  ऐसा देखा गया है कि प्राय: व्रत की अवस्था में व्रती अपनी इम्युनिटी पर ध्यान नहीं देते हैं, जबकि कोरोनाकाल में हमें उपवास के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी ध्यान चाहिए। कोरोना के समय व्रत और रोज़ा रखने में क्या सावधानियां बरती जाएं? भारत जैसे देश में, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं खून की कमी, डायबटीज और कुपोषण से जूझ रही हैं, उनके लिए कोरोना के दौरान व्रत और रोज़ा रखने के क्या मायने हैं? इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।

देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर तबाही मचा रही है। कब्रिस्तानों में जगह नहीं मिल रही है। सरकारी तंत्र ने भी लगभग अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। तबाही का मंजर ऐसा है कि शवों को जलाते-जलाते श्मशानों की भठ्ठियां पिघल गई हैं।  ऐसे में लोगों से कहा जा रहा है और उन्होंने खुद भी यह समझ लिया है कि कोरोना से अगर बचना है, तो उन्हें खुद ही सावधानी बरतनी होगी। क्योंकि गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर ढंग का इलाज मिलने की संभावना बहुत कम है।

इम्युनिटी को बेहतर बनाने के लिए फलों का सेवन बेहद जरूरी है। कोरोना की बात करें तो विटामिन सी युक्त फलों को सबसे बेहतर बताया गया है। किवी (Kiwi) विदेशी फल होने की वजह से महंगा होता है, लेकिन यह विटामिन सी के साथ ही विटामिन के, विटामिन ई, फोलेट, पोटेशियम आदि का अच्छा स्रोत है। किवी में अधिक मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है। वहीं अनानास, पपीता, अमरूद जैसे फल खाकर भी इम्यून सिस्टम मजबूत बनाया जा सकता है। हालांकि अति हर चीज की बुरी है। ऐसे में किवी समेत किसी भी फल को तय मात्रा के अनुरूप ही लें।

व्रत के दौरान लोग आलू का सेवन ज्यादा कर लेते हैं। इससे शरीर को नुकसान पहुंचता है। अगर आलू खाने हैं तो भी दही के साथ खाएं। व्रत के दौरान ध्यान रखें कि शरीर में पानी की कमी न हो। ऐसे में थोड़े थोड़े समय बाद पानी पीते रहें। व्रत के दौरान आप नारियल पानी का सेवन करते हैं तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। दूछ और छाछ भी शरीर के लिए बेहतर रहती है। शाम को खाने में कुट्टू के आटा की देसी घी में बनी पुरी का सेवन कर आप शरीर की इम्युनिटी को बनाए रख सकते हैं। व्रत के दौरान खुद को लंबे समय तक भूखा न रखें, थोड़े-थोड़े समय पर हल्की चीजों का सेवन करते रहें।

ड्राइ फ्रूट्स का सेवन भी बेहतर : आप ड्राइ फ्रूट्स का सेवन करके भी शरीर की इम्युनिटी को बनाए रख सकते हैं। रात के भिगोए अखरोट खाने से काफी फायदा होता है। एक रिपोर्ट में बच्चों को रोजाना दो और बड़ों को रोजाना पांच बादाम खाने की सलाह दी गई है। बादाम को एक रात पहले पानी में भिगोकर रखना चाहिए और बाद में छिलका उतारकर इनका सेवन कर लें। बादाम में विटमिन-ई, कॉपर, जिंक और आयरन होता है, जो कि हमारी इम्युनिटी को बढ़ाते हैं। हालांकि दोबारा बता दें कि तय मात्रा से अधिक किसी चीज का सेवन न करें, क्योंकि ऐसा करना आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी डाल सकता है।

नव संवत्सर 2078: आज से शुरू हो रहे नवसंवत्सर 2078 का प्रभाव और भविष्यवाणी

13-Apr-2021

इस बार 13 अप्रैल 2021 से नव संवत्सर 2078 की शुरूआत हो रही है। यह हिंदुओं का नववर्ष है। इसकी शुरूआत हिंदू धर्म के पंचाग के अनुसार चैत्र प्रतिपदा के पहले दिन से होती है। वहीं इसी दिन से चैत्र नवरात्रि 2021 का भी शुभारंभ होगा।

