जनकार्य प्रभारी बोले- यहां तो आधा-एक फीट के चूहे:शास्त्री ब्रिज का किया निरीक्षण; कहा- भिक्षुक, दुकानदार खाद्य सामग्री पटक देते हैं

इंदौर के सबसे पुराने शास्त्री ब्रिज पर बड़ा गड्‌ढा होने के बाद सोमवार सुबह नगर निगम हरकत में आ गया। आज जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने ब्रिज का निरीक्षण किया और चिंता जताई। उन्होंने माना कि ब्रिज की यशवंत टॉकीज की भुजा के पास भिक्षुकों द्वारा जूठन, खाद्य सामग्री फेंकने से चूहों की भरमार है। इसके साथ ही काफी गंदगी है। इस कारण यहां आधा-आधा, एक-एक फीट के चूहे हैं। उनके इस बयान से नगर निगम ही नहीं बल्कि प्रशासन भी घिर गया है। दरअसल इस साल इंदौर को भिक्षुक मुक्त घोषित किया है। दूसरा कि इंदौर स्वच्छता में लगातार आठ बार अव्वल रहा है। ऐसे में उनके बयान पर सवाल उठे रहे हैं। जनकार्य प्रभारी ने कहा कि कल मामला सामने आने के बाद हमने इंजीनियर को भेजा और यहां गड्‌ढा भराने का काम किया है। यह समस्या आठ माह पहले भी आई थी। तब रीगल टॉकीज के सामने की भुजा के पास बड़े-बड़े गड्‌ढे हो गए थे। इस पर एसजीएसआईटीएस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों और अधिकारियों को बुलाकर निरीक्षण कराया था। तब पाया था कि चूहों ने बड़े-बड़े बिल करके मिट्‌टी बाहर निकाल दी थी। मामले में तब जब इंजीनियरों से पूछा और उनसे रिपोर्ट ली और ब्रिज की तीनों भुजाओं को देखा तो पता चला कि यशवंत टॉकीज की भुजा की ओर बड़ी संख्या में रिक्शा खड़े रहते हैं जिसके कारण लोग भी वहां खड़े रहते हैं। कई भिक्षुक भी यहां रहते हैं। ऐसे में कई दानदाता उन्हें भोजन, खाद्य सामग्री देते हैं। इसके बाद भिक्षुक खाने के बाद खाद्य सामग्री वहीं पटक देते हैं, जिसके कारण गंदगी तो होती ही है कि इसके कारण चूहे हैं। यशवंत टॉकीज भुजा के पास कुछ दुकानें हैं, इनकी भी गंदगी वहीं पड़ी रहती है। ऐसे में बड़े-बड़े चूहे वहां हो गए। उन्होंने कहा कि यहां आधा-आधा, एक-एक फीट के चूहे हो गए हैं। उन्होंने यहां काफी बिल बना लिए हैं। राठौर ने कहा कि हम इसका परीक्षण करा रहे हैं। किसी प्रकार का कांक्रीट हो इस पर राय ली जा रही है। हाल ही में 40 लाख का टेंडर जारी किया है, उससे नगर निगम जितने फुटपाथ हैं उन्हें कांक्रीट से बनाकर पेस्ट कंट्रोल करेंगे। साथ ही एसजीएसआईटीएस के एक्सपर्ट्स से राय लेकर आज से ही काम शुरू करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि यहां भोजन सामग्री न छोडे़। पुल काफी पुराना है लेकिन कोई परेशानी नहीं है। अभी जो गढ्ढा हुआ है उसके कारण खतरा नहीं है। इसकी जांच करवाई जा रही है। जनकार्य प्रभारी के बयान से उठे सवाल भिक्षुक मुक्त शहर का दावा झूठा? जनकार्य प्रभारी ने कहा कि ब्रिज के नीचे और भुजा के पास भिक्षुक भोजन कर जूठन फेंक देते हैं। सवाल यह है कि हाल ही में कलेक्टर ने इंदौर को ‘भिक्षुक मुक्त शहर’ घोषित किया था, तो फिर यहां भिक्षुक कैसे मौजूद हैं? यानी या तो कलेक्टर का दावा गलत है या जनकार्य प्रभारी का बयान। स्वच्छता में अव्वल शहर में गंदगी क्यों? राठौर ने माना कि भुजा के पास खान-पान और चाय की दुकानें गंदगी फैला रही हैं, जिससे चूहों की संख्या बढ़ रही है। सवाल यह है कि जब इंदौर लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है, तो फिर यहां इस स्तर की गंदगी कैसे फैल रही है? क्या नगर निगम और जोन अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? आठ माह पहले आई थी समस्या, समाधान क्यों नहीं? जनकार्य प्रभारी ने खुद बताया कि यह समस्या आठ महीने पहले भी सामने आई थी। तब निरीक्षण और रिपोर्ट के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? क्या नगर निगम ने केवल अस्थायी मरम्मत कर खानापूर्ति की थी? क्या इंदौर बन रहा है ‘चूहों का गढ़’? सिर्फ शास्त्री ब्रिज ही नहीं, शहर के अन्य हिस्सों में भी चूहों की बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय बनती जा रही है। दो माह पहले एमवाय अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की उंगलियां चूहों ने कुतर दी थीं, जिससे सरकार सवालों के घेरे में आ गई थी। इसके बाद एयरपोर्ट परिसर में चूहे दिखने का मामला भी सामने आया था। और अब, शास्त्री ब्रिज पर चूहों के कारण ढांचे को खतरा - यह सब घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि शहर में चूहों की भरमार प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। सवाल यह है कि क्या इंदौर अब चूहों का गढ़ बनता जा रहा है? ये खबर भी पढ़ें... इंदौर में चूहों ने खोद दी शास्त्री ब्रिज की मिट्‌टी इंदौर के पुराने और व्यस्त शास्त्री ब्रिज पर रविवार को रोड किनारे का एक हिस्सा अचानक धंस गया। जिससे यहां एक गड्ढा हो गया। गांधी प्रतिमा से शास्त्री मार्केट की ओर जाने वाली लेन में 5 फीट गहरा और करीब 6 फीट लंबा गड्ढा हो गया था। पूरी खबर पढ़ें...

जनकार्य प्रभारी बोले- यहां तो आधा-एक फीट के चूहे:शास्त्री ब्रिज का किया निरीक्षण; कहा- भिक्षुक, दुकानदार खाद्य सामग्री पटक देते हैं
इंदौर के सबसे पुराने शास्त्री ब्रिज पर बड़ा गड्‌ढा होने के बाद सोमवार सुबह नगर निगम हरकत में आ गया। आज जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने ब्रिज का निरीक्षण किया और चिंता जताई। उन्होंने माना कि ब्रिज की यशवंत टॉकीज की भुजा के पास भिक्षुकों द्वारा जूठन, खाद्य सामग्री फेंकने से चूहों की भरमार है। इसके साथ ही काफी गंदगी है। इस कारण यहां आधा-आधा, एक-एक फीट के चूहे हैं। उनके इस बयान से नगर निगम ही नहीं बल्कि प्रशासन भी घिर गया है। दरअसल इस साल इंदौर को भिक्षुक मुक्त घोषित किया है। दूसरा कि इंदौर स्वच्छता में लगातार आठ बार अव्वल रहा है। ऐसे में उनके बयान पर सवाल उठे रहे हैं। जनकार्य प्रभारी ने कहा कि कल मामला सामने आने के बाद हमने इंजीनियर को भेजा और यहां गड्‌ढा भराने का काम किया है। यह समस्या आठ माह पहले भी आई थी। तब रीगल टॉकीज के सामने की भुजा के पास बड़े-बड़े गड्‌ढे हो गए थे। इस पर एसजीएसआईटीएस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों और अधिकारियों को बुलाकर निरीक्षण कराया था। तब पाया था कि चूहों ने बड़े-बड़े बिल करके मिट्‌टी बाहर निकाल दी थी। मामले में तब जब इंजीनियरों से पूछा और उनसे रिपोर्ट ली और ब्रिज की तीनों भुजाओं को देखा तो पता चला कि यशवंत टॉकीज की भुजा की ओर बड़ी संख्या में रिक्शा खड़े रहते हैं जिसके कारण लोग भी वहां खड़े रहते हैं। कई भिक्षुक भी यहां रहते हैं। ऐसे में कई