मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर प्रगति कॉलेज में मनोवैज्ञानिक कार्यशाला आयोजित
मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर प्रगति कॉलेज में मनोवैज्ञानिक कार्यशाला आयोजित
रायपुर, 30 मार्च। प्रगति कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सौम्या नैयर ने बताया कि चौबे कालोनी, रायपुर में दो दिवसीय कार्य शाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.रोली तिवारी (सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग, पं. रविशंकर शुुक्ल वि.वि., रायपुर) एवं डॉ. दिप्ती दुबे (मनोवैज्ञानिक,राजनेता,शिक्षाविद्) उपस्थित हुए। सर्वप्रथम सरस्वती पूजा एवं दीप प्रज्वल्लन कर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
डॉ. नैयर ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबधन दोनो विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जो हमारे समग्र विकास और सफलता को प्रभावित करता है। आज के युग में भौतिकवादिता के पीछे भागना आम बात र्है जो तनाव को जन्म देता है इसलिए तनाव प्रबंधन भी आवश्यक है, आगे उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न दायित्वो के साथ-साथ पढ़ाई करना भी मानसिक तनाव को बढ़ा देता है, इसलिए आप अपनी क्षमताओं को पहचान कर कार्य करें, दूसरों के नकल न करें। अगर जीवन में किसी इच्छा की पुर्ति नही हो पाए तो निराश नहीं होना चाहिए।
डॉ. नैयर ने बताया कि प्रथम दिवस पर डॉ. रोली तिवारी द्वारा अपने विचार व्यक्त किए गए। उन्होंंने मानसिक स्वास्थ्य पर मनोवैज्ञानिक कार्यषाला की शुरूआत प्रश्नोत्तरी के माध्यम से की। हमारे जीवन में संवेगों का बहुत प्रभावों पड़ता है। संवेगां को संतुलित रखना आवश्यक है यदि संवेंग स्वयं पर हावी हो गए तो व्यक्ति में।
रायपुर, 30 मार्च। प्रगति कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सौम्या नैयर ने बताया कि चौबे कालोनी, रायपुर में दो दिवसीय कार्य शाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.रोली तिवारी (सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग, पं. रविशंकर शुुक्ल वि.वि., रायपुर) एवं डॉ. दिप्ती दुबे (मनोवैज्ञानिक,राजनेता,शिक्षाविद्) उपस्थित हुए। सर्वप्रथम सरस्वती पूजा एवं दीप प्रज्वल्लन कर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
डॉ. नैयर ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबधन दोनो विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जो हमारे समग्र विकास और सफलता को प्रभावित करता है। आज के युग में भौतिकवादिता के पीछे भागना आम बात र्है जो तनाव को जन्म देता है इसलिए तनाव प्रबंधन भी आवश्यक है, आगे उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न दायित्वो के साथ-साथ पढ़ाई करना भी मानसिक तनाव को बढ़ा देता है, इसलिए आप अपनी क्षमताओं को पहचान कर कार्य करें, दूसरों के नकल न करें। अगर जीवन में किसी इच्छा की पुर्ति नही हो पाए तो निराश नहीं होना चाहिए।
डॉ. नैयर ने बताया कि प्रथम दिवस पर डॉ. रोली तिवारी द्वारा अपने विचार व्यक्त किए गए। उन्होंंने मानसिक स्वास्थ्य पर मनोवैज्ञानिक कार्यषाला की शुरूआत प्रश्नोत्तरी के माध्यम से की। हमारे जीवन में संवेगों का बहुत प्रभावों पड़ता है। संवेगां को संतुलित रखना आवश्यक है यदि संवेंग स्वयं पर हावी हो गए तो व्यक्ति में।