बुरहानपुर में कोटवारों को मिली खाकी वर्दी और नीली टोपी:त्योहारों पर स्पेशल पुलिस ऑफिसर के रूप में करेंगे काम, पुलिस कर रही प्रशिक्षित
बुरहानपुर में कोटवारों को मिली खाकी वर्दी और नीली टोपी:त्योहारों पर स्पेशल पुलिस ऑफिसर के रूप में करेंगे काम, पुलिस कर रही प्रशिक्षित
मध्य प्रदेश सरकार ने कोटवारों को पुलिस की तरह खाकी वर्दी पहनने की अनुमति दे दी है। अब प्रदेश के कोटवार खाकी वर्दी और नीली टोपी में नजर आएंगे। पहले कोटवारों की वर्दी नीले रंग की होती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत उनकी पहचान और भूमिका को और मजबूत करने के उद्देश्य से वर्दी में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस की तर्ज पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में उनकी भूमिका को और प्रभावी बनाया जा सके। खाकी वर्दी में नजर आएंगे कोटवार सरकार के निर्णय के बाद अब कोटवारों की पारंपरिक नीली वर्दी की जगह खाकी वर्दी ने ले ली है। हालांकि उनकी वर्दी पर स्पष्ट रूप से ‘मप्र कोटवार’ लिखा रहेगा, जिससे उनकी पहचान पुलिस कर्मियों से अलग बनी रहेगी। खाकी वर्दी के साथ उन्हें नीली टोपी भी दी जा रही है। बुरहानपुर जिले में 250 कोटवारों को मिलेगा लाभ बुरहानपुर जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 250 कोटवार कार्यरत हैं। इनमें से कुछ को नई खाकी वर्दी प्रदान की जा चुकी है, जबकि शेष कोटवारों को भी चरणबद्ध तरीके से वर्दी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में लागू कर रहा है। पुलिस की तर्ज पर दिया जा रहा प्रशिक्षण वर्दी परिवर्तन के साथ कोटवारों को पुलिस विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्हें बुनियादी ड्रिल, परेड, अनुशासन और पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें ‘सावधान’, ‘विश्राम’ और अन्य आवश्यक गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर चल रहा प्रशिक्षण बुरहानपुर शहर के कोटवारों को पुलिस लाइन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कोटवारों को खकनार, नेपानगर थाना और नावरा चौकी में प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें कानून व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों और समन्वय की जानकारी दी जा रही है। फील्ड में नई पहचान के साथ करेंगे काम प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी कोटवार अपनी नई खाकी वर्दी में फील्ड में दिखाई देंगे। हालांकि उनकी बैच पर ‘मप्र कोटवार’ अंकित रहेगा, जिससे उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से अलग पहचानी जा सकेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कोटवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और लोगों के साथ उनका समन्वय बेहतर होगा। त्योहारों पर निभाएंगे विशेष जिम्मेदारी सरकार और पुलिस विभाग ने त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान कोटवारों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाने की योजना बनाई है। ऐसे अवसरों पर उन्हें ‘स्पेशल पुलिस ऑफिसर’ (एसपीओ) के रूप में भी जाना जाएगा। वे पुलिस और प्रशासन को जमीनी स्तर की सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे। कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में सहयोग कोटवार पहले से ही गांवों में सूचना तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। अब उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध से संबंधित सूचनाएं तत्काल पुलिस तक पहुंचाने, स्थायी वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने जैसी जिम्मेदारियों के लिए अधिक व्यवस्थित रूप से तैयार किया जा रहा है। सिंहस्थ और मोहर्रम को देखते हुए तैयारी बुरहानपुर एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि आगामी सिंहस्थ और मोहर्रम जैसे बड़े आयोजनों में अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है। कई बार पुलिस जवानों को 36 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशिक्षित कोटवार पुलिस बल के सहयोगी के रूप में काम करेंगे और फोर्स मल्टीप्लायर की भूमिका निभाएंगे। ग्राम और नगर रक्षा समितियों के साथ होगा समन्वय एसपी ने बताया कि पुलिस विभाग ग्राम और नगर रक्षा समितियों को भी प्रशिक्षित कर रहा है। इसी क्रम में कोटवारों को भी व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि गांव स्तर पर पुलिस और प्रशासन का मजबूत नेटवर्क तैयार हो सके। हर गांव में मिलेगा प्रशासन का सहयोगी प्रशिक्षण और नई व्यवस्था के बाद गांवों में कानून व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं तेजी से पुलिस तक पहुंच सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण, शांति व्यवस्था और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बढ़ेगी। अब हर गांव में पुलिस और प्रशासन का एक प्रशिक्षित सहयोगी मौजूद रहेगा। पहले से मौजूद जिम्मेदारियों को मिलेगा नया स्वरूप अधिकारियों के अनुसार कोटवारों के कई दायित्व पहले से निर्धारित हैं, लेकिन उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता था। अब उन्हें उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से अपना काम कर सकेंगे। भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेगी भूमिका प्रशासन का मानना है कि कोटवारों की भूमिका केवल सिंहस्थ और मोहर्रम तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में भी वे पुलिस और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम सहयोग देंगे।
