हाईकोर्ट: ड्यूटी पर पुलिसकर्मी को कुचलना प्रशासन पर सीधा हमला:हमले के आरोपी की जमानत निरस्त, वकील को नोटिस
हाईकोर्ट: ड्यूटी पर पुलिसकर्मी को कुचलना प्रशासन पर सीधा हमला:हमले के आरोपी की जमानत निरस्त, वकील को नोटिस
ग्वालियर में पुलिस आरक्षक रवि विमल पर हमले के मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी कार चालक मुनेन्द्र सिंह की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने आरोपों को प्रथम दृष्ट्या गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को कुचलने और वाहन के बोनट पर घसीटने जैसी घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। यह घटना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। देर रात ड्यूटी के दौरान हुई थी घटना अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के आचरण पर भी गंभीर आपत्ति जताई। न्यायालय ने उल्लेख किया कि अधिवक्ता को पहले भी आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया जा चुका है, और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था, केवल जुर्माने की राशि कम की गई थी। यह मामला 4-5 फरवरी 2026 की दरमियानी रात करीब 1:00 बजे का है। डीबी मॉल के सामने एनएसजी मॉक ड्रिल के दौरान ट्रैफिक ड्यूटी कर रहे एक आरक्षक को कार सवारों ने रोकने के संकेत के बावजूद टक्कर मार दी थी। आरोप है कि घायल आरक्षक को वाहन के बोनट पर कुछ दूरी तक घसीटा गया था। इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए, न्यायालय ने कार्यालय को अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। नियमों का उल्लंघन, बहस को भटकाने का प्रयास हाईकोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट (कंडीशंस ऑफ प्रैक्टिस) नियम, 2012 के नियम 16 के अनुसार, आपराधिक अवमानना का दोषी अधिवक्ता तब तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सकता, जब तक वह अवमानना आदेश का विधिवत पालन न कर ले। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अधिवक्ता ने जमानत के मूल मुद्दे से बहस को भटकाने, पहले से तय विषयों को दोहराने, उत्तेजक व संकेतात्मक टिप्पणियां करने का प्रयास किया, जो न्यायालय की गरिमा, अनुशासन और शिष्टाचार के विपरीत है।
ग्वालियर में पुलिस आरक्षक रवि विमल पर हमले के मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी कार चालक मुनेन्द्र सिंह की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने आरोपों को प्रथम दृष्ट्या गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को कुचलने और वाहन के बोनट पर घसीटने जैसी घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। यह घटना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। देर रात ड्यूटी के दौरान हुई थी घटना अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के आचरण पर भी गंभीर आपत्ति जताई। न्यायालय ने उल्लेख किया कि अधिवक्ता को पहले भी आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया जा चुका है, और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था, केवल जुर्माने की राशि कम की गई थी। यह मामला 4-5 फरवरी 2026 की दरमियानी रात करीब 1:00 बजे का है। डीबी मॉल के सामने एनएसजी मॉक ड्रिल के दौरान ट्रैफिक ड्यूटी कर रहे एक आरक्षक को कार सवारों ने रोकने के संकेत के बावजूद टक्कर मार दी थी। आरोप है कि घायल आरक्षक को वाहन के बोनट पर कुछ दूरी तक घसीटा गया था। इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए, न्यायालय ने कार्यालय को अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। नियमों का उल्लंघन, बहस को भटकाने का प्रयास हाईकोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट (कंडीशंस ऑफ प्रैक्टिस) नियम, 2012 के नियम 16 के अनुसार, आपराधिक अवमानना का दोषी अधिवक्ता तब तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सकता, जब तक वह अवमानना आदेश का विधिवत पालन न कर ले। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अधिवक्ता ने जमानत के मूल मुद्दे से बहस को भटकाने, पहले से तय विषयों को दोहराने, उत्तेजक व संकेतात्मक टिप्पणियां करने का प्रयास किया, जो न्यायालय की गरिमा, अनुशासन और शिष्टाचार के विपरीत है।