जानकारों के अनुसार हिंदू वर्ष 2077 प्रमादी नाम से जाना गया, ऐसे में इसके बाद इस बार 13 अप्रैल मंगलवार को आनंद संवत्सर का आरंभ होना चाहिए था, लेकिन 2077 का प्रमादी संवत्सर अपूर्ण रहने से यानि केवल फाल्गुन मास तक रहा।

हिंदू ग्रंथों के अनुसार, पुराणों में कुल 60 संवत्सरों का जिक्र है. इसके मुताबिक़ नवसंवत्सर यानी नवसंवत्सर 2078 का नाम आनंद होना चाहिए था. लेकिन ग्रहों के कुछ ऐसे योग बन रहे हैं जिसकी वजह से इस हिन्दू नववर्ष का नाम 'राक्षस' है. हिंदू नव वर्ष यानी कि नव संवत्सर की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी, इसलिए इसे विक्रम संवत कहा जाता है. यह अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष 2021 तो वहीं हिंदू पंचांग के अनुसार, यह नया साल यानी कि नवसंवत्सर 2078 है.

जबकि इसके बाद पड़ने वाला 'आनन्द' नाम का विलुप्त संवत्सर पूर्ण वत्सरी अमावस्या तक रहेगा। ऐसे में आगामी संवत्सर संवत 2078 जो राक्षस ( Rakshas Samvatsar ) नाम का होगा, वह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगा। यह संवत्सर 31 गते चैत्र तद अनुसार 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से प्रारंभ होगा।

 इसके अलावा संवत्सर 2078 ( NavSamvatsar ) में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने व कम बरसात होने के संकेत हैं। वहीं इस साल की मंगल की केबिनेट में बृहस्पति यानि गुरु के पास वित्त विभाग रहेगा। व्यापार, व्यावसाय में प्रगति व आर्थिक वृद्धि होने से लोगों की जीवन शैली में सुधार होगा।

महाशिवरात्रि पर हरिद्वार में उमड़े श्रद्धालु, अभी तक 22 लाख लोगों ने किया स्नान

11-Mar-2021

हरिद्वार,इंडिया आज महाशिवरात्रि के मौके पर महाकुंभ का पहला शाही स्नान है। हरिद्वार में हरकी पौड़ी पर शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। आईजी कुंभ संजय गुंज्याल का दावा है कि बुधवार रात 12 बजे से अब तक 22 लाख से ज्यादा लोगों ने स्नान किया है।

संतों के स्नान से पहले सुबह करीब सात बजे हरकी पैड़ी घाट खाली करवा दिया गया। सुबह 11 बजे से अखाड़ों के संत स्नान करेंगे। हालांकि तभी से शाही स्नान की शुरुआत मानी जाएगी। श्रद्धालु हरकी पैड़ी क्षेत्र छोड़कर अन्य घाटों पर स्नान करेंगे।

महाशिवरात्रि पर्व और महाकुंभ के पहले शाही स्नान पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा है। देर रात से हाईवे जाम हैं और श्रद्धालु पैदल गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं। सुबह तड़के से ही हरकी पैड़ी पर जबरदस्त भीड़ लगी है।

श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर डुबकी लगाकर भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। सुबह 11:00 बजे से हरकी पैड़ी पर ब्रह्मकुंड में संतों का शाही होगा। संतों के स्नान शुरू होने पर हरकी पैड़ी के घाटों पर श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया।

दशनामी संन्यासी अखाड़ों के स्नान से पहले ही हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ गई। पुलिस को हरकी पैड़ी से लेकर हाईवे तक भीड़ से जूझना पड़ रहा है। सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक दसनामी सन्यासी अखाड़ों के साधु संत महामंडलेश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्नान करेंगे।

आज है तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी व्रत, जानें पूजा का समय और विधि