मध्य प्रदेश सरकार ने कोटवारों को पुलिस की तरह खाकी वर्दी पहनने की अनुमति दे दी है। अब प्रदेश के कोटवार खाकी वर्दी और नीली टोपी में नजर आएंगे। पहले कोटवारों की वर्दी नीले रंग की होती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत उनकी पहचान और भूमिका को और मजबूत करने के उद्देश्य से वर्दी में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पुलिस की तर्ज पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में उनकी भूमिका को और प्रभावी बनाया जा सके। खाकी वर्दी में नजर आएंगे कोटवार सरकार के निर्णय के बाद अब कोटवारों की पारंपरिक नीली वर्दी की जगह खाकी वर्दी ने ले ली है। हालांकि उनकी वर्दी पर स्पष्ट रूप से ‘मप्र कोटवार’ लिखा रहेगा, जिससे उनकी पहचान पुलिस कर्मियों से अलग बनी रहेगी। खाकी वर्दी के साथ उन्हें नीली टोपी भी दी जा रही है। बुरहानपुर जिले में 250 कोटवारों को मिलेगा लाभ बुरहानपुर जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 250 कोटवार कार्यरत हैं। इनमें से कुछ को नई खाकी वर्दी प्रदान की जा चुकी है, जबकि शेष कोटवारों को भी चरणबद्ध तरीके से वर्दी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में लागू कर रहा है। पुलिस की तर्ज पर दिया जा रहा प्रशिक्षण वर्दी परिवर्तन के साथ कोटवारों को पुलिस विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्हें बुनियादी ड्रिल, परेड, अनुशासन और पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें ‘सावधान’, ‘विश्राम’ और अन्य आवश्यक गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर चल रहा प्रशिक्षण बुरहानपुर शहर के कोटवारों को पुलिस लाइन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कोटवारों को खकनार, नेपानगर थाना और नावरा चौकी में प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें कानून व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों और समन्वय की जानकारी दी जा रही है। फील्ड में नई पहचान के साथ करेंगे काम प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी कोटवार अपनी नई खाकी वर्दी में फील्ड में दिखाई देंगे। हालांकि उनकी बैच पर ‘मप्र कोटवार’ अंकित रहेगा, जिससे उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से अलग पहचानी जा सकेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कोटवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और लोगों के साथ उनका समन्वय बेहतर होगा। त्योहारों पर निभाएंगे विशेष जिम्मेदारी सरकार और पुलिस विभाग ने त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान कोटवारों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाने की योजना बनाई है। ऐसे अवसरों पर उन्हें ‘स्पेशल पुलिस ऑफिसर’ (एसपीओ) के रूप में भी जाना जाएगा। वे पुलिस और प्रशासन को जमीनी स्तर की सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे। कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में सहयोग कोटवार पहले से ही गांवों में सूचना तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। अब उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध से संबंधित सूचनाएं तत्काल पुलिस तक पहुंचाने, स्थायी वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने जैसी जिम्मेदारियों के लिए अधिक व्यवस्थित रूप से तैयार किया जा रहा है। सिंहस्थ और मोहर्रम को देखते हुए तैयारी बुरहानपुर एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि आगामी सिंहस्थ और मोहर्रम जैसे बड़े आयोजनों में अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है। कई बार पुलिस जवानों को 36 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशिक्षित कोटवार पुलिस बल के सहयोगी के रूप में काम करेंगे और फोर्स मल्टीप्लायर की भूमिका निभाएंगे। ग्राम और नगर रक्षा समितियों के साथ होगा समन्वय एसपी ने बताया कि पुलिस विभाग ग्राम और नगर रक्षा समितियों को भी प्रशिक्षित कर रहा है। इसी क्रम में कोटवारों को भी व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि गांव स्तर पर पुलिस और प्रशासन का मजबूत नेटवर्क तैयार हो सके। हर गांव में मिलेगा प्रशासन का सहयोगी प्रशिक्षण और नई व्यवस्था के बाद गांवों में कानून व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं तेजी से पुलिस तक पहुंच सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण, शांति व्यवस्था और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बढ़ेगी। अब हर गांव में पुलिस और प्रशासन का एक प्रशिक्षित सहयोगी मौजूद रहेगा। पहले से मौजूद जिम्मेदारियों को मिलेगा नया स्वरूप अधिकारियों के अनुसार कोटवारों के कई दायित्व पहले से निर्धारित हैं, लेकिन उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता था। अब उन्हें उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से अपना काम कर सकेंगे। भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेगी भूमिका प्रशासन का मानना है कि कोटवारों की भूमिका केवल सिंहस्थ और मोहर्रम तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में भी वे पुलिस और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम सहयोग देंगे।