वन-राजस्व भूमि सोसायटी माड्यूल में रकबा प्रदर्शित नहीं, सैकड़ों किसान पहुंचे तहसील दफ्तर,कलेक्टर को ज्ञापन
वन-राजस्व भूमि सोसायटी माड्यूल में रकबा प्रदर्शित नहीं, सैकड़ों किसान पहुंचे तहसील दफ्तर,कलेक्टर को ज्ञापन
कहा-धान नहीं बेच पाये तो कर्ज कैसे चुकाएंगे
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद, 25 नवंबर। वन एवं राजस्व भूमि सोसायटी माड्यूल में एक साथ रकबा प्रदर्शित नहीं होने की वजह से वन ग्राम के किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। शासन के पोर्टल में वन ग्रामों की कृषि भूमि का रकबा दिखाई ही नहीं दे रहा है। इसे लेकर कल महासमुंद तथा बागबाहरा ब्लॉक के सैकड़ों की संख्या में किसान तहसील दफ्तर पहुंचकर एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता धान बेचने में समाप्त करने की मांग कर रहे थे।
किसानों का कहना है कि उनकी वन भूमि पर उन्हें खाद बीज तथा नगद ऋण मिला है। यदि वे धान नहीं बेच पायेंगे तो कर्ज तले दब जायेंगे। कर्ज चुकाने में असमर्थ होने के बाद बैंक उन पर अनाप-शनाप ब्याज ठोक देगी। ऐसे में वे कहीं के नहीं रहेंगे। यह केवल किसानों की समस्या नहीं है। बल्कि जिले भर के वन ग्रामों के किसानों की है।
किसानों ने पहले तहसील दफ्तर में जाकर गुहार लगाई। बाद प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से मुलाकात कर समस्या का समाधान की मांग की है। बताया कि बीते वर्ष भी यही स्थिति निर्मित होने के बाद किसानों ने एनआईसी से पत्र व्यवहार किया था तब जाकर धान बेच पाये थे। इस बार भी किसानों ने इस संबंध में राज्यपाल के नाम पत्र व्यवहार किया है।
बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम जोगीडीपा, चोरभ_ी, बैहाडीहा, कोकनाझार,बोड़ाबांधा, जिंदीला, डुमरडीह, खम्हरिया, तमोरी, तमोरा, आमाकोनी, नवाडीह, धौराभांठा, कुरूभांठा के किसान गुहार लगाने पहुंचे थे। किसानों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वे वर्षों से पंजीयन कर धान विक्रय करते आ रहे हैं। वर्ष 2025-26 शासन के निर्धारित नियमानुसार एग्रीस्टंग पंजीयन के आदेश पर किसानों ने पालन भी किया। किसानों का आधा से एक एकड़ राजस्व भूमि है तो एक से ढाई एकड़ वन भूमि है। राजस्व भूमि तो पोर्टल में दिखा रहा है। वर्तमान में राजस्व भूमि एवं वन भूमि रकबा एक है लेकिन सोसायटी माङयूल साथ प्रदर्शित नहीं होने की वजह सोसायटी से धान विक्रय के लिये टोकन नहीं मिल परहा है। ऐसे में उन्हें धान विक्रय में परेशानी हो रही है। किसानों ने मांग की है कि माडमूल को दुरूस्त कर किसानों के वन भूमि के रकबों को पोर्टल में जोड़ा जाय ताकि किसानों का धान बिक सके।
कहा-धान नहीं बेच पाये तो कर्ज कैसे चुकाएंगे
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद, 25 नवंबर। वन एवं राजस्व भूमि सोसायटी माड्यूल में एक साथ रकबा प्रदर्शित नहीं होने की वजह से वन ग्राम के किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। शासन के पोर्टल में वन ग्रामों की कृषि भूमि का रकबा दिखाई ही नहीं दे रहा है। इसे लेकर कल महासमुंद तथा बागबाहरा ब्लॉक के सैकड़ों की संख्या में किसान तहसील दफ्तर पहुंचकर एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता धान बेचने में समाप्त करने की मांग कर रहे थे।
किसानों का कहना है कि उनकी वन भूमि पर उन्हें खाद बीज तथा नगद ऋण मिला है। यदि वे धान नहीं बेच पायेंगे तो कर्ज तले दब जायेंगे। कर्ज चुकाने में असमर्थ होने के बाद बैंक उन पर अनाप-शनाप ब्याज ठोक देगी। ऐसे में वे कहीं के नहीं रहेंगे। यह केवल किसानों की समस्या नहीं है। बल्कि जिले भर के वन ग्रामों के किसानों की है।
किसानों ने पहले तहसील दफ्तर में जाकर गुहार लगाई। बाद प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से मुलाकात कर समस्या का समाधान की मांग की है। बताया कि बीते वर्ष भी यही स्थिति निर्मित होने के बाद किसानों ने एनआईसी से पत्र व्यवहार किया था तब जाकर धान बेच पाये थे। इस बार भी किसानों ने इस संबंध में राज्यपाल के नाम पत्र व्यवहार किया है।
बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम जोगीडीपा, चोरभ_ी, बैहाडीहा, कोकनाझार,बोड़ाबांधा, जिंदीला, डुमरडीह, खम्हरिया, तमोरी, तमोरा, आमाकोनी, नवाडीह, धौराभांठा, कुरूभांठा के किसान गुहार लगाने पहुंचे थे। किसानों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वे वर्षों से पंजीयन कर धान विक्रय करते आ रहे हैं। वर्ष 2025-26 शासन के निर्धारित नियमानुसार एग्रीस्टंग पंजीयन के आदेश पर किसानों ने पालन भी किया। किसानों का आधा से एक एकड़ राजस्व भूमि है तो एक से ढाई एकड़ वन भूमि है। राजस्व भूमि तो पोर्टल में दिखा रहा है। वर्तमान में राजस्व भूमि एवं वन भूमि रकबा एक है लेकिन सोसायटी माङयूल साथ प्रदर्शित नहीं होने की वजह सोसायटी से धान विक्रय के लिये टोकन नहीं मिल परहा है। ऐसे में उन्हें धान विक्रय में परेशानी हो रही है। किसानों ने मांग की है कि माडमूल को दुरूस्त कर किसानों के वन भूमि के रकबों को पोर्टल में जोड़ा जाय ताकि किसानों का धान बिक सके।