25-Nov-2020

आज तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी है। कहते हैं कि कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि चतुर्मास की निद्रा से जागते हैं, इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से ही हिन्दू धर्म में शुभ कार्य जैसे विवाह आदि शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम का देवी तुलसी से विवाह होने की परंपरा भी है। माना जाता है कि जो भक्त देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है। वहीं एकादशी व्रत को लेकर मान्यता है कि साल के सभी 24 एकादशी व्रत करने पर लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राम दे दिया था कि तुम काला पत्थर बन जाओगे। इसी श्राप की मुक्ति के लिए भगवान ने शालीग्राम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह कर लिया। वहीं तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। हालांकि कई लोग तुलसी विवाह एकादशी को करते है तो कहीं द्वादशी के दिन तुलसी विवाह होता है। ऐसे में एकादशी और द्वादशी दोनों तिथियों का समय तुलसी विवाह के लिए तय किया गया है।

तुलसी विवाह की पूजा विधि :

एक चौकी पर तुलसी का पौधा और दूसरी चौकी पर शालिग्राम को स्थापित करें। इनके बगल में एक जल भरा कलश रखें और उसके ऊपर आम के पांच पत्ते रखें। तुलसी के गमले में गेरू लगाएं और घी का दीपक जलाएं। तुलसी और शालिग्राम पर गंगाजल का छिड़काव करें और रोली, चंदन का टीका लगाएं। तुलसी के गमले में ही गन्ने से मंडप बनाएं। अब तुलसी को सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी ओढ़ा दें। गमले को साड़ी लपेट कर, चूड़ी चढ़ाएं और उनका दुल्हन की तरह श्रृंगार करें। इसके बाद शालिग्राम को चौकी समेत हाथ में लेकर तुलसी की सात बार परिक्रमा की जाती है। इसके बाद आरती करें। तुलसी विवाह संपन्न होने के बाद सभी लोगों को प्रसाद बांटे।

  • एकादशी तिथि और तुलसी विवाह का समय-एकादशी तिथि प्रारंभ- 25 नवंबर 2020, बुधवार को सुबह 2।42 बजे से

  • एकादशी तिथि समाप्त- 26 नवंबर 2020, गुरुवार को सुबह 5।10 बजे तक

  • द्वादशी तिथि प्रारंभ- 26 नवंबर 2020, गुरुवार को सुबह 5।10 बजे से

  • द्वादशी तिथि समाप्त- 27 नवंबर 2020, शुक्रवार को सुबह 7।46 बजे तक

  • एकादशी व्रत और पूजा विधि-

  • -एकादशी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और व्रत का संकल्प लें।

  • -इसके बाद भगवान विष्णु की अराधना करें।

  • -भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं। फिर उन्हें फल, फूल और भोग अर्पित करें।

  • -मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करनी चाहिए।

  • -शाम को विष्णु जी की अराधना करते हुए विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।

  • -एकादशी के दिन पूर्व संध्या को व्रती को सिर्फ सात्विक भोजन करना चाहिए।

  • -एकादशी के दिन व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता है।

  • -एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है।

  • -एकादशी का व्रत खोलने के बाद ब्राहम्णों को दान-दक्षिणा जरूर दें।

छठ पूजा: आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे व्रती, छठ पूजा का शुभ मुहूर्त

20-Nov-2020

सूर्य की आस्था का महापर्व छठ पूजा का प्रारंभ बुधवार से हो चुका है। आज खरना है।नहाय-खाय से व्रती अपने व्रत का आगाज करते हैं। छठ पूजा बिहार समेत देश के कई बड़े शहरों में मनाया जाता है। यह व्रत सभी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है क्यों​कि यह व्रत 36 घंटे तक निर्जला रखना होता है। छठ पूजा के व्रत का नियम भी सभी व्रतों से अलग होता है। आप यदि छठ पूजा का व्रत रखते हैं, तो आपको इसके नियमों की जानकारी होनी चाहिए। नियमपूर्वक व्रत न करने से छठी मैया और सूर्य देव का आशीष प्राप्त नहीं होता है और व्रत भी निष्फल हो जाता है। छठ पूजा का व्रत संतान प्राप्ति, उसकी सुरक्षा तथा सफल जीवन के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि राजा सगर ने सूर्य षष्ठी का व्रत सही से नहीं किया था, जिसके प्रभाव से ही उनके 60 हजार पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुए।