दानदाता उन्हें भोजन, खाद्य सामग्री देते हैं। इसके बाद भिक्षुक खाने के बाद खाद्य सामग्री वहीं पटक देते हैं, जिसके कारण गंदगी तो होती ही है कि इसके कारण चूहे हैं। यशवंत टॉकीज भुजा के पास कुछ दुकानें हैं, इनकी भी गंदगी वहीं पड़ी रहती है। ऐसे में बड़े-बड़े चूहे वहां हो गए। उन्होंने कहा कि यहां आधा-आधा, एक-एक फीट के चूहे हो गए हैं। उन्होंने यहां काफी बिल बना लिए हैं। राठौर ने कहा कि हम इसका परीक्षण करा रहे हैं। किसी प्रकार का कांक्रीट हो इस पर राय ली जा रही है। हाल ही में 40 लाख का टेंडर जारी किया है, उससे नगर निगम जितने फुटपाथ हैं उन्हें कांक्रीट से बनाकर पेस्ट कंट्रोल करेंगे। साथ ही एसजीएसआईटीएस के एक्सपर्ट्स से राय लेकर आज से ही काम शुरू करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि यहां भोजन सामग्री न छोडे़। पुल काफी पुराना है लेकिन कोई परेशानी नहीं है। अभी जो गढ्ढा हुआ है उसके कारण खतरा नहीं है। इसकी जांच करवाई जा रही है। जनकार्य प्रभारी के बयान से उठे सवाल भिक्षुक मुक्त शहर का दावा झूठा? जनकार्य प्रभारी ने कहा कि ब्रिज के नीचे और भुजा के पास भिक्षुक भोजन कर जूठन फेंक देते हैं। सवाल यह है कि हाल ही में कलेक्टर ने इंदौर को ‘भिक्षुक मुक्त शहर’ घोषित किया था, तो फिर यहां भिक्षुक कैसे मौजूद हैं? यानी या तो कलेक्टर का दावा गलत है या जनकार्य प्रभारी का बयान। स्वच्छता में अव्वल शहर में गंदगी क्यों? राठौर ने माना कि भुजा के पास खान-पान और चाय की दुकानें गंदगी फैला रही हैं, जिससे चूहों की संख्या बढ़ रही है। सवाल यह है कि जब इंदौर लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है, तो फिर यहां इस स्तर की गंदगी कैसे फैल रही है? क्या नगर निगम और जोन अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? आठ माह पहले आई थी समस्या, समाधान क्यों नहीं? जनकार्य प्रभारी ने खुद बताया कि यह समस्या आठ महीने पहले भी सामने आई थी। तब निरीक्षण और रिपोर्ट के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? क्या नगर निगम ने केवल अस्थायी मरम्मत कर खानापूर्ति की थी? क्या इंदौर बन रहा है ‘चूहों का गढ़’? सिर्फ शास्त्री ब्रिज ही नहीं, शहर के अन्य हिस्सों में भी चूहों की बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय बनती जा रही है। दो माह पहले एमवाय अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की उंगलियां चूहों ने कुतर दी थीं, जिससे सरकार सवालों के घेरे में आ गई थी। इसके बाद एयरपोर्ट परिसर में चूहे दिखने का मामला भी सामने आया था। और अब, शास्त्री ब्रिज पर चूहों के कारण ढांचे को खतरा - यह सब घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि शहर में चूहों की भरमार प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। सवाल यह है कि क्या इंदौर अब चूहों का गढ़ बनता जा रहा है? ये खबर भी पढ़ें... इंदौर में चूहों ने खोद दी शास्त्री ब्रिज की मिट्‌टी इंदौर के पुराने और व्यस्त शास्त्री ब्रिज पर रविवार को रोड किनारे का एक हिस्सा अचानक धंस गया। जिससे यहां एक गड्ढा हो गया। गांधी प्रतिमा से शास्त्री मार्केट की ओर जाने वाली लेन में 5 फीट गहरा और करीब 6 फीट लंबा गड्ढा हो गया था। पूरी खबर पढ़ें...