सपा प्रदेशाध्यक्ष बोले-छतरपुर में 30 हजार करोड़ का ग्रेनाइट घोटाला:भोपाल में कहा- हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद भी अफसर खनन कारोबारी को बचाने में लगे

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने छतरपुर जिले में कथित अवैध ग्रेनाइट खनन, राजस्व हेराफेरी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में सरकार से तत्काल जांच कराने की मांग की है। सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा इस मामले में खनन करने वाली कंपनी से वसूली के लिए आदेश दिए गए थे, इसके बावजूद कंपनी को अफसर बचाने में जुटे हैं। भोपाल में सपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डॉ मनोज यादव ने कहा- इस अवैध ग्रेनाइट खनन, राजस्व हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। याचिका में 1997 से चल रहे अवैध खनन से 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संभावित राजस्व हानि का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। भैरा के सरपंच और स्थानीय पत्रकार ने लगाई हाईकोर्ट में याचिका यह जनहित याचिका क्रमांक 41873/2025 ग्राम पंचायत भैरा (छतरपुर) के सरपंच शिवराम दीक्षित और पत्रकार दिलीप सिंह भदौरिया ने दायर की है। याचिका में विनोद खेड़िया और उसकी कंपनी किसान मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड पर ग्राम मड़वा, सिलपतपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में 28 सालों से अवैध खनन करने का आरोप लगाया गया है। जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट की शर्तें पूरी नहीं करने का आरोप सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- याचिका के अनुसार 1997 में मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन और कंपनी के बीच जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें 200% लोकल डेवलपमेंट फीस (रॉयल्टी) देने, बैंक गारंटी जमा करने और प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की शर्त थी। आरोप है कि कंपनी ने इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं की, फिर भी खनन जारी रहा। रॉयल्टी दर बढ़ने के बाद भी कम दर पर खनन याचिका में कहा गया है कि 2005 में गजट नोटिफिकेशन के बाद ब्लैक ग्रेनाइट की रॉयल्टी दर 1500 रुपए प्रति घन मीटर कर दी गई थी, लेकिन कंपनी को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध लगभग 800 रुपए प्रति घन मीटर की दर पर लाभ दिया गया। 2007-08 में रिकवरी नोटिस जारी होने के बावजूद वसूली नहीं होने का भी आरोप है। जांच में हजारों घन मीटर अवैध खनन सामने आया 2021 में गठित जांच समिति के पंचनामा में मड़वा-सिलपतपुरा क्षेत्र में 5685 घन मीटर खनन पाया गया। 6 मीटर गहराई पर इसका मूल्यांकन 18.37 करोड़ रुपए किया गया, जबकि वास्तविक गहराई 40-50 मीटर तक होने का अनुमान लगाते हुए नुकसान सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपए बताया गया है। याचिका में कुल हेराफेरी 30 हजार करोड़ रुपए तक होने का दावा किया गया है। घनी आबादी और स्कूल-मंदिर के पास खनन का आरोप याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि खनन गतिविधियां घनी आबादी, स्कूल और मंदिर से 500 मीटर के दायरे में विस्फोटकों के उपयोग के साथ चल रही हैं। इससे आसपास के लगभग 10 हजार लोग प्रभावित बताए गए हैं, जबकि संबंधित ग्राम पंचायत की आबादी करीब 3 हजार है। हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, खनन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब और रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि जवाब मिलने के बाद आगे स्वतंत्र जांच, कार्रवाई या अन्य आदेशों पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है और सुनवाई जारी है। CBI जांच और कार्रवाई की मांग हाईकोर्ट से याचिका में यह मांग की गई है कि पूरे मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच, दोषियों पर आपराधिक प्रकरण, राजस्व हानि की वसूली, प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा और जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने छतरपुर जिले में कथित अवैध ग्रेनाइट खनन, राजस्व हेराफेरी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में सरकार से तत्काल जांच कराने की मांग की है। सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा इस मामले में खनन करने वाली कंपनी से वसूली के लिए आदेश दिए गए थे, इसके बावजूद कंपनी को अफसर बचाने में जुटे हैं। भोपाल में सपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डॉ मनोज यादव ने कहा- इस अवैध ग्रेनाइट खनन, राजस्व हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। याचिका में 1997 से चल रहे अवैध खनन से 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संभावित राजस्व हानि का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। भैरा के सरपंच और स्थानीय पत्रकार ने लगाई हाईकोर्ट में याचिका यह जनहित याचिका क्रमांक 41873/2025 ग्राम पंचायत भैरा (छतरपुर) के सरपंच शिवराम दीक्षित और पत्रकार दिलीप सिंह भदौरिया ने दायर की है। याचिका में विनोद खेड़िया और उसकी कंपनी किसान मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड पर ग्राम मड़वा, सिलपतपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में 28 सालों से अवैध खनन करने का आरोप लगाया गया है। जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट की शर्तें पूरी नहीं करने का आरोप सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- याचिका के अनुसार 1997 में मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन और कंपनी के बीच जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें 200% लोकल डेवलपमेंट फीस (रॉयल्टी) देने, बैंक गारंटी जमा करने और प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की शर्त थी। आरोप है कि कंपनी ने इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं की, फिर भी खनन जारी रहा। रॉयल्टी दर बढ़ने के बाद भी कम दर पर खनन याचिका में कहा गया है कि 2005 में गजट नोटिफिकेशन के बाद ब्लैक ग्रेनाइट की रॉयल्टी दर 1500 रुपए प्रति घन मीटर कर दी गई थी, लेकिन कंपनी को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध लगभग 800 रुपए प्रति घन मीटर की दर पर लाभ दिया गया। 2007-08 में रिकवरी नोटिस जारी होने के बावजूद वसूली नहीं होने का भी आरोप है। जांच में हजारों घन मीटर अवैध खनन सामने आया 2021 में गठित जांच समिति के पंचनामा में मड़वा-सिलपतपुरा क्षेत्र में 5685 घन मीटर खनन पाया गया। 6 मीटर गहराई पर इसका मूल्यांकन 18.37 करोड़ रुपए किया गया, जबकि वास्तविक गहराई 40-50 मीटर तक होने का अनुमान लगाते हुए नुकसान सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपए बताया गया है। याचिका में कुल हेराफेरी 30 हजार करोड़ रुपए तक होने का दावा किया गया है। घनी आबादी और स्कूल-मंदिर के पास खनन का आरोप याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि खनन गतिविधियां घनी आबादी, स्कूल और मंदिर से 500 मीटर के दायरे में विस्फोटकों के उपयोग के साथ चल रही हैं। इससे आसपास के लगभग 10 हजार लोग प्रभावित बताए गए हैं, जबकि संबंधित ग्राम पंचायत की आबादी करीब 3 हजार है। हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, खनन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब और रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि जवाब मिलने के बाद आगे स्वतंत्र जांच, कार्रवाई या अन्य आदेशों पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है और सुनवाई जारी है। CBI जांच और कार्रवाई की मांग हाईकोर्ट से याचिका में यह मांग की गई है कि पूरे मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच, दोषियों पर आपराधिक प्रकरण, राजस्व हानि की वसूली, प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा और जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई है।