गुडरूडीह जंगल में हो रहे मुरूम उत्खनन का सीमांकन जरूरी
गुडरूडीह जंगल में हो रहे मुरूम उत्खनन का सीमांकन जरूरी
-विनोद चंद्राकर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद, 20 अप्रैल। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने गुडरूडीह क्षेत्र में प्रस्तावित क्षेत्रफल से अधिक मुरूम उत्खनन किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जारी विज्ञप्ति में कहा कि भारतमाला परियोजना के तहत सडक़ निर्माण कार्य के लिए गुडरूडीह-तुमगांव क्षेत्र के जंगलों से मुरूम निकाला जा रहा है, जबकि स्वीकृत मात्रा से अधिक क्षेत्र में उत्खनन किया गया है।
उन्होंने बताया कि कंपनी को निर्धारित घनमीटर के अनुसार अनुमति दी गई थी, लेकिन इससे अधिक क्षेत्र में खुदाई किए जाने की जानकारी मिली है। साथ ही अन्य स्थानों पर भी उत्खनन किए जाने की बात कही गई है, जो वन विकास निगम की भूमि बताई गई है।
उनके अनुसार, इस उत्खनन से राजस्व हानि होने की आशंका है। संबंधित क्षेत्र का सीमांकन किए जाने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने खनिज विभाग की भूमिका की जांच की आवश्यकता भी जताई है।
उन्होंने कहा कि उत्खनन स्थल पर गहराई अधिक होने के कारण दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। क्षेत्र वन क्षेत्र होने के कारण वन्य जीवों के लिए भी जोखिम बताया गया है।उन्होंने मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
-विनोद चंद्राकर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद, 20 अप्रैल। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने गुडरूडीह क्षेत्र में प्रस्तावित क्षेत्रफल से अधिक मुरूम उत्खनन किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जारी विज्ञप्ति में कहा कि भारतमाला परियोजना के तहत सडक़ निर्माण कार्य के लिए गुडरूडीह-तुमगांव क्षेत्र के जंगलों से मुरूम निकाला जा रहा है, जबकि स्वीकृत मात्रा से अधिक क्षेत्र में उत्खनन किया गया है।
उन्होंने बताया कि कंपनी को निर्धारित घनमीटर के अनुसार अनुमति दी गई थी, लेकिन इससे अधिक क्षेत्र में खुदाई किए जाने की जानकारी मिली है। साथ ही अन्य स्थानों पर भी उत्खनन किए जाने की बात कही गई है, जो वन विकास निगम की भूमि बताई गई है।
उनके अनुसार, इस उत्खनन से राजस्व हानि होने की आशंका है। संबंधित क्षेत्र का सीमांकन किए जाने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने खनिज विभाग की भूमिका की जांच की आवश्यकता भी जताई है।
उन्होंने कहा कि उत्खनन स्थल पर गहराई अधिक होने के कारण दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। क्षेत्र वन क्षेत्र होने के कारण वन्य जीवों के लिए भी जोखिम बताया गया है।उन्होंने मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।