मऊगंज के कोढ़वा में जल संकट:महिलाएं 1 किमी दूर स्कूल से लाती हैं पानी; प्रशासन बोला- निपटने की तैयारी

मऊगंज जिले के हनुमना विकासखंड स्थित ग्राम कोढ़वा में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहरा गया है। गांव की महिलाओं की सुबह सूरज निकलने से पहले ही पानी की तलाश में शुरू हो जाती है। हाथों में बाल्टियां और बर्तन लेकर महिलाएं रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। गांव की स्थिति किसी सूखे इलाके जैसी दिखती है, जहां हर दिन पानी के लिए संघर्ष ग्रामीणों की दिनचर्या बन गया है। गांव के पथरीले भूभाग के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पूरे गांव और आसपास के इलाके में केवल एक सरकारी नल है, जिससे कुछ देर के लिए पानी आता है। यहां पानी भरने के लिए लंबी लाइन लगती है और एक बाल्टी पानी भरने में घंटों लग जाते हैं। कई बार ग्रामीणों को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव की प्यास अब स्कूल के भरोसे है। उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित सरकारी स्कूल के नल से पानी भरकर लाना पड़ता है। वहीं, गांव का तालाब पूरी तरह गंदगी से भर गया है। उसका पानी न तो पीने योग्य है और न ही पशुओं के उपयोग के लिए बचा है। ग्रामीण लालू यादव ने बताया कि गांव में पिछले 10 वर्षों से गर्मी के दिनों में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने पर स्थिति और बिगड़ जाती है। शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए भी दूर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। उनका आरोप है कि गांव की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। एक अन्य ग्रामीण मुन्नीलाल ने बताया कि गांव में करीब 30 से 40 घर हैं और पहाड़ी इलाका होने के कारण पानी की समस्या हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मंदिर के पास और स्कूल में लगे बोरवेल ही गांव का एकमात्र सहारा हैं। सुबह से ही लोग लाइन लगाते हैं, लेकिन पानी मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। उनका कहना है कि तालाब का पानी केवल नहाने तक सीमित है, पीने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी बर्तन ढोने के कारण महिलाएं शारीरिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वहीं कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय पानी भरने में परिवार की मदद करते नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार हर घर जल योजना के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन कोढ़वा गांव की तस्वीरें उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और लगातार निगरानी की जा रही है। पीएचई विभाग के एसडीओ संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि इलाके में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है, जिसके कारण समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि गांव के नजदीक मौजूद बोर से पाइपलाइन के माध्यम से एक अतिरिक्त स्टैंड पोस्ट लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि ग्रामीणों को कम दूरी तय करनी पड़े। उन्होंने माना कि जल संकट है, लेकिन विभाग समाधान के प्रयास कर रहा है। वहीं मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि जिले में कुछ स्थानों पर पानी की समस्या जरूर सामने आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने बताया कि जिन गांवों से शिकायतें आई हैं, वहां टीम भेजकर जांच कराई गई है। विशेष परिस्थिति ऐसी नहीं है, फिर भी प्रशासन स्थानीय जल स्रोतों और जल परिवहन के जरिए लोगों तक पानी पहुंचाने की तैयारी में है। उन्होंने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में काम चल रहा है और अगले महीने तक कई इलाकों में नल से पानी पहुंचने लगेगा। पूरे जिले में पर जल संकट को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। फिलहाल कोढ़वा गांव के लोग सिर्फ एक उम्मीद लगाए बैठे हैं—कि इस बार गर्मी गुजरने से पहले उनके घर तक पानी पहुंच जाए।

मऊगंज के कोढ़वा में जल संकट:महिलाएं 1 किमी दूर स्कूल से लाती हैं पानी; प्रशासन बोला- निपटने की तैयारी
मऊगंज जिले के हनुमना विकासखंड स्थित ग्राम कोढ़वा में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहरा गया है। गांव की महिलाओं की सुबह सूरज निकलने से पहले ही पानी की तलाश में शुरू हो जाती है। हाथों में बाल्टियां और बर्तन लेकर महिलाएं रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। गांव की स्थिति किसी सूखे इलाके जैसी दिखती है, जहां हर दिन पानी के लिए संघर्ष ग्रामीणों की दिनचर्या बन गया है। गांव के पथरीले भूभाग के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पूरे गांव और आसपास के इलाके में केवल एक सरकारी नल है, जिससे कुछ देर के लिए पानी आता है। यहां पानी भरने के लिए लंबी लाइन लगती है और एक बाल्टी पानी भरने में घंटों लग जाते हैं। कई बार ग्रामीणों को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव की प्यास अब स्कूल के भरोसे है। उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित सरकारी स्कूल के नल से पानी भरकर लाना पड़ता है। वहीं, गांव का तालाब पूरी तरह गंदगी से भर गया है। उसका पानी न तो पीने योग्य है और न ही पशुओं के उपयोग के लिए बचा है। ग्रामीण लालू यादव ने बताया कि गांव में पिछले 10 वर्षों से गर्मी के दिनों में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने पर स्थिति और बिगड़ जाती है। शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए भी दूर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। उनका आरोप है कि गांव की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। एक अन्य ग्रामीण मुन्नीलाल ने बताया कि गांव में करीब 30 से 40 घर हैं और पहाड़ी इलाका होने के कारण पानी की समस्या हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मंदिर के पास और स्कूल में लगे बोरवेल ही गांव का एकमात्र सहारा हैं। सुबह से ही लोग लाइन लगाते हैं, लेकिन पानी मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। उनका कहना है कि तालाब का पानी केवल नहाने तक सीमित है, पीने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी बर्तन ढोने के कारण महिलाएं शारीरिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वहीं कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय पानी भरने में परिवार की मदद करते नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार हर घर जल योजना के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन कोढ़वा गांव की तस्वीरें उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और लगातार निगरानी की जा रही है। पीएचई विभाग के एसडीओ संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि इलाके में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है, जिसके कारण समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि गांव के नजदीक मौजूद बोर से पाइपलाइन के माध्यम से एक अतिरिक्त स्टैंड पोस्ट लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि ग्रामीणों को कम दूरी तय करनी पड़े। उन्होंने माना कि जल संकट है, लेकिन विभाग समाधान के प्रयास कर रहा है। वहीं मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि जिले में कुछ स्थानों पर पानी की समस्या जरूर सामने आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने बताया कि जिन गांवों से शिकायतें आई हैं, वहां टीम भेजकर जांच कराई गई है। विशेष परिस्थिति ऐसी नहीं है, फिर भी प्रशासन स्थानीय जल स्रोतों और जल परिवहन के जरिए लोगों तक पानी पहुंचाने की तैयारी में है। उन्होंने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में काम चल रहा है और अगले महीने तक कई इलाकों में नल से पानी पहुंचने लगेगा। पूरे जिले में पर जल संकट को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। फिलहाल कोढ़वा गांव के लोग सिर्फ एक उम्मीद लगाए बैठे हैं—कि इस बार गर्मी गुजरने से पहले उनके घर तक पानी पहुंच जाए।