रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 1.20 लाख रुपए की ठगी:पार्सल ट्रैक करने के नाम पर भेजा लिंक, वीडियो कॉल के दौरान खाते से निकाले पैसे
रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 1.20 लाख रुपए की ठगी:पार्सल ट्रैक करने के नाम पर भेजा लिंक, वीडियो कॉल के दौरान खाते से निकाले पैसे
इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में रहने वाले स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी साइबर ठगी का शिकार हो गए। बदमाशों ने डीटीडीसी (DTDC) कूरियर का पार्सल ट्रैक कराने के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर उनके खाते से 1 लाख 20 हजार रुपए निकाल लिए। मामले में कनाड़िया थाना पुलिस ने रविवार रात अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार 63 वर्षीय प्रकाश सातपुते निवासी बिचौली हप्सी स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने अपने बेटे प्रखर, जो बेंगलुरु में रहता है, के लिए डीटीडीसी कूरियर से घरेलू सामान का पार्सल भेजा था। कूरियर कंपनी ने उन्हें ट्रैकिंग नंबर भी दिया था। पार्सल 20 जुलाई को डिलीवर होना था, लेकिन 21 जुलाई को बेटे से बात करने पर पता चला कि पार्सल अब तक नहीं पहुंचा। ट्रैकिंग के नाम पर भेजा फर्जी लिंक इसके बाद प्रकाश सातपुते ने इंटरनेट पर ट्रैकिंग नंबर डालकर पार्सल की जानकारी लेने का प्रयास किया। इस दौरान एक चैट बॉक्स खुला, जहां से उन्हें वॉट्सएप पर संपर्क करने के लिए कहा गया। कुछ देर बाद एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही वीडियो कॉल शुरू हो गई। कॉल में किसी का चेहरा दिखाई नहीं दिया, केवल आवाज सुनाई दे रही थी। बात करने वाले ने पार्सल ट्रैक करने के लिए एक और ऑनलाइन लिंक भेजा। लिंक खुलने पर एक फॉर्म दिखाई दिया, जिसमें जानकारी भरने के बाद 5 रुपए ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा गया। प्रकाश सातपुते ने अपने क्रेडिट कार्ड का विवरण दर्ज कर दिया। आधे घंटे में खाते से उड़ गए 1.20 लाख रुपए इसके बाद ठग ने ओटीपी आने की बात कही, लेकिन मोबाइल स्क्रीन अचानक ब्लैक हो गई। करीब आधे घंटे तक कॉल जारी रही। इसी दौरान मोबाइल पर लगातार मैसेज आने लगे और खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 1 लाख 20 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब खाते से रकम कटने के संदेश आए तो उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया मामला शिकायत के आधार पर कनाड़िया थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी लिंक और वीडियो कॉल के जरिए आरोपियों ने किस तरह बैंकिंग जानकारी हासिल कर ठगी को अंजाम दिया।
इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में रहने वाले स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी साइबर ठगी का शिकार हो गए। बदमाशों ने डीटीडीसी (DTDC) कूरियर का पार्सल ट्रैक कराने के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर उनके खाते से 1 लाख 20 हजार रुपए निकाल लिए। मामले में कनाड़िया थाना पुलिस ने रविवार रात अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार 63 वर्षीय प्रकाश सातपुते निवासी बिचौली हप्सी स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने अपने बेटे प्रखर, जो बेंगलुरु में रहता है, के लिए डीटीडीसी कूरियर से घरेलू सामान का पार्सल भेजा था। कूरियर कंपनी ने उन्हें ट्रैकिंग नंबर भी दिया था। पार्सल 20 जुलाई को डिलीवर होना था, लेकिन 21 जुलाई को बेटे से बात करने पर पता चला कि पार्सल अब तक नहीं पहुंचा। ट्रैकिंग के नाम पर भेजा फर्जी लिंक इसके बाद प्रकाश सातपुते ने इंटरनेट पर ट्रैकिंग नंबर डालकर पार्सल की जानकारी लेने का प्रयास किया। इस दौरान एक चैट बॉक्स खुला, जहां से उन्हें वॉट्सएप पर संपर्क करने के लिए कहा गया। कुछ देर बाद एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही वीडियो कॉल शुरू हो गई। कॉल में किसी का चेहरा दिखाई नहीं दिया, केवल आवाज सुनाई दे रही थी। बात करने वाले ने पार्सल ट्रैक करने के लिए एक और ऑनलाइन लिंक भेजा। लिंक खुलने पर एक फॉर्म दिखाई दिया, जिसमें जानकारी भरने के बाद 5 रुपए ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा गया। प्रकाश सातपुते ने अपने क्रेडिट कार्ड का विवरण दर्ज कर दिया। आधे घंटे में खाते से उड़ गए 1.20 लाख रुपए इसके बाद ठग ने ओटीपी आने की बात कही, लेकिन मोबाइल स्क्रीन अचानक ब्लैक हो गई। करीब आधे घंटे तक कॉल जारी रही। इसी दौरान मोबाइल पर लगातार मैसेज आने लगे और खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 1 लाख 20 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब खाते से रकम कटने के संदेश आए तो उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया मामला शिकायत के आधार पर कनाड़िया थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी लिंक और वीडियो कॉल के जरिए आरोपियों ने किस तरह बैंकिंग जानकारी हासिल कर ठगी को अंजाम दिया।