बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते रचा इतिहास, केबीसी की हॉट सीट तक पहुंचीं सरगुजा की शिक्षिका विभा चौबे
बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते रचा इतिहास, केबीसी की हॉट सीट तक पहुंचीं सरगुजा की शिक्षिका विभा चौबे
छत्तीसगढ़ संवाददाता
अंबिकापुर, 24 दिसंबर। सरगुजा जिले की शिक्षिका विभा चौबे ने अपने ज्ञान, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वे देश के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) की हॉट सीट तक पहुंचने वाली सरगुजा जिले की पहली महिला तथा छत्तीसगढ़ की पहली महिला शिक्षिका बन गई हैं। शो के जारी प्रोमो के अनुसार वे 31 दिसंबर और 1 जनवरी को महानायक अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर खेलती नजर आएंगी।
वर्तमान में विभा चौबे दरिमा गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और वर्षों से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती रही हैं। सतत अध्ययन और ज्ञानार्जन की उनकी लगन ने उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है। उनकी सफलता में उनके पति एवं मैनपाट मिडिल स्कूल के प्राचार्य प्रमेंद्र चौबे का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
विभा चौबे की इस उपलब्धि पर जिले के शिक्षा जगत में हर्ष की लहर है। उनका कहना है कि यदि दृढ़ निश्चय और मेहनत हो तो सपनों को साकार किया जा सकता है। उनकी यह सफलता विशेष रूप से ग्रामीण अंचल की महिलाओं, छात्राओं और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
अंबिकापुर, 24 दिसंबर। सरगुजा जिले की शिक्षिका विभा चौबे ने अपने ज्ञान, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वे देश के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) की हॉट सीट तक पहुंचने वाली सरगुजा जिले की पहली महिला तथा छत्तीसगढ़ की पहली महिला शिक्षिका बन गई हैं। शो के जारी प्रोमो के अनुसार वे 31 दिसंबर और 1 जनवरी को महानायक अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर खेलती नजर आएंगी।
वर्तमान में विभा चौबे दरिमा गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और वर्षों से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती रही हैं। सतत अध्ययन और ज्ञानार्जन की उनकी लगन ने उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है। उनकी सफलता में उनके पति एवं मैनपाट मिडिल स्कूल के प्राचार्य प्रमेंद्र चौबे का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
विभा चौबे की इस उपलब्धि पर जिले के शिक्षा जगत में हर्ष की लहर है। उनका कहना है कि यदि दृढ़ निश्चय और मेहनत हो तो सपनों को साकार किया जा सकता है। उनकी यह सफलता विशेष रूप से ग्रामीण अंचल की महिलाओं, छात्राओं और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।