36 मिनट बिजली गुल रही...80 लीटर तेल पी गया जनरेटर:हरदा मंडी में डीजल घोटाला, लॉग बुक में सितंबर 2024 के बाद एंट्री ही नहीं

हरदा जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी में जनरेटर के नाम पर हजारों रुपये के डीजल की खपत का मामला सामने आया है। मंडी प्रबंधन और विद्युत वितरण कंपनी के आंकड़ों में भारी विरोधाभास ने भ्रष्टाचार की आशंका पैदा कर दी है। मंडी प्रबंधन ने नवंबर 2025 में महज 36 मिनट बिजली गुल रहने पर 80 लीटर डीजल खर्च होना बताया है। वहीं, किसानों और हम्मालों का कहना है कि उन्होंने जनरेटर को शायद ही कभी चलते देखा है। मंडी कार्यालय के दावे के अनुसार, उनका जनरेटर 3 घंटे चलने पर 20 लीटर डीजल की खपत करता है। लेकिन विद्युत वितरण कंपनी और मंडी के आंकड़ों की तुलना करने पर बड़ा फर्जीवाड़ा नजर आता है… लॉग बुक खाली, सचिव को चालू-बंद का भी पता नहीं इस मामले में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि जनरेटर चालू होने और डीजल खपत की लॉग बुक में सितंबर 2024 के बाद से कोई एंट्री ही दर्ज नहीं है। जब इस विसंगति और डीजल खपत को लेकर मंडी सचिव हरनारायण भिलाला से सवाल किया गया, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब दिया कि "जब भी बिजली जाती है, जनरेटर चालू किया जाता है।" हैरानी की बात यह है कि सचिव को यह तक नहीं पता था कि जनरेटर वर्तमान में चालू हालत में है भी या नहीं। किसान बोले- लाइट जाती है तो अंधेरे में ही रहते हैं मंडी में उपज बेचने आने वाले किसानों और काम करने वाले हम्मालों का अनुभव कागजी दावों से बिल्कुल अलग है। उनका आरोप है कि उन्होंने मंडी में जनरेटर को चलते हुए कभी नहीं देखा। जब भी बिजली जाती है, उन्हें अंधेरे में ही रहना पड़ता है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में जनरेटर चलाकर हजारों का डीजल फूंका जा रहा है।

36 मिनट बिजली गुल रही...80 लीटर तेल पी गया जनरेटर:हरदा मंडी में डीजल घोटाला, लॉग बुक में सितंबर 2024 के बाद एंट्री ही नहीं
हरदा जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी में जनरेटर के नाम पर हजारों रुपये के डीजल की खपत का मामला सामने आया है। मंडी प्रबंधन और विद्युत वितरण कंपनी के आंकड़ों में भारी विरोधाभास ने भ्रष्टाचार की आशंका पैदा कर दी है। मंडी प्रबंधन ने नवंबर 2025 में महज 36 मिनट बिजली गुल रहने पर 80 लीटर डीजल खर्च होना बताया है। वहीं, किसानों और हम्मालों का कहना है कि उन्होंने जनरेटर को शायद ही कभी चलते देखा है। मंडी कार्यालय के दावे के अनुसार, उनका जनरेटर 3 घंटे चलने पर 20 लीटर डीजल की खपत करता है। लेकिन विद्युत वितरण कंपनी और मंडी के आंकड़ों की तुलना करने पर बड़ा फर्जीवाड़ा नजर आता है… लॉग बुक खाली, सचिव को चालू-बंद का भी पता नहीं इस मामले में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि जनरेटर चालू होने और डीजल खपत की लॉग बुक में सितंबर 2024 के बाद से कोई एंट्री ही दर्ज नहीं है। जब इस विसंगति और डीजल खपत को लेकर मंडी सचिव हरनारायण भिलाला से सवाल किया गया, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब दिया कि "जब भी बिजली जाती है, जनरेटर चालू किया जाता है।" हैरानी की बात यह है कि सचिव को यह तक नहीं पता था कि जनरेटर वर्तमान में चालू हालत में है भी या नहीं। किसान बोले- लाइट जाती है तो अंधेरे में ही रहते हैं मंडी में उपज बेचने आने वाले किसानों और काम करने वाले हम्मालों का अनुभव कागजी दावों से बिल्कुल अलग है। उनका आरोप है कि उन्होंने मंडी में जनरेटर को चलते हुए कभी नहीं देखा। जब भी बिजली जाती है, उन्हें अंधेरे में ही रहना पड़ता है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में जनरेटर चलाकर हजारों का डीजल फूंका जा रहा है।