छठ पूजा का शुभ मुहूर्त (Chhath Puja Ka Shubh Muhurat)

20 नवंबर 2020, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

सूर्यास्त टाइम - 5:26 pm (दिल्ली में)

सूर्यास्त टाइम - 4:59 pm (पटना में)

21 नवंबर 2020, उगते सूर्य को अर्घ्य

सूर्योदय टाइम- 6:49 am (दिल्ली में)

सूर्योदय टाइम- 6:11 am (पटना में)

छठ पूजा व्रत के नियम

1. 4 दिनों की छठ पूजा का व्रत रखने वाले व्यक्ति को पलंग या तखत पर सोने की मनाही होती है। वह जमीन पर चटाई बिछाकर सो सकता है तथा कंबल आदि का प्रयोग कर सकता है।

2. व्रती को चारों दिन नए और साफ वस्त्र पहनना होता है। इसमें भी इस बात का ध्यान दिया जाता है कि वे वस्त्र सिले न हों। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनते हैं। हालांकि आजकल लोग कोई भी वस्त्र पहन लेते हैं।

3. व्रत रखने वाले शख्स को मांस, मदिरा, झूठी बातें, काम, क्रोध, लोभ, धूम्रपान आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

4. आप छठ पूजा का व्रत रखते हैं तो परिवार के सभी सदस्य को तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इन चार दिनों में सात्विक भोजन ही करें।

5. छठ पूजा के व्रत में बांस के सूप का प्रयोग होता है। सूर्य देव की जब संध्या त​था प्रात:काल की पूजा होती है, तो उस समय सूप में ही पूजन सामग्री रखकर उनको अर्पित किया जाता है।

6. छठ पूजा में छठी मैया तथा भगवान भास्कर को ठेकुआ तथा कसार (चावल के आटे के लड्डू) का भोग लगाना चाहिए।

7. छठी मैया की पूजा का व्रत साफ-सफाई का है। पहले दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई की जाती है। घाटों की भी सफाई की जाती है।

8. छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए गन्ने का प्रयोग अवश्य करें। इसमें पत्ते वाले गन्ने का उपयोग किया जाता है।

आज है भैया दूज, जानिए भाई को टीका लगाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताएं

16-Nov-2020

स्नेह, सौहार्द का प्रतीक भैया दूज दीपोत्सव के अंतिम दिन यानी सोमवार को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा उपरांत द्वितीया को अनुराधा नक्षत्र में मनाया जाएगा। बहनें व्रत, पूजा, कथा आदि कर भाई की लंबी उम्र की कामना करेंगी। उनके माथे पर तिलक लगाएंगी। इसके बदले भाई भी उनकी रक्षा का संकल्प लेते हुए उपहार देते हैं। यह त्योहार रक्षाबंधन की तरह ही महत्व रखता है। सोमवार की सुबह 8 :52 बजे तक राहुकाल रहेगा तथा द्वितीया तिथि की शुरुआत 09:11 बजे से हो रही है, इसीलिए बहनें इसके बाद पूजा या भाई को टीका लगाएंगी।

भाई की सलामती को रखेंगी व्रत-:
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि सोमवार को जहां बहनें अपने भाई के लिए भाई दूज का पर्व मनाएंगी, वहीं कायस्थ समुदाय के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि विधान से मनाएंगे।
इस दिन यमुना नदी में स्नान कर श्रद्धालु यम का तर्पण एवं गोवर्धन देव की पूजन करेंगे। पंडित झा ने स्कन्द पुराण का हवाला देते हुए कहा कि इस दिन भाई को बहन के घर भोजन करना और उन्हेंं उपहार देने अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से यम के दुष्प्रभाव भी कम हो जाता है।

चौमुखी दीपक से दूर होंगे यमराज-:
पंडित झा ने कहा कि बहन सायंकाल गोधूलि बेला में यमराज के नाम से चौमुखी दीया जलाकर घर के बाहर रखती है जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है। इससे मान्यता है कि भाई के प्राण की रक्षा होती है। भाई का चतुॢदक विकास होता है। दैहिक, दैविक और भौतिक संतापों से भाई की सुरक्षा होती है। दीपक प्रकाश देते हुए सभी प्रकार के तम को दूर करता है। इस प्रकार यह पर्व बहुत ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है। भाई बहन का यह पर्व दीपों के पर्व का उपसंहार है।

भाई दूज पूजन का शुभ मुहूर्त-:

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:13 से 11:56 बजे तक
गुली काल मुहूर्त : दोपहर 12:56 से 02:17 बजे तक
शुभ मुहूर्त: मध्य काल 12:56 से शाम 03:06 बजे तक

आज है गोवर्धन पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि और अन्नकूट का महत्व

15-Nov-2020

Govardhan Puja या Annakoot Utsav, दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाए जाने की परंपरा रही है। गोवर्धन पूजा यानी अन्नकूट को दिवाली के अगले दिन मनाते हैं। गोवर्धन पर्वत या गिरिराज पर्वत को भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली से ऊपर उठाकर भारी बारिश से बृजवासियों के प्राणों की रक्षा की थी। तभी से गोवर्धन पूजा शुरू की जाने लगी। भगवान श्री कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा करने के लिए कहा था। गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन सुबह जल्दी की जाती है।

गोवर्द्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त : गोवर्द्धन पूजा / अन्नकूट की तिथि: 15 नवंबर 2020 प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 15 नवंबर 2020 को सुबह 10 बजकर 36 मिनट से प्रतिपदा तिथि समाप्त: 16 नवंबर 2020 को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक गोवर्द्धन पूजा सांयकाल मुहूर्त: 15 नवंबर 2020 को दोपहर 03 बजकर 19 मिनट से शाम 05 बजकर 27 मिनट तक कुल अवधि: 02 घंटे 09 मिनट

अन्नकूट क्या है : अन्नकूट पर भगवान कृष्ण को अलग तरह के पकवान चढ़ाए जाते हैं, इस दिन कृष्ण को भोग लगाए जाते हैं। मान्यताओं के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से अन्नकूट और गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई। एक और मान्यता है कि एक बार इंद्र अभिमान में चूर हो गए और सात दिन तक लगातार बारिश करने लगे। तब भगवान श्री कृष्ण ने उनके अहंकार को तोड़ने और जनता की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को ही अंगुली पर उठा लिया था और तभी से गोवर्धन की पूजा होती है।

गोवर्धन पूजा की कहानी : भगवान श्री कृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र की पूजा करते हुए देखा तो उनके मन में इसके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। श्री कृष्ण की मां भी इंद्र की पूजा कर रही थीं। कृष्ण ने इसका कारण पूछा तब बताया गया कि इंद्र बारिश करते हैं, तब खेतों में अन्न होता है और हमारी गायों को चारा मिलता है। इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि हमारी गायें तो गोवर्धन पर्वत पर ही रहती हैं इसलिए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए। इस पर बृजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी तब इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। चारों तरफ पानी के कारण बृजवासियों की जान बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। लोगों ने उसके नीचे शरण लेकर अपनी जान बचाई। इंद्र को जब पता चला कि कृष्ण ही विष्णु अवतार हैं, तब उन्होंने उनसे माफी मांगी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के लिए कहा और इसे अन्नकुट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा।भगवान श्री कृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र की पूजा करते हुए देखा तो उनके मन में इसके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। श्री कृष्ण की मां भी इंद्र की पूजा कर रही थीं। कृष्ण ने इसका कारण पूछा तब बताया गया कि इंद्र बारिश करते हैं, तब खेतों में अन्न होता है और हमारी गायों को चारा मिलता है। इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि हमारी गायें तो गोवर्धन पर्वत पर ही रहती हैं इसलिए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए। इस पर बृजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी तब इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। चारों तरफ पानी के कारण बृजवासियों की जान बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। लोगों ने उसके नीचे शरण लेकर अपनी जान बचाई। इंद्र को जब पता चला कि कृष्ण ही विष्णु अवतार हैं, तब उन्होंने उनसे माफी मांगी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के लिए कहा और इसे अन्नकुट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा।


Previous12